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Sarita Kumar

Romance


4  

Sarita Kumar

Romance


सुधा और चन्दर

सुधा और चन्दर

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धर्मवीर भारती जी की उपन्यास गुनाहों का देवता जो साठ साल पहले लिखी गई है । आज भी पसंद की जा रही है पढ़ी जा रही है , 200 रूपए में खरीदी जा रही है । छः दशक में बहुत कुछ बदल गया हमारा रहन सहन , विचार व्यवहार और मानसिक दृष्टिकोण भी ।

मगर इस आधुनिक युग में भी मैंने एक सुधा को देखा है जो चन्दर से बेपनाह मोहब्बत करती है , सम्मान करती है , ईश्वर की तरह पूजती है , हर बात उनसे पूछती है , हर बात उनकी मानती है । चन्दर भी बहुत स्नेह करता है । सुधा की फ़िक्र रहती है उसे लेकिन उससे ज्यादा परवाह उसके परिवार की मर्यादा की है इसलिए सुधा से विवाह की बात नहीं सोचता है और उसकी शादी दूसरे एक अच्छे लड़के से करने के लिए राजी कर लेता है । सुधा बहुत रोती है बिलखती है तड़पती हैं क्योंकि किसी और की होना चाहती है । चन्दर से शादी नहीं हो तो कोई बात नहीं वो कुंवारी रहने को तैयार है । लेकिन किसी और की होकर चन्दर पर से अपना अधिकार गंवाना नहीं चाहती है । मगर सुधा के पिता की प्रतिष्ठा और उनकी एक जिम्मेदारी को अच्छे से पूरी करने के लिए ब्याह दी जाती है । चन्दर एक पुरुष का दिल रखता है इसलिए बहला लेता है कभी पम्मी और कभी बिनिता से और वक्त गुजरता चला जाता है । चन्दर को कभी कभी सुधा की याद बहुत आती है मगर फिर बिसार कर आगे बढ़ जाता है आखिर वो पुरूष जो ठहरा । सुधा एक स्त्री है जो पहली बार किया गया प्रेम भूला नहीं पाती है । पति के साथ रहकर भी हर पल चन्दर की याद चन्दर की फ़िक्र और चन्दर के ख्याल में ही गुजारने लगती है । और फिर एक दिन वो पागल करार कर दी जाती है । घर वालें दुःखी होते हैं सहानुभूति जताने जाते हैं मगर तब तक कुछ देर हो गई रहती है । सुधा अपनी याददाश्त खो चुकी होती है । पति और ससुराल वाले उसे याद नहीं रहते हैं । याद रहता है तो बस चन्दर । बेहोशी में बेख्याली में , नींद में या होश सिर्फ और सिर्फ उसे चन्दर याद रहता है । वह अपने बीस बरस के उम्र में लौट चुकी होती है । उसे अपना बचपन याद रहता है और उसी बचपन को जीना चाहती है । उसी तरह चन्दर के साथ लड़ना झगड़ना, रूठना मनाना और उसी अधिकार से कुछ भी बोलने लगती है । चन्दर बहुत असहज हो जाता है क्योंकि उसे तो याद है की सुधा किसी की पत्नी और किसी की बहू है इसलिए उसे संकोच होता है और वह दूर दूर रहना चाहता है । सुधा की हालत बेहद गंभीर हो गई है या तो उसे इंजेक्शन देकर बेहोश कर दिया जाता है या फिर वो चन्दर चन्दर चिल्लाने लगती है । सुधा की मानसिक और शारीरिक अवस्था को देखते हुए डॉक्टरों की राय है कि चन्दर को सुधा के पास रहने दिया जाए । सुधा के ससुराल वालों को कोई एतराज़ नहीं होता है क्योंकि उन सभी को सुधा से प्यार है उन्हें सुधा की जिंदगी बचाने के लिए हर शर्त मंज़ूर होता है । चन्दर अपने मन को समझा लेता है । हर रोज सुधा से मिलने हॉस्पिटल आता है । चन्दर को देखते ही सुधा का पीला पड़ा चेहरा खिल जाता है और वो चहकने लगती है । चन्दर उसे नाश्ता, खाना, दवा ,फल और जूस सब कुछ खिलाता है और धीरे-धीरे सुधा की हालत में सुधार होने लगता है ।

और फिर एक दिन चमत्कार होता है । सुधा के मेडिकल रिपोर्ट बहुत अच्छा आता है । डॉ कहते हैं कि जिस रफ्तार से सुधार हुआ है अगले सप्ताह आप घर ले जा सकते हैं । एक महीने तक इन्हें पूरा आराम करना है और कोशिश कीजिएगा की किसी तरह का कोई मानसिक तनाव नहीं हो और कोई सदमा नहीं लगे । चन्दर को सुधा के पास ही रहना होगा एक महीने बाद जब दोबारा जांच होगा और उस वक्त जैसा रिपोर्ट आएगा उसके हिसाब से निर्देश दिया जाएगा । फिलहाल चन्दर को ही संभालना होगा । चन्दर ना सिर्फ स्वीकारता है बल्कि पूरी निष्ठा से सुधा की देखभाल करता है ।

हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर घर आती है साथ में चन्दर भी रहता है एक महीने बाद जब दोबारा जांच होता है । रिपोर्ट बहुत अच्छा आता है । डॉ चन्दर का पीठ थपथपाते हैं । सुधा के परिवार वालों ने तो चन्दर को अपना भगवान ही मान लेते हैं । वास्तव में चन्दर एक फरिश्ता बनकर आया और दिन रात पूरी लगन से निस्वार्थ भाव से सुधा की सेवा की और अब जब पूर्णतः स्वस्थ हो गई है तब वह अपना सामान बांधने लगता है । सुधा के पति ने कहा कि "अभी तक तो डॉक्टर के आदेश पर आप हमारे साथ रहें अब कुछ दिन हमारी खुशी के लिए हमारे साथ रहिए ।" कल तक तो हम सभी चिंतित और शंकित थे लेकिन अब जब रिपोर्ट अच्छा आया है और सुधा हंसने बोलने लगी है । "चलने-फिरने लगी है तो कुछ दिन इनके साथ पुराने दिनों की याद ताज़ा कर लीजिए फिर चले जाइएगा । यह मेरी विनती है आपसे" और सुधा के पति ने हाथ जोड़कर सर झुका लिया । चन्दर मान गए और फिर सप्ताह भर और रूके ।

सुबह से शाम तक घर में रौनक छाई रहती । सुधा चन्दर से कहती कि आप चाय बनाओ तो चन्दर तुंरत बनाकर ले आते । इस तरह सभी लोग सुधा को लेकर निश्चिंत हो गये । चन्दर ने दो टिकट पेरिस की बुक करवाई और सुधा के पति को देते हुए कहा की "काफी दिनों से आप लोग दूर दूर रहने को मजबूर हो गये थे इसलिए अब जब सुधा पूर्णतः स्वस्थ हो गई है आपको पहचानने लगी है तो अब आप दोनों एक बार फिर से हनीमून पर जाईए । सुधा को पेरिस जाने की इच्छा बहुत दिनों से थी । उसे आइफ़िल टॉवर देखना है और वहां एक पूल है जहां जिसके नाम से ताला बंद करके चाबी पानी में फेंक देते हैं तो उनके साथ रिश्ता बहुत गहरा और मजबूत हो जाता है । ऐसा बहुत सालों से सुनी जा रही है पता नहीं कितनी सच्चाई है इस बात में ? तो अब आप लोग पेरिस जाइए और ताला बंद करके चाबी पानी में फेंक कर आइएगा ।" सुधा चन्दर की बातों पर बहुत जोर से हंसी और फिर चन्दर बाय करके टैक्सी में बैठ गया ।

सुधा खुशी खुशी विदा करके अपना सामान पैकिंग करने में जुट गई । चन्दर टैक्सी में बैठकर एक मैसेज किया सुधा को उसने लिखा "देखो सुधा मैं जा रहा हूं लेकिन फिर आऊंगा जब भी तुम्हें जरूरत महसूस हो कॉल करना मैं चला आऊंगा ।" एक बात मेरी भी मान लो तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी । तुम अपने पति को बहुत प्यार और सम्मान देना जितने दिन तुम बीमार रही हो उन्होंने चैन की रोटी नहीं खाई और ना ही सुकून की नींद सोएं । तुम्हारे करवट बदलने पर वह उठकर बैठ जाते थे । कभी पानी कभी चाय , कभी जूस लेकर हाजिर रहते थे तुम खाना नहीं खाती थी तो वो भी नहीं खाते थें । मैंने दुनिया में ऐसा पत्नी व्रता पति पहले कभी नहीं देखा । तुम्हारी जिंदगी बचाने के लिए उन्होंने अपनी जिंदगी जोखिम में डाल दी थी । उन्होंने सोमवार का व्रत भी किया था जो कि आज तक किसी पति ने अपनी पत्नी के लिए नहीं किया है । मैं एकमात्र गवाह हूं उनकी मोहब्बत का जो तुम्हारे लिए मैंने उनके आंखों में देखा है । अगर यकीन कर सको तो मेरी बातों का यकीन करना और मेरे लिए थोड़ा सा भी सम्मान की भावना है तो तुम उन्हें उनकी सही जगह पर विराजमान करो । मैं कहीं नहीं जा रहा हूं जब भी तुम दोनों को मेरी जरूरत महसूस होगी मैं हाज़िर हो जाऊंगा । मैं देखना चाहता हूं जो प्यार और समर्पण तुम्हारे पति के मन में तुम्हारे लिए है वैसा ही समर्पण तुम्हारे मन में भी हो अपने पति के लिए । मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि जितना प्यार तुम्हारे पति तुमसे करते हैं पूरे दुनिया जहान में कोई नहीं कर सकता है । तुम बहुत सौभाग्यशाली हो । हमेशा खुश रहो और मुझे यकीन है कि तुम अपने पति को भी खुश रखोगी । मैं जब आऊंगा तब तुम्हारा गुलशन गुलजार रहना चाहिए दो चार बच्चों की किलकारियां गूंजना चाहिए । हम सब मिलकर बहुत मस्ती करेंगे । " 

सुधा ने तुरंत मैसेज पढ़ा और फट से लिखने लगी "मैं जानती हूं आप सबसे अच्छे हैं दुनिया में आपसे अच्छा कोई हो ही नहीं सकता और आपसे ज्यादा मेरा भला चाहने वाला भी कोई नहीं है । अब मैं ठीक हो गई हूं सारी बातें समझने लगी हूं । अपने पति से प्यार भी करने लगी हूं । आप बेफिक्र होकर जाइए और मेरे पति से पूछ लीजिएगा मैं उनका ख्याल रखती हूं कि नहीं ? वो आपसे झूठ नहीं बोल सकते हैं । उन्हें झूठ बोलने की आदत नहीं है बहुत अच्छे इंसान हैं । गलती तो मेरी ही है मैंने उन्हें मन से स्वीकारा ही नहीं था और ना ही उन्हें वो अधिकार दिया था जिसके वो हकदार हैं । अब सब समझ गई हूं । आपको मेरी शिकायत सुनकर कभी शर्मिंदगी नहीं उठानी पड़ेगी । आप जैसा चाहते हैं मैं ठीक वैसा ही करूंगी । आज तक आपकी किसी आज्ञा का उलंघन की हूं ? नहीं न ? मैं बहुत अच्छी बच्ची हूं गुड गर्ल हूं । आप बिल्कुल चिंता नहीं कीजिए । जब हम पेरिस से लौटेंगे तब आप जरूर आइएगा ।" 

दो दिन बाद पेरिस जाना है सुधा को यकीन नहीं आ रहा था उसका एक पुराना सपना सच होने वाला है । जल्दी जल्दी उसने पैकिंग खत्म की और किचन में पहुंच गयी तभी पीछे से उसके पति पार्सल लेकर आएं और कहा खाना मत बनाओ मैं लेकर आ गया । तुम ज्यादा काम मत करो बस पैकिंग कर लो और जल्दी सो जाओ । सुधा को याद आया चन्दर से किया गया वादा । उसने कहा खाना खाकर आप मुझे सुला दीजिएगा । खाना ख़त्म करके सुधा ने चन्दर को मैसेज किया । "हमने खाना खा लिया अब सो जाऊंगी आप चिंता नहीं कीजिएगा "

सुधा बेड पर आते ही फट से सो गयी । सुधा के पति को नींद नहीं आ रही थी । उन्होंने मोबाइल देखा चन्दर का गुड नाईट मैसेज था । उसने जवाब में एक लम्बा मैसेज लिखा । "चन्दर जी , आपने जो कुछ हमारे लिए किया है उसका एहसान हम कभी नहीं चुका सकते हैं लेकिन संबंध कुछ ऐसे बन गये हैं आपके साथ की आधी रात को भी आपको कोई जरूरत पड़े एक आवाज दीजिएगा मैं हाज़िर मिलूंगा ।‌आपने बहुत बड़ी खुशियां दी है मुझे । आपकी वजह से ही सुधा जीवित हैं और मुझे हासिल हुई हैं । मैं यह कभी नहीं भूल सकता हूं अगर आपकी जगह कोई और होता तो आज सुधा मेरे पास नहीं होती । आपका आभार व्यक्त करने के लिए कोई शब्द नहीं है मेरे पास । मैं सुधा का बहुत ख्याल रखूंगा फिर भी आपसे एक वादा चाहता हूं जब कभी मुझे आपकी जरूरत पड़े आपको बुला सकूं । आपसे अपना सुख दुःख कह सकूं । आप ये तो समझ ही गए होंगे कि मैं अन्तरमुखी स्वभाव का इंसान हूं । अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाता हूं लेकिन आपसे मिलकर मुझे एक दोस्त मिल गया । मैंने जितनी बातें आपसे की है उतनी बातें सुधा से भी कभी नहीं की थी । आप हमारे बेस्ट फ्रेंड बन गये हैं इसलिए वादा कीजिए आप हमेशा हमारे साथ रहेंगे । "

चन्दर को भी नींद नहीं आ रही थी शायद आनलाइन थें । मैसेज पढ़कर जवाब भी दिया । "आप बेफिक्र रहिए मैं हमेशा आप लोगों के साथ हूं लेकिन थोड़ी दूरी भी जरूरी है लेकिन आपसे रोज बातचीत होती रहेगी । सुधा का हाल खबर आप देते रहिएगा । मैं कुछ दिनों तक सुधा को इग्नोर करना चाहता हूं । उसके सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए बहुत जरूरी है कि थोड़ी दूरी रखी जाए लेकिन आप नियमित रूप से हाल खबर देते रहिएगा । मुझ पर भरोसा रखिए और खुश रहिए आप लोगों का खुशहाल जीवन देखने के लिए मैं जल्दी ही आऊंगा ,शुभ रात्रि ।" सुधा बेसुध होकर सो रही थी । उसका मासूम सा चेहरा कुछ ज्यादा ही सुन्दर लग रहा था । उसके माथे पर हाथ फेर कर बाल हटाया और करवट लेकर सोने की कोशिश करने लगा । उसे यकीन नहीं आ रहा था कि चन्दर जैसा इंसान आज भी दुनिया में हो सकता है । परोपकार , त्याग और निस्वार्थ सेवा भावना कहां संभव है इस भौतिकवादी युग में । रिश्तेदार भी मतलब से संबंध चलाते हैं और चन्दर जिनसे कोई रिश्ता नाता नहीं है एक अजनबी जो फरिश्ता बनकर आए और मेरी दुनिया आबाद करके बेशुमार खुशियां देकर चले गए । ईश्वर से प्रार्थना करूंगा उनके जीवन में ढेरों खुशियां आएं उनकी हर तमन्ना , हर ख्वाहिश पूरी हो जाएं । औरों को खुशियां देने वाले फरिश्ता को कभी कोई दर्द न हो । 

सुधा ने करवट लिया और करीब आ गई । बरसों बाद पति-पत्नी सुकून की नींद सो रहे थें ।ईश्वर इन दोनों की खुशियां सलामत रखें और चन्दर को भी उनकी खुशियां मिल जाए ।


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