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Sunil Joshi

Children Stories Inspirational


4  

Sunil Joshi

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विरोध

विरोध

10 mins 371 10 mins 371

 शाम हो चुकी थी सड़कों पर घरों में सभी जगह लाइटें जल चुकी थी और रेलवे कॉलोनी के नुक्कड़ पर राजेंद्र भारत भूषण, उमेश व महेश आपस में बतिया रहे थे। मजाक कर रहे थे और साथ ही साथ अपने सबसे प्यारे मित्र सुधीर का इंतजार भी कर रहे थे। काफी समय बीत चुका था , शाम के करीब 8:30 बजने को आए थे लेकिन सुधीर नहीं आया तब राजेंद्र बोला “यार इतनी देर तो नहीं करता वह कभी कहां रह गया आज” 

भारत भूषण- "मुझे लगता है आज हो जलेबी खिलाने से डर गया"

 राजेंद्र - "क्या मतलब!"

 भारत भूषण - "अरे यार आज शाम 4:00 बजे अपनी स्कूल की बैडमिंटन टीम का चयन होना था । सुधीर तो वैसे भी बहुत अच्छा खेलता है तो उसका चयन तो हो ही गया होगा तो आज कहीं हम सबको जलेबी नहीं खिलानी पड़ जाए इसलिए मुंह छुपा रहा होगा"

 यह सुनते ही सभी ठहाका लाकर हंस पड़े तभी उमेश ने कहा "ऐसा करते हैं उसके घर चलते हैं वही पकड़ते हैं उसे"

सभी ने एक साथ हां में हां मिलाई और सुधीर के घर चल दिए


सुधीर के घर पहुंचने पर उसकी माताजी ने बताया कि वह अपने कमरे में उदास बैठा है क्योंकि उसका बैडमिंटन टीम में चयन नहीं हुआ यह सुनकर सभी दोस्तों को आश्चर्य हुआ कि यह कैसे हो सकता है वह चारों सीधे सुधीर के कमरे की ओर चल दिए

सुधीर अपने बेड पर गुमसुम सा बैठा शून्य में निहार रहा था सभी दोस्तों को देखकर एक झूठी मुस्कान अपने चहरे पर लाने की नाकाम कोशिश करते हुए उठने लगा तो राजेंद्र ने उसे पकड़ कर बैठे रहने को कहा और विचारों की उसे घेर कर उसके पास ही बैठ गए


 राजेंद्र - "क्या हुआ यार बता तो सही?"

 सुधीर - "कुछ नहीं यार"

 सभी मित्र एक साथ बोले "बता तो सही यार हुआ क्या?"

 सुधीर मायूस सा बोला "यार मुझे टीम में सेलेक्ट नहीं किया!"

 उमेश - "लेकिन क्यों क्या ट्रायल में किसी से हार गया?"

 सुधीर  "नहीं यार 5 गेम खिलाए थे 4 में जीता और एक केवल 2 पॉइंट से हार गया!"

 राजेंद्र जरा गुस्से में बोला “ फिर तुझे टीम में लेने से कैसे मना कर सकते हैं , तूने स्पोर्ट्स टीचर से नहीं पूछा”

सुधीर - "पूछा था यार वह बोले तुम लोग अभी दसवीं कक्षा में हो अभी तुम्हें और भी मौके मिलेंगे इसलिए इस बार इन सीनियर्स को जाने दो!"

 उमेश- "अरे यह क्या बात हुई सामने वाले कक्षा देख कर खेलेंगे गेम!"

 महेश -" यह तो सरासर अन्याय है, स्पोर्ट्स में सीनियर जूनियर देखा जाता है या कि कौन अच्छा खेलता है वह देखा जाता है!"

 राजेंद्र ने सुधीर के कंधे पर हाथ रखकर कहा “तू चिंता मत कर मैं सब समझता हूं, यह सारी सीनियर्स की राजनीति है और कुछ नहीं , लेकिन हमारे दोस्त के साथ यह राजनीति नहीं होने दूंगा । हम सब कल ही स्पोर्ट्स टीचर से मिलते हैं और जरूरत पड़ी तो प्रिंसिपल साहब से भी मिलेंगे”

 सुधीर - "अरे छोड़ ना यार नहीं लिया तो नहीं लिया क्या फर्क पड़ता है? कौनसा ओलंपिक में खेलने जाना था और वैसे भी इस साल अपने बोर्ड के एग्जाम हैं!"

 सभी एक साथ बोले “फर्क तो पड़ता है “ और उमेश बोला “भाई फर्क नहीं पड़ता है तो उदास क्यों बैठा है?”

 राजेंद्र - "देख यार वह सारी बात तो ठीक है लेकिन गलत को गलत कहने से हिचकिचाएंगे तो यह आगे भी चलता रहेगा!"

 सुधीर - "देख यार टीचर के खिलाफ जाएंगे और शिकायत करेंगे तो बाकी सारे टीचर भी हम सब से नाराज हो जाएंगे कोई भी किसी भी तरह की मदद नहीं करेगा"

 महेश गुस्से से “ना करें , लेकिन जो गलत है उसके खिलाफ आवाज उठानी पड़ेगी”

 उमेश - बात तो सही कह रहा है गलत को गलत कहने का साहस तो होना ही चाहिए। आज चाहे यह छोटी बात ही क्यों ना हो लेकिन अगर हम आज इस गलत बात को स्वीकार कर लेंगे तो धीरे धीरे कई बड़ी गलत बातों का भी विरोध नहीं कर पाएंगे , जीवन में ना जाने कैसी कैसी गलत बातें हमारे सामने आएंगी तो क्या हम चुपचाप उन्हें सहते रहेंगे? क्या चुप रहकर हम भी उस गलत बात का समर्थन नहीं करने लगेंगे!


 राजेंद्र - बिल्कुल सही हम सब कल ही चलकर स्पोर्ट्स टीचर से मिलते हैं और वह नहीं माने तो प्रिंसिपल सर से भी। 

 सभी दोस्तों ने इस बात पर अपनी सहमति जताई और सुधीर से विदा ली


अगली सुबह पांचों दोस्त सीधे स्पोर्ट्स टीचर के कमरे में गए, वहां पर पहले से ही दो सीनियर छात्र बैठे थे। टीचर - "कहो कैसे आए हो"

" राजेंद्र सर आप से अकेले में बात करनी है"

 टीचर दोनों सीनियर छात्र की तरफ देखते हुए बोले “अरे यह कोई पराए थोड़े ही है, कहो क्या कहना चाहते हो ?”

उमेश- "सर वह----"

 टीचर - "हां बोलो बोलो घबराओ मत"

 भारत भूषण - "सर जब सुधीर इतना अच्छा खेलता है तो उसे बैडमिंटन टीम में क्यों नहीं लिया गया?

 टीचर ज"रा गुस्से में “अरे तुम्हें ज्यादा पता है कि कौन अच्छा खेलता है, अब टीम का चयन हो चुका है जाओ अपनी क्लास में जाओ और पढ़ाई करो”

 राजेंद्र -"सर यह सरासर गलत है और यदि आप हमारी बात नहीं मानेंगे तो मजबूरन प्रिंसिपल सर के पास जाना पड़ेगा"

 यह सुनते ही टीचर और दोनों सीनियर छात्र गुस्से में एक साथ बोले “क्या तुम हमें धमकी दे रहे हो?”

 महेश - नहीं सर धमकी नहीं दे रहे हैं, लेकिन इन सीनियर की राजनीति नहीं चलने देंगे

दोनों सीनियर छात्र गुस्से में बोले कि “हम राजनीति कर रहे हैं, जाओ जाओ जो करना है करो हम भी देख लेंगे”

 टीचर - एक बार समझा दिया कि अब टीम फाइनल हो चुकी है , अगली बार देखेंगे अभी तो तुम्हें 2 साल और स्कूल में ही निकालने हैं

 राजेंद्र- ठीक है सर हम प्रिंसिपल सर के पास जा रहे हैं

 यह कहते हुए सभी दोस्त प्रिंसिपल के कमरे की तरफ चल दिए

 प्रिंसिपल सेक्रेटरी से प्रिंसिपल सर से मिलने की इजाजत लेकर उनके कमरे में पहुंच गए

 सभी छात्रों ने प्रिंसिपल सर को गुड मॉर्निंग कहकर अभिवादन किया, प्रिंसिपल सर ने भी गुड मॉर्निंग कहकर उनका जवाब दिया और पूछा “आओ बच्चों आज मेरे पास आने की क्या आवश्यकता पड़ गई ! तुम लोग कुछ परेशान से लग रहे हो,बताओ मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूं?”

 यह सुनते ही राजेंद्र ने प्रिंसिपल सर को पूरी बात बताई और निवेदन किया कि उसे लेने के लिए निर्देश दें

 सारी बात सुनकर प्रिंसिपल सर बोले वैसे तो बच्चों मेरा यह मानना है कि स्पोर्ट्स टीचर ने जो भी फैसला लिया वह बहुत सोच समझकर ही लिया होगा, लेकिन फिर भी तुम सबको लगता है कि कुछ गलत हुआ है तो मैं उनसे बात कर लूंगा। हो सकता है उनसे कोई गलत निर्णय हो गया हो।“

 उमेश - सर आपको आज ही बात कर के फैसला लेना होगा क्योंकि टीम तो लगभग फाइनल हो चुकी है

 प्रिंसिपल - ठीक है मैं आज ही बात करके इस बात का फैसला करता हूं,अभी तो सभी अपनी क्लास में जाओ

 यह सुनकर सभी मित्र आश्वस्त होकर क्लास की ओर चल दिए

 कुछ ही देर में प्रिंसिपल ने स्पोर्ट्स टीचर को बुलवा लिया और इस बारे में उनसे बात की

 जब स्पोर्ट्स टीचर अपनी बात बता चुके तो प्रिंसिपल सर बोले “इसका मतलब बच्चों का कहना सही है, अरे यह स्कूल की टीम है, इसमें जो अच्छा खेलेगा उसे ही लिया जाएगा या सीनियर - जूनियर देखा जाएगा! यह कोई प्रमोशन थोड़े ही है कि जो सीनियर हो उसे पहले मिलेगा,यह तो खेल है , इसमें जो अच्छा खेलेगा वही टीम में रहेगा”

 स्पोर्ट्स टीचर - लेकिन सर मैंने जो टीम बनाई है उसमें सभी अच्छा खेलते हैं , उनमें और सुधीर में कोई 19-20 का ही फर्क है और उन्हें अनुभव भी ज्यादा है

प्रिंसिपल - लेकिन जो भी अच्छा खेलेगा वहीं टीम में रहेगा और आप किसी को मौका ही नहीं देंगे तो उसे अनुभव कैसे होगा!

 स्पोर्ट्स टीचर - लेकिन सर अब अगर हम सुधीर को लेते हैं तो यह तो सरासर मेरी इंसल्ट होगी, लोग क्या कहेंगे कि मैं इन बच्चों से हार गया। 

 प्रिंसिपल- देखिए हम किसी गलत निर्णय को केवल इसलिए नहीं बदले कि ऐसा करने से हमारी बेइज्जती हो जाएगी, हम छोटे हो जाएंगे तो एक और गलती करेंगे हम। यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हम अपने छात्रों को सिखाए कि यदि हमसे कोई गलती होती है तो हमें उसे स्वीकार करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए, हम में इतना साहस होना चाहिए कि हम कह सके कि हां हम से यह गलती हुई है। अगर हम अपने छात्रों के सामने गलत मिसाल पेश करेंगे तो उनके अवचेतन मन में यह बात घर कर जाएगी कि इस समाज में गलत का विरोध करने से कोई फायदा नहीं है तो वो जीवन में होने वाली हर छोटी बड़ी गलत बात को स्वीकार करने लगेंगे और इस तरह वे गलत बातों का हिस्सा बन जाएंगे और मेरे विचार में अगर ऐसा होता है तो यह आपकी, मेरी और हम सब की सबसे बड़ी हार होगी। यहां हमें बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देना है बल्कि मौका पड़ने पर ऐसा उदाहरण पेश करना होगा जिससे कि बच्चे सही और गलत में निर्णय कर सकें । 

 स्पोर्ट्स टीचर बीच में कुछ कहना चाहते थे लेकिन प्रिंसिपल सर ने कहा कि “फिर भी आपको लगता है कि ऐसा करने से आपकी प्रतिष्ठा पर आंच आएगी तो इसके लिए भी मेरे पास एक सुंदर उपाय है, उससे न तो आपकी छवि धूमिल होगी और जाने अनजाने हमसे कोई गलत निर्णय हुआ है तो उसे सुधारने का मौका मिलेगा”

 स्पोर्ट्स टीचर के चेहरे पर थोड़ी सी रौनक आई और उन्होंने पूछा वह कैसे सर!

 प्रिंसिपल - ऐसा करते हैं आज शाम को आपने जो टीम सेलेक्ट की है उसमें जो सबसे अच्छा खेलता है उससे और सुधीर के बीच 3 गेम खिलाते हैं, उसमें अगर सुधीर विजय ही होता है तो फिर आपको टीम के किसी एक सदस्य के बदले सुधीर को लेना होगा और यदि सुधीर हार जाता है तो जो चयन हो चुका है उसमें कोई फेरबदल नहीं होगा बोलो मंजूर है। 

 स्पोर्ट्स टीचर ने कुछ सोचते हुए कहा “ठीक है सर जैसा आप उचित समझें”

 प्रिंसिपल - और हां उस मैच में केवल आप मैं आपकी टीम के सदस्य, सुधीर और उसके मित्र होंगे और कोई नहीं

 स्पोर्ट्स टीचर “ठीक है सर” कहते हुए वहां से चले गए


 सुधीर और उसके दोस्तों को जब इस बात का पता चला तो वे खुशी से उछलने लगे

 राजेंद्र - "मैंने कहा था ना गलत को हम शांति से स्वीकार कर लेंगे तो गलत बातें होती रहेंगी

 सभी ने उसकी हां में हां मिलाई और सुधीर को जोश दिलाने लगे कि उसे इस मौके का पूरा फायदा उठाना है और अपने आप को सिद्ध करना है। सुधीर ने सब को भरोसा दिलाया और कहा “दोस्तों मैं तुम्हारी बात का आदर रखूंगा और अपनी जी जान लगा दूंगा”


 समय पर सभी लोग बैडमिंटन कोर्ट में पहुंच गए, दोनों अच्छे खिलाड़ी थे लेकिन सुधीर का जिस खिलाड़ी के साथ मैच था वह ज्यादा अनुभवी था। आज अनुभव व जोश के बीच एक जंग थी । दोनों ने अपना सर्वश्रेष्ठ खेल खेला लेकिन सुधीर के साथ न केवल उसके दोस्तों का जोश था बल्कि इस बात का भी संतोष था कि समाज में गलत को गलत कहने का साहस किया जाए तो उसे सुधारा जा सकता है और इसी बात से उसमें अपने प्रतिद्वंद्वी से ज्यादा जोश भर गया था और अंततः उस कड़े मुकाबले को सुधीर ने 2-1 से जीत लिया। अनुभव ने जोश के आगे घुटने टेक दिए

 गेम जीतते ही सुधीर के दोस्तों ने उसे कंधे पर उठा लिया और नाचने लगे, फिर सुधीर ने नीचे उतरकर प्रिंसिपल सर और स्पोर्ट्स टीचर के पास पहुंच गए । स्पोर्ट्स टीचर ने उसे गले से लगा लिया और कहा “बच्चों तुम सब का बहुत बहुत धंयवाद जो तुमने मेरी गलती को सुधार दिया। मैं भूल गया था कि मुझे स्कूल की साख का ध्यान रखते हुए टीम का चयन करना है ना कि कुछ और”

 सुधीर और उसके दोस्तों ने स्पोर्ट्स टीचर और प्रिंसिपल सर को धंयवाद दिया, स्पोर्ट्स टीचर से माफी मांगी कि उन्होंने उनकी शिकायत प्रिंसिपल सर से की और कहा सर लेकिन हमारे पास इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं था। 

 स्पोर्ट्स टीचर - "बच्चों मुझे तुम पर गर्व है कि तुमने गलत बात का विरोध करने का साहस दिखाया। इस समाज और देश को ऐसे ही बच्चों की आवश्यकता है।" 

 सुधीर और उसके मित्र आज बहुत खुश थे और आज सबने जमकर जलेबियां खाई और विदा होते हुए सब ने निर्णय लिया कि कल प्रिंसिपल सर के कमरे में जाकर उन्हें धन्यवाद देंगे


 अगली सुबह पांचों मित्र प्रिंसिपल साहब के कमरे में गए और राजेंद्र ने कहा “सर हम सब आपको धन्यवाद देने आए हैं कि आपने सुधीर को अपने आप को सिद्ध करने का मौका दिया”

 प्रिंसिपल - अरे बच्चों धन्यवाद मुझे देना चाहिए कि तुम लोगों ने साहस करके हम से होने वाली गलती को ठीक करवाया, नहीं तो हम एक अच्छे खिलाड़ी को खो देते और हमारी टीम कमजोर हो जाती। 

फिर मुस्कुराते हुए बोले “मुझे तुम सब पर गर्व है और आशा करता हूं कि जिंदगी में कभी भी गलत बात का विरोध करने से नहीं चूकोगे चाहे तुम्हारे विरोध करने से कोई फायदा हो या ना हो कम-से-कम ऐसा करके तुम अपने आपसे तो नजर मिला पाओगे”, यह कहते हुए उन्होंने अपने कमरे की दीवार पर नोबेल पुरस्कार विजेता Ellie Wiesell की पंक्तियों की ओर इशारा किया, जहां लिखा था “ There may be times when we are powerless to prevent injustice but there must never be a time when we fail to protest”. 



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