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Sunil Joshi

Classics

4  

Sunil Joshi

Classics

रिचार्ज

रिचार्ज

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 सुमित और उसके पिताजी ड्रार्इंग रूम में बैठे शाम की चाय पीते पीते आपस में बात कर रहे थे। सुमित की मां अटैची में कपड़े डालते हुए सुमित को दिल्‍ली में अच्‍छी तरह से रहने व खाने पीने का ध्‍यान रखने की हिदायत दे रही थी। फिर कहने लगी ''सुमित, तेरी उस ट्रांसफर अप्‍लीकेशन का क्‍या हुआ ? अभी कोई उम्‍मीद है कि यहॉं लखनउ में तुम्‍हारा ट्रांसफर हो जाए ?

 ''देखते है मम्‍मी, अपलीकेशन तो लगा रखी है। लेकिन आपको तो पता ही है कि आजकल बिना जान पहचान के आसानी से कहॉं काम होते है।'' कुछ निराश होते हुए सुमित ने कहा।

 तभी सुमित के पिताजी बोले '' अच्‍छा ये बताओ तुम्‍हारा बॉस कौन है जिसने ट्रांसफर करना है ?

 सुमित -कोई मिस्‍टर अमित त्रिवेदी हैं।

  सुमित के पिताजी ने जब ये नाम सुना तो आश्‍चर्य से बोले ''अरे अमित है क्‍या ? कहीं ये वो अमित तो नहीं जो जयपुर का रहने वाला है। कोई फोटो है तुम्‍हारे पास ?

 सुमित एकदम चहककर बोला “हॉं पापा वो जयपुर के ही हैं और ये कहते हुए उसने अपने मोबाईल पर एक ग्रुप फोटो में अपने बॉस का फोटो अपने पापा की ओर कर दिया। फोटो देखकर बोले - ''अरे यही तो है अमित। अरे ये तो अपना जिगरी है। कल ऐसा करना, ऑफिस पहुँचकर अमित से मिलना ओर मेरा नाम लेकर अपने ट्रांसफर के लिए रिकवेस्‍ट करना। शायद बात बन जाए।

 सुमित के चेहरे पर एक खुशी के लहर आ गई और वो चहकते हुए बोला, ''पापा आपको उनका मोबाईल नंबर दूँ क्‍या, आप बात ही करलें।''

 सुमित के पापा बोले '' नहीं तुम तो बस जाकर मेरा नाम ले लेना।''

ये सारी बातें जो सुमित की मम्‍मी भी सुन रही थी, अब वो भी वहीं सोफे पर आकर बैठ गई और सुमित के पापा से बोली ''आप एक बार बात ही कर लेते अगर आपका दोस्‍त है तो। ''

सुमित के पापा बोले'' अरी भागवान उसकी जरूरत नहीं है। अगर उसके हाथ में होगा तो वो तुरंत कर देगा नहीं तो कोई न कोई रास्‍ता निकालेगा।'' सुमित की मम्‍मी थोडा नाराजगी के साथ कहती है ''ऐसे कोई काम होते हैं क्‍या ? अच्‍छा बताओ पिछली बार आप अपने दोस्‍त से कब मिले थे या पिछली बार कब बात करी थी।''

सुमित के पापा जरा लापरवाह और आत्‍मविश्‍वास के मिले जुले अंदाज में बोले '' अरे उससे मिले तो एक जमाना बीत गया, यही कोई 20-25 साल हो गए होंगे और बात भी याद नहीं कभी 20-25 साल पहले ही हुई होगी। लेकिन उससे क्‍या फर्क पड़ता है। बात नहीं करने या नहीं मिलने से दोस्‍ती थोड़े ही खत्‍म हो जाती है।'' ये सुनकर सुमित की मम्‍मी थोड़े तल्‍ख अंदाज में बोली '' जिनसे अपन रोज मिलते हैं उनसे तो काम करवा नहीं पाते ओर इनको लगता है कि जिस शख्‍स से ये पिछले 20-25 सालों में न मिले हैं और न ही बात करी है वो केवल इनका नाम सुनकर इनका काम कर देगा।'' कहते हुए उठकर चली गई।

 सुमित के पापा ने सुमित से कहा'' देखो बेटा तुम तो जाकर एक बार मिल लेना, फिर भी नहीं होता है तो मैं बात भी कर लूंगा।''

सुमित रात की ट्रेन से दिल्‍ली के लिए रवाना हो जाता है।

अगले दिन सुमित दिल्‍ली में अपने ऑफिस जाते ही अपने सबसे बड़े अधिकारी अमित के पास मिलने जाता है। वेा अमित के चपरासी के हाथ अपने नाम की पर्ची भेजता है।

 थोड़ी देर में अमित उसे कमरे में बुलवाता है। सुमित अंदर जाकर नमस्‍ते करता है और बताता है कि वो उन्‍हीं के ऑफिस में काम करता है।

अमित- हॉं हॉं, मुझे पता है तुम यहीं काम करते हो। एक आध बार शायद किसी काम से मैंने बुलाया भी था।

     सुमित- जी, सर।

क्रमश:............2


- 2 -

     अमित उसे बैठने के लिए कहता है और आने का कारण पूछता है।

  सुमित अपने पापा के बारे में बताता है। अपने दोस्‍त के बारे में सुनकर अमित का चेहरा एकदम खिल उठता है और वो कहता है '' अरे तुम राजेन्‍द्र के बेटे  हो। अरे एक साल से यहॉं काम कर रहे हो और बताया नहीं।''

     सुमित- सर, वो मुझे कल ही पापा ने बताया आपके बारे में।

     अमित -हॉं, कई बरस हो गए, न मुलाकात हुई और न ही कोई बातचीत। चलो अच्‍छा हुआ तुम्‍हारे बहाने अपने लंगोटिया यार से फिर से बातचीत हो जाएगी।

     सुमित पूछता है '' सर पापा को फोन लगाऊँ क्‍या ?

    अमित- नहीं अभी नहीं। पहले ये बताओ हमारा यार और बाकी सभी लोग कैसे हैं?

    सुमित- जी सर, सब अच्छे हैं।

    अमित उससे आने का कारण पूछता है तो सुमित कहता है “सर, वो मैंने लखनऊ ट्रान्स्फर के लिए आवेदन किया था ---“

    अमित ये सुनकर कुछ सोचता है और कहता है ''देखो सुमित, अभी तो लखनऊ में कोई वेकेंसी है नहीं, लेकिन ................ अच्‍छा चलो मैं देखता हूँ कि मैं क्‍या कर सकता हूँ , ठीक है।'' सुमित, अच्‍छा सर,कहते हुए कमरे से निकलने लगता है तो अमित कहता है ''अच्‍छा जरा जाके बड़े बाबूजी अस्‍थानाजी को मेरे पास भेज देना। सुमित ''जी अच्‍छा'' कहते हुए कमरे से बाहर आ जाता है। और जाकर अस्‍थाना जी को साहब के पास जाने के लिए कहता है।

     बड़े बाबूजी से कुछ बातचीत कर अमित उन्‍हें कहता है कि फाईल में और कुछ लिखवाना है तो लिखवा लेना और सुनो ये चिठ्ठी आज ही निकाल देना।

     शाम के चार बजे बड़े बाबूजी फाईल लेकर अमित के पास जाते हैं तो अमित पूछता है ''बन गई वो चिठ्ठी।''

बड़े बाबू, हॉं में सिर हिलाते है।

 अमित फाईल को टेबल पर रखने का ईशारा करता है और बड़े बाबूजी से कहता है ''आप जरा सुमित को मेरे पास भेज देना।''

 बड़े बाबू जाकर सुमित को साहब के पास जाने के लिए कहते हैं। सुमित को समझ नहीं आता है कि उसे अभी क्‍यूं बुलाया है, वो कुछ सोचता हुआ अमित के कमरे में दाखित होता है।

अमित - आओ सुमित, बैठो। सुमित के बैठने पर अमित एक पत्र उसकी ओर करता है, सुमित उस पत्र को लेकर पढ़ता है तो आश्‍चर्यचकित हो जाता है और खुशी से उछल पड़ता है, और कहता है ''सर थैंक यू सो मच, सर। मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि ये सब इतना जल्‍दी हो जाएगा।

 अमित कहता है '' देखो अभी लखनउ में वेकेंसी तो नहीं है लेकिन अब राजेन्‍द्र की बात भी नहीं टाल सकता इसलिए अभी एक साल के लिए डेपुटेशन पर तुम्‍हें भेज रहा हूँ , तब तक कोई और रास्‍ता निकालेंगे।''

 सुमित -सर मुझे समझ नहीं आ रहा है मैं कैसे आपको धन्‍यवाद दूँ।

  अमित -अरे। कोई धन्‍यवाद की जरूरत नहीं है। तुम जल्‍दी से वहॉं जाकर जोईन करो और अपने मम्‍मी पापा को मेरी नमस्‍ते कहना।

  सुमित - सर मैं आपकी बात करा दूँ, पापा से

  अमित –लखनऊ पहुँचाकर मेरे जिगरी के फोन से ही मुझे कॉल करना, ठीक है। ऑल द वेरी बेस्‍ट एंड गुड लक, गोड ब्‍लेस यू माई चाईल्‍ड।

ये कहते हुए अमित अपना हाथ आगे बढ़ाता है सुमित की तरफ, लेकिन सुमित उठकर अमित के चरण स्‍पर्श करता है और कहता है “इस बार आप जल्‍दी ही लखनऊ की आने का प्रोग्राम बनाएं सर, आपको पापा से मिलवाऊँगा।

 सुमित खुशी खुशी कमरे के दरवाजे की ओर बढ़ता है फिर रूक जाता है और मुड़कर अमित से कहता है ''सर एक बात पूछनी थी यदि आप बुरा न मानें तो ''

अमित- ''अरे क्‍यों नहीं ? बेझिझक पूछो ?

     क्रमश:............2

सुमित - सर, ये ठीक है कि आप मेरे पापा के दोस्‍त हैं लेकिन आप उनसे पिछले 20-25 बरसों में न तो मिले न कोई बात की, न ही पापा ने फोन करके आपको ''रिकवेस्‍ट'' करी फिर भी आपने ये मुश्किल काम इतना जल्‍दी और इतनी आसानी से कर दिया। आजकल तो सर जो बहुत क्‍लोज होते हैं, रोज मिलते हैं वो इतनी आसानी कोई काम करके नहीं देते। यहां तक कि जो काम होने वाले होते हैं वो भी नहीं करके देते। और आपने ...............

अमित उसको बीच में रोकते हुए कहता है ''सुमित ये मेरी और राजेन्‍द्र की दोस्‍ती है, किसी मोबाईल का सिम कार्ड नहीं है जिसे बार-बार रिचार्ज कराना पड़े। कुछ रिश्‍ते ऐसे होते हैं कि आप बरसों मिलो या न मिलो , बरसों बात करो या ना करो, उन रिश्‍तों की वेलिडिटी (वैद्यता) कभी खत्म नहीं होती। "


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