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Sumit Mandhana

Tragedy

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Sumit Mandhana

Tragedy

साहित्य से समाज तक

साहित्य से समाज तक

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सत्य घटना पर आधारित मेरी नई कहानी, शीर्षक है " सिक्सथ सेंस "

   

अपने शादी के एल्बम में सजी डेढ़ सौ फोटो को डेढ़ घंटे से सुनिल निहार रहा था। उसकी माँ उसे कब से देख रही थी। माँ से रहा नहीं गया तो पास में आकर बोली बेटा और कितना निहारेगा इन फोटो को? 

   सुनिल बोला निहारने दो माँ अब इन फोटो के सिवाय बचा ही क्या है मेरे पास! मेरा इन्वेस्टमेंट मेरी प्रॉपर्टी मेरे बच्चे सब कुछ तो मेरे बीवी ने ले लिया, छीन लिया ! अब मेरे पास तो ये ऐल्बम ही बचा है, कम से कम इन्हें तो नहीं देख लेने दो माँ।

   फिर सुनिल माँ से कहता है, तुम्हें पता है मां मेरा सिक्सथ सेंस बहुत पावरफुल है। कोई भी अनहोनी घटना होने से पहले भगवान मुझे हिंट दे देते हैं। लेकिन मुझे कमाल लग रहा है मेरी जिंदगी में इतना बड़ा हादसा हो गया और इस बार मुझे भगवान ने इसके बारे में बिल्कुल भी नहीं बताया ऐसा कैसे हो गया माँ । 

   

   मां बोली बेटा ऐसा नहीं है भगवान ने तुझे एक बार नहीं चार बार बताया, तू ही उनकी बात समझ नहीं पाया! पिछले साल जब दीपावली पर झगड़ा करके वह तुझसे अलग होकर अपने मायके जा रही थी। तब तूने झुक कर, हाथ जोड़कर उसे रोक लिया था। वो रुक तो गई लेकिन उसने तुझे उसके परिवार के सभी लोगों से माफी मांगने को कहा था। तू ने रिश्ता बचाने की खातिर माफी मांग तो ली ,लेकिन यह तेरे को भगवान का पहला इशारा था।

   

   उसके बाद जब अभी 5 महीने पहले तुम्हारे झगड़े हुए और उसने तुझे घर से जाने के लिए कहा, तू वहां से चला गया। तुझे छोटे भाई ने समझाया भी था की भाभी ने फोन करके उसे स्पष्ट शब्दों में कह दिया अब वो आपके साथ रहना नहीं चाहती। आप को तलाक देना चाहती है । लेकिन तूने उसकी बात को अनसुना किया और बोला नहीं मैं अपने बीवी बच्चों को नहीं छोडूंगा भगवान का ये तुझे दूसरा इशारा था ।


   कुछ महीनों पहले जब तू वकील से सलाह लेने गया तो उन्होंने तेरी सारी बातें सुनकर कहा की तुम उसे भूल जाओ। वो तलाक चाहती है, उसे तलाक दे दो और नये जीवन साथी के साथ नया जीवन बसाओ। भगवान ने तुझे तीसरी बार इशारा दिया, लेकिन तू तब भी नहीं माना । 

     

   भगवान ने फिर भी तुझे एक बार और इशारा किया। ये चौथी बार था! तेरे बड़े भाई ने तेरी बीवी सुनीता से बात करके सुलह करवानी चाही। लेकिन उसने उसे भी मना कर दिया । वो किसी और के साथ घर बसाना चाहती है और तेरे साथ नहीं रहना चाहती, साफ तो बोल दिया था उसने। इतना होने पर भी तू नहीं समझा और तूने घर के बैंक लोन के हफ्ते भरने बंद नहीं किए। यही सोचता रहा कि, अगर हफ्ते भरने बंद किए बैंक वाले घर को सील कर देंगे और फिर मेरे बीवी बच्चे सड़क पर आ जायेंगे। लेकिन वह अपनी पूरी प्लानिंग के साथ आगे बढ़ती गई और तुझे सड़क पर ले आई!!


  सुनिल बोलता है क्या सब गलती मेरी है? मेरा अच्छा चरित्र, अच्छा नेचर यही दोषी है ? क्या अच्छा बनना बुरी बात है माँ ? माँ बोली बेटा अच्छा बनना बुरी बात नहीं है, लेकिन हद से ज्यादा झुकना बुरी बात है। पहले कटाई भी उन्हीं पेड़ों की होती है जो झुके हुए होते हैं । सीधे पेड़ों को बाद में काटा जाता है। आज की दुनिया में जीना है तो, ना अच्छा बन के जियो, ना बुरा बन के जियो। लेकिन किसी आगे झुक कर मत जियो क्योंकि जमाने की आदत झुकने वाले को दुनिया और झुकाती है।



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