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Uma Vaishnav

Horror

4.6  

Uma Vaishnav

Horror

समय यात्रा भाग - 7

समय यात्रा भाग - 7

3 mins
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मेक... .. "लगता है रिया.. तुम्हारी फ्रेंड को.... मेरा चेहरा बहुत पसंद आगया.... तभी तो...... मुझे देखते ही... मुह से.. भी नहीं... निकल रहा है...और क्यू ना हो... आखिर मैं... इतना हैंडसम जो हूँ."

रिया... "सुप्रिया को कोनी मरती है... तभी सुप्रिया एक दम से होस में आती और.. लड़खड़ाते शब्दों में... .. मेक

कहती हैं।तभी मेक और रिया दोनों एक साथ हँसते हैं, सुप्रिया कुछ समझ नहीं पाती है, तभी रिया कहती है.

"रिया... सुप्रिया,.. तुम मेक की बात का बुरा मत मानना.. उसे मजाक करने की आदत है।"

सुप्रिया.. "अरे नहीं.....ऎसी कोई बात नहीं... मुझे अच्छा लगा... मेक से मिलकर.."

तभी मेक मुस्कुराता है... और कहता है

मेक... . "फिर तो मैं और मजाक करूँगा।"

रिया... "इस बार मैं.. पीटूंगी तुम्हें"

तीनों एक साथ हँस.. पड़ते हैं। कुछ ही देर में फोन कट हो जाता है, और सुप्रिया गहरे ख़यालों में खो जाती है, उसके दिमाग में बहुत सारे सवाल...गोते खा रहे होते हैं। उसे यूं खोए देख... रिया उसे हिलाते हुए.. पूछती है..

.. "क्या हुआ? क्या बात है? कुछ कहोगी... मैं देख रही हूँ जब से तुमने मेक से बात की है... तब से पता नहीं कुछ खोई खोई सी लग रही हो... क्या बात है... कुछ बताओगी।"

सुप्रिया... "क्या बताऊँ.. तुम्हें यकीन नहीं होगा।"

रिया... "क्या यकीन नहीं होगा... पहले तुम बताओ तो सही... यकीन करना.. नहीं करना.. ये सब बाद की बात है। बोलो क्या बात है।"

सुप्रिया..." (थोड़ा रुकते हुए) वो.. मेक.. हैं ना वो भभभभीखूँ.. हैं... मेरा मतलब है कि.. वो बिल्कुल भीखूँ जैसा दिखता है।"

रिया.. "क्या??.. मुझे बेकूफ़ बना रही है... देख मुझे पता है कि.. तुझे अजीबो गरीब कहानियाँ पढ़ें और लिखने का शौक है... लेकिन मुझे फालतू में मत उलझा..... तू मजाक कर रही है ना.. तुझे भी मेक की आदत लग गई है... हैं ना. "


सुप्रिया.... 'मैं मजाक नहीं कर रही हूँ... तुझे नहीं पता.. मैं इन दिनों किस स्थिति से गुजरी हूँ.... अभी मुझ में मजाक करने की समता ही नहीं है.. तू मेरी सब से क्लोज फ्रेंड हैं.. मैं अपनी प्रॉब्लम.. तेरे साथ शेयर नहीं करूं तो किसके साथ करूँ... ।"

इतना कहते कहते... सुप्रिया के आँखों में आँसू आ जाते हैं।

तभी रिया उसके आँसू पूछती है, और कहती हैं।

रिया..."सॉरी..मुझे ऎसा नहीं कहना चाहिए था शायद.... पर क्या करूँ मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है, मेक जिससे तू पहले कभी मिली नहीं... तू कह रही है कि.. वो भीखूँ..... कुछ समझ में नहीं आ रहा है.... अच्छा ऎसा कर पहले मुझे.. तेरी वो किताब दिखा... मैं वो किताब पढ़ाना चाहूंगी।

सुप्रिया... ठीक है.. अभी लाती हूँ।'

इतना कह कर सुप्रिया टेबल पर पड़ी.. वो किताब उठा लाती है, और रिया को देती है... रिया किताब को खोल कर पढ़ने लगती है तभी रूम में जोर जोर से हवाएँ चलने लगती है, सारा सामान इधर से उधर.. होने लगता है, दोनों बहुत घबरा जाती है, सुप्रिया रिया का हाथ कश कर पकड़ लेती है, कुछ ही देर में वहां घोर अंधेरा छा जाता है, और अगले ही पल....

कहानी जारी रहेगी..


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