कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Abstract Inspirational


4.8  

कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Abstract Inspirational


सोशल मीडिया

सोशल मीडिया

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वह तो ज्यादातर समय ऑनलाइन ही रहता था

बिरले ही उसकी मुहल्ले में किसी से बात हो पाती थी


बस सुबह-सुबह चाय के प्याले से साथ बालकनी से

हाथ हिला कर अभिवादन हो जाया करता था


विगत दो दिन से वह बालकनी में नहीं आया था

बुखार से उसका शरीर जो टूट रहा था


शाम तक मुहल्ले वाले उसके घर पर

हाल चाल के लिए आने लगे थे

एक सज्जन तो डॉक्टर भी ले आए थे


अगले एक हफ्ते तक खाना पीना

पड़ोसियों के जिम्मे था

ठीक होने के बाद सोशल मीडिया पर डाले गए

इस पोस्ट को जबरदस्त लाइक मिल रहे थे।


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