STORYMIRROR

Amita Kuchya

Abstract Inspirational

4  

Amita Kuchya

Abstract Inspirational

रिश्तों की दरार

रिश्तों की दरार

4 mins
371

आज राधा को लग रहा है कि वह कितनी अकेली हो गई है, कोई अपना उसके साथ नहीं है। सबके साथ उसके औपचारिक संबंध ही रह गए थे। सब रिश्तेदार मौके की ताक में थे कि कहीं कुछ उन्नीस बीस हो और टोके।


यही आदत राधा की थी। वह ऊपर -ऊपर मीठी बातें करती, पर पीठ पीछे उसे हर समय कमी ही दिखाई देती। उसे लगता कि जैसे उसका ऐसी परिस्थिति से सामना ही न होगा। खैर •••

समय किसी के लिए नहीं रुकता! आज उसे यह रह - रह कर समय की नजाकत समझ आ रही थी। वह जब भी किसी के यहां जाती तो अपने पैसे का रौब दिखाती •••

पर अब राधा को अपनी बेटी की शादी करनी थी। उसके किसी के भी साथ संबंध अच्छे नहीं थे। उसकी छोटी बहन से भी नहीं बनती थी। एक बार वह अपनी बहन के ही साथ ही किसी शादी में गयी वहां आने जाने का किराया भी मांगने में उसे शर्म नहीं आई। और तो और जब उसे काम होता तो अपने आप ही फोन लगातीं ।


पर कहा जाता है कि दूध का जला भी छाछ को फूंक फूंककर पीता है। अब छोटी बहन ने भी उससे दूरी बना ली, उससे कोई संबंध भी नहीं रखा जो उसकी अपनी बहन ने सोचा जो इतनी बेइज्जती करें, उससे क्या रिश्ता रखना!इस तरह उससे भी आपसी रिश्तों में दरार पड़ गई।


ऐसा ही हाल उसका भाइयों के साथ था। भाई भाभी के खिलाफ हमेशा मां पापा के कान भरती। इस तरह राधा भाई भाभी के मन से भी उतर चुकी थी। उसके प्रति सम्मान और आदर अब भाई भाभी के मन में भी नहीं रहा!


राधा अपने ससुराल में कभी रही नहीं, इसलिए झुकना भी नहीं सीखा।

उसके पति भी सीधे सादे थे। मायके पक्ष के नाम पर कुछ रिश्तेदार ही दिख रहे थे। पर सगाई में भाई बहन कोई नहीं आए थे,उसे लग रहा था लोकराज के लिए पापा भैया भाभी कोशादी में जरुर भेजेंगे पर भाभी भैया को कसक भर गई कि किसी की बहन ऐसी नहीं होती जो अपने घर परिवार में आग लगाए, उसके कहे अनुसार पापा मां का व्यवहार बदल जाए तभी से भैया भाभी ने सोच रखा था कि हम इनकी देहरी में कदम न रखेंगे। ये बहन ही हमारे लिए न के बराबर है। जब तक मां पापा है तभी तक आए नहीं तो ये किस काम की! जिन्हें रिश्ते की कद्र तक नहीं है। वो सुबह मायके आती और मां पापा के कान‌ भर कर चली जाती, इनके आने पर हमारे ही घर का माहौल खराब होता।

जीजा जब कार्ड रखने घर गए, तभी भाभी भैया मना कर चुके थे। हम नहीं आने वाले हैं, जिस तरह जो जवाब मिला उससे भी राधा को उम्मीद न के बराबर ही थी।


बच्चे भी बड़े हो चुके थे। उनमें मां के गुण आ चुके थे। उन्हें इतना तो आ गया था कि कैसे अपना उल्लू सीधा करना है, अर्थात उनमें भी वो कला आ गई थी।

अब जब बड़ी बेटी का रिश्ता भी तय हुआ, तब मामा पक्ष के लिए बात पूछी गई तब तो उन्होंने बात जैसे तैसे संभाल ली।

अब शादी के दिन जैसे जैसे नजदीक आ रहे थे। तो उन्होंने अपनी मौसा को मुखिया बनाया। और लेन देन की बात तय की। लेकिन शादी के दिन अभी तक मायके पक्ष से उसके यहां कोई नहीं आया उसकी आंखें घर के द्वार पर टिकी हुई थी।


उसे विश्वास था कि खून के रिश्ते इतने कमजोर नहीं हो सकते!

उसे लगता कि देर से ही सही भाई तो जरूर आयेगा ही••••


अब चीकट का समय हो चुका था। अभी तक भैया भाभी का कोई पता न था। फोन लगाया पर वो बंद आ रहा था। अब उसकी चिंता बढ़ती जा रही थी कि सबको क्या बोले...


अब मामा के बेटों को बैठाया और रस्म पूरी की ।

सबके सामने अपनी गलती मानी और कहा कि पैसे से प्यार और विश्वास को खरीदा नहीं जा सकता है।  


अब मायके की तरफ से मौसी मामा की तरफ से बैठे लोगों को अहसास हुआ कि राधा अपने किए पर बहुत शर्मिन्दा है।


आज राधा को समझ आया कि रिश्तों का कोई मोल नहीं, वह बहुत अनमोल होते हैं, उसे पैसों से तोला नहीं जा सकता है। अब उसके बच्चों ने भी समझाया कि मम्मी इस सच को बदल नहीं सकते हैं । कि मामा मौसी आएंगे •••आज अपना काम भी नहीं रुकेगा। जो होना था, वो हो गया।


खैर बेटी की शादी जैसे तैसे हो गई। पर रिश्ते को कैसे निभाया जाए। वह इस बात को भली-भांति समझ चुकी थी। उसने अपनी बेटी की शादी में सबके साथ अच्छा व्यवहार किया और किसी को कुछ बोलने का मौका नहीं दिया।  


दोस्तों -रिश्तों के एहसास की कहानी है। रिश्तों की अहमियत न समझी जाए तो रिश्तों को रेत की तरह फिसलते देर नहीं लगती। इसलिए किसी को भी बेइज्जत मत कीजिए। उसका सम्मान कीजिए। सबके पास आत्मसम्मान है।



Rate this content
Log in

Similar hindi story from Abstract