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Asha Jakar

Classics


2.4  

Asha Jakar

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नई रोशनी

नई रोशनी

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राखी का त्यौहार आने वाला है। श्वेता बड़ी बेसब्री से भाई का इंतजार कर रही है। शादी के बाद यह उसका पहला सावन है लेकिन उसके ससुर दीनदयालजी दहेज पूरा न देने के कारण उसे उसके मायके नहीं भेज रहे हैं। दो बार उसका भाई आकर लौट गया है। दीनदयाल जी का कहना है कि उन्होंने शादी में कार देने का वायदा किया था और अभी तक कार नहीं दी है, शादी को 8 महीने हो गए हैं। जब वे हमें कार देंगे तभी हम श्वेता को मायके भेजेंगे।

दीनदयाल जी की पत्नी पुष्पा रानी कई बार कह चुकी हैं कि हमारे पास क्या कमी है जो आप कार के पीछे पड़े हैं हमारी बहू सुशील, सर्वगुण संपन्न, पढ़ी-लिखी और संस्कारी है। बेटे आशीष को यह बिलकुल अच्छा नहीं लगता कि आप कार न मिलने के कारण श्वेता को मायके नहीं भेजते हैं।तभी अचानक फोन की घंटी बजी।

पुष्पा रानी ने दौड़कर फोन उठाया" हेलो "कौन स्मिता ?

हाँ माँ,

अरे तू कब आ रही है ?

नहीं माँ, मैं नहीं आ रही हूँ। मेरे ससुर जी मुझे नहीं भेज रहे हैं उनका कहना है कि जब तक श्वेता को नहीं भेजेंगे तो मैं भी अपनी बहू को नहीं भेजूँगा।

पुष्पा रानी दीनदयाल जी से बोली "ये लो, आपके समधी भी अब आपकी बेटी को नहीं भेज रहे हैं।

"क्यों ?अरे हमने तो उनको 10 लाख दिए हैं।कैसे नहीं भेजेंगे? दीनदयाल जी तैश में बोले।

"'पर उन्होंने आपसे माँगे नहीं थे, आपने अपनी स्वेच्छा से दिए थे।"पुष्पा रानी पति को समझाते हुए बोली "अब आप समधी से बात करिए।"

ठीक है, ठीक है, श्वेता को मायके भेज दो।

तभी दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी।

पुष्पा रानी ने दौड़कर दरवाजा खोला सामने स्मिता और श्वेता के भाई शशांक को देख कर आश्चर्य चकित हुई।तभी स्मिता बोली."माँ, मैंने फोन यहीं से किया था, शशांक मेरे साथ आया है। पापा कहाँ है ?"

"अंदर कमरे में बैठे हैं "पुष्पा रानी बोली

स्मिता जल्दी से पापा के गले में बाहें डाल कर बोली "थैंक यू पापा, यह मेरा ही प्लान था।"

''सॉरी बेटा, तूने मेरी आँखें खोल दी, सच में तूने मुझे नई रोशनी दी है। दीनदयालजी ने स्मिता को गले लगा कर कहा।


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