रहस्यमयी खूबसूरती ..... एक सच
रहस्यमयी खूबसूरती ..... एक सच
रहस्यमयी खूबसूरती
रहस्यमयी खूबसूरत वह आकर्षण और बदन से लाजवाब हसीना थी उसकी अदाएं मोहन मादक नशीली थी बस उसे हर रात एक हसीन साथी बिस्तर के साथ चाहिए था जिससे उसकी उम्र और खूबसूरती का रहस्यमयी बना रहे। प्राचीन काल से ही तंत्र साधना में अपने जीवन को रहस्यमई नई और तंत्र विद्या से अपने को सदा जवान रहने की प्रक्रियाएं होती आई है यह कल्पना के साथ सच भी है आओ रेस में खूबसूरत के जाल में फंसने से पहले हम जीवन की राह पर चलते हैं
रहस्यमयी खूबसूरत में नीरजा एक अनाथ लड़की होती है। उसको बचपन का ना पता कि उसकी माता-पिता कौन है बस जब उसने होश संभाला तो उसको यह बताया गया कि आप एक चर्च की सीढ़िया पर रोती बिलखती मिली थी। बचपन और जवानी की दहलीज पर नीरजा अपनी रहस्यमई खूबसूरती के साथ जवान और सुडौल शरीर की खूबसूरत नीरजा को बचपन से ही शोषण किया गया क्योंकि उसकी सुंदरता ही उसका गहना था। आधुनिक युग में नीरजा को हम बिस्तर होने में किसी के साथ कोई एतराज न था। परन्तु समय के साथ नीरजा ने अपने जीवन की बचपन से रहस्य में किताबों में दिलचस्पी लेकर रहस्य में सिद्धियां को अपने जीवन में उतार लिया था जिसका पता केवल नीरज अपने मन में रखतीं थी। नीरजा के जीवन में पुरुष और पौरुष की परिभाषा केवल हम बिस्तर तक ही सीमित थी। रहस्यमयी खूबसूरती के साथ नीरजा के गडराय बदन को देखकर अक्सर नौजवान धोखा खा जाते थे। नीरजा उम्र के यौवन अवस्था के पड़ाव पर समझ चुकी थी। केवल आदमी को औरत के शरीर से ही मतलब होता है ना कि उसके एहसास और प्रेम की जरूरत होती है। जिस बचपन को उसने गुजारा था। वह बचपन भी रहस्यमय स्थितियों से गुजरा था। अब नीरजा मन ही मन रहस्यमयी खूबसूरती के साथ साथ तांत्रिक के साथ मिल उस को अपनी बाहों में ले मादक अदाओं से दीवाना बना लेती है। अब तांत्रिक नीरजा के यौवन के रसपान को आतुर होने लगा। तब नीरजा ने अपने मनोभावों में रहस्यमयी खूबसूरती के साथ मुसकरान बिखेरी और तांत्रिक से एक सौदा करने का वादा लेती हैं। उधर तांत्रिक को तो अब सोते जागते केवल नीरजा की भोग विलास की तृप्ति मे स्वप्निल हो चुका था। अब उसे यह भी होश न धा कि अगर उसने अपनी शारीरिक वासना से नारी की काम अग्नि से शारीरिक संबंध बनाए तब उसकी सभी शक्तियां उसके वीर्यपात के साथ नीरी की योनि मार्ग से उस नारी में समाहित हो जाएंगी और वह नारी तांत्रिक की शक्ति स्वामित्व बन जाएंगी। और जो उसके वीर्यपात से नारी गर्भ से उत्पन्न होगा वह एक राक्षस प्रवृत्ति का मानव दुष्ट जन्म लेगा। नीरजा अपने स्वार्थ में सभी पुरुषों को पौरुष वेग से नामर्द करके उनको पुरुष से नामर्द पुरुष की कुंठित कर आत्महत्या करने को मजबूर कर देती थी। क्योंकि नीरज एक अनाथ और स्वार्थी नारी बन चुकी थी। रहस्यमयी खूबसूरती के साथ सभी पुरुष जाति से बदले की भावना के साथ अपने अहम और शारीरिक सुंदरता से अपने घमंड में चूर थी। हर एक पसंदीदा पुरुष के साथ रात रंगीन करना आदत बन चुकी थी। उसने बचपन से जवानी की उम्र तक आते-आते केवल पुरुष की सोच केवल नारी का शोषण ही राह हैं। रहस्यमयी खूबसूरती के साथ साथ अब नीरजा की सोच तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त करके पौरुष समाज पर हकुमत की सोच रखती हैं। और नीरजा तांत्रिक के पास घनघोर अंधेरा श्मशान में चिंताओं के बीच तांत्रिक के पास जा पहुंचतीं है। तांत्रिक मदिरा पान से तृप्त नीरजा को अधोवस्त्रों में देख वह भूल जाता हैं कि वह सिद्धि करने बैठा है। और नीरजा का इस तरह अचानक श्मशान में घोर अंधेरी रात और चिंताओं के साथ नीरजा का बदन तांत्रिक कै पागल कर रहा था। अब तांत्रिक से अपने शारीरिक वासना का उद्वेग बढ़ता ही जा रहा था। और वह नीरजा की ओर अपने पौरुष बल के साथ नीरजा को बाहों में ले एक एक कर उसके शरीर को वस्त्रों से उन्मुक्त कर वक्ष का रसपान करने लगा परन्तु नीरजा तो शारीरिक हमबिस्तर से परिपूर्ण थी उसे तांत्रिक के आलिंगन और वक्षों का मसलना और रसपान आंनद की अनूभुति न देकर रातोंरात वह तांत्रिक सिद्धियां पाने को आतुर थी। और नीरजा ने अपनी जांघों को फैला दिया और तांत्रिक के जिस्म का सारा गर्म लावा नीरजा की गर्भाशय में तृप्ति प्रदान करता है। सुबह के पहले पहर में जब तांत्रिक को होश आया तब तख उसकी सभी शक्तियां नीरजा के जिस्म में जन्म ले चुकी थी। और वह अब नारी शक्ति से नीरजा पिशचिन बन चुकी थी। और तांत्रिक सुबह सूरज की पहली किरण के साथ निढाल शरीर के साथ गिर पड़ा। और नीरजा की सोच और खुशी का हंसी का अंदाज बदल गया था। क्योंकि उसने तांत्रिक के साथ साथ पुरुष की पौरूष शक्ति को निष्फल कर दिया था। और अब वह तांत्रिक की लाश के साथ नग्नता के साथ बैठ रात्रि का इंतजार कर रही थी। और जब रात्रि का दूसरा पहर शुरू हुआ। नीरजा एहसास और मानवता एक मर्म समझ आ रहा था। कि एक नारी है और पिशाचिनी की सोच भी किसी ईश्वर की अनुभूति के साथ ही जन्म लेती है क्यों। कि रहस्य में खूबसूरती के साथ-साथ हम जन्मो जन्म मंत्र तक के रहस्यों को समझ नहीं पाते हैं क्योंकि हर जीवन हर दिन एक नई पहेली होता है ऐसे ही नीरजा की रहस्यमयी खूबसूरती को तांत्रिक शक्तियों के साथ-साथ उसके मन के किसी कोने में अंतर आत्मा के साथ-साथ एक नई रोशनी के साथ नारी का जन्म हो चुका था अब वह इस जीवन को छोड़कर नए जीवन में अपनी नई रहस्य में खूबसूरती के साथ जन्म लेने के लिए अनूभूति मन और आत्मा के साथ शरीर में अंगड़ाई ले रही थी। रहस्यमयी खूबसूरती में पिश्चिनी मन और जिस्म से नये पौरुष शक्ति को एहसास करना चाहत मन में हवस औल वासना से जागृत हो चुकी थी। नीरजा आपना नाम अब वह नीलिमा ये नाम से नया रहस्यमयी खूबसूरती चेहरा लेकर शहर मुम्बई की राह पकड़ लेती हैं। उस तांत्रिक की सारी जायदाद बेच उसके नाम को मिटा। वह अब आधुनिक युग में नवयुवकों के खून की प्यासी रहस्यमयी खूबसूरती की मलिका नीलिमा बन चुकी थी और धन और संपत्ति के साथ वह मुम्बई शहर में समुद्र और श्मशान के साथ-साथ एंकात विला लेती है। समय बीतता है और वह रात को एक बदसूरत अधेड़ में बदल जाती थी क्योंकि कुदरत के साथ हम खिलवाड़ करते हैं। परन्तु कुदरत २४ घंटे में कुछ समय असली चेहरा उजागर करती है। और कुदरत के रंगमंच पर किरदार इंसान निभाते हैं परन्तु हर ग़लत कर्म और सोच हमारी आत्मा होती है और वह समय पर फल कीमत चुकानी पड़ती है। परन्तु नीरजा से नीलिमा के सफर से पौरुष बल के शोषण से नीरजा से बनी पिश्चानी नीलिमा अब और भी रहस्यमयी खूबसूरती और रुप बदलने की महासिध्दि कर चुकी थी। और अब वह मुम्बई के बैंक में एक रकम जमा के साथ-साथ निवेशक बन कर जाती है और वहां के बैंक मैनेजर को अपने मोह और रहस्यमयी खूबसूरती में बांध लेती है। बैंक मैनेजर जांच करने नीलिमा के बंगले पर पहुंच जाता है।
नीलिमा पारदर्शी वस्त्र में बैंक मैनेजर नवयुवक को अपनी रहस्यमयीें खूबसूरती के जाल में फंसा लेती है और बैंक मैनेजर भी मुम्बई शहर में नौकरी कल अकेले रहता था और उसकी खूबसूरत पत्नी और बेटी गांव में रहतीं थी। बस इस बात का फायदा नीलिमा उठाती हैं और वह बैंक मैनेजर को रात को खाने पर बुला लेती है। बैंक मैनेजर भी मस्ती के साथ अपनी अय्याशी में वह नीलिमा की असलियत की पहचान भी भूल जातीं हैं। नीलिमा जीवन में केशल हवस और नवयुवकों के जिस्म को चुसने वाली नर पिशाचनी बन चुकी थी। बस केवल नीलिमा तांत्रिक की गलत शोषण की भावनाओं से त्रस्त मानसिक उदवेगना से ग्रस्त थी। और अब उसके अंदर जो गलत सिद्ध आत्माएं बस चुकी थी। और रात जब वह अपनी न पिशाचनी रूप में आती थी। तब वह तांत्रिक की अंतर आत्मा से वासना का तांडव करतीं। और फिर वह अतृप्ति के साथ वही नीरजा अधेड़ औरत का नाम बन जातीं हैं। रहस्यमयी खूबसूरती के साथ आधुनिक समय के साथ सच बहुत कड़वा होता है क्योंकि हम सभी अपने मतलब और स्वार्थ के लिए अंधे हो जाते है।
रहस्यमयी खूबसूरती के साथ नीरजा नीलिमा की राह तांत्रिक के शोषण और हालात के साथ वह हर पुरुष के पौरुष बल को शारीरिक संबंध के साथ हवस वासना का नाम समझने लग चुकी होती हैं। अब रहस्यमयी खूबसूरती नीलिमा मुम्बई के ऐसे इलाके में रहती हैं जहां समुद्र और श्मशान घाट के साथ विला लेती है। और बैंक मैनेजर भी अपने परिवार को पत्नी बच्चों को धोखा दे रहा था। हां वही पर नारी लागे स्वप्न परी एक सच हमबिस्तर होने के बाद जब आंखें खुलती हैं। तब बहुत देर हो चुकी होती हैं।
रात के गहरे अंधेरे में नीलिमा के दरवाजे की डोर वेल बजती हैं। और नीलिमा अपने तंत्र कक्ष से ही देख लेती हैं कि बैंक मैनेजर हाथ में वयहसकी और हाथों फूलों के महकते गजरे और गुलदस्ते ले खड़ा था। बस यह देख नीलिमा समझ जातीं हैं आज खून पीने को मिलेगा और वह अपने रुप को नवयुवती किशोरी बन पारदर्शी वस्त्र पहन दरवाजा खोल मोमबत्तियां जलाकर मीठे-मीठे मधुर संगीत के साथ अवाज में कहतीं हैं आओ राजा हम भी बे सब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। बैंक मैनेजर की तो बांहे खुल जाती हैं। और नीलिमा को तो तांत्रिक क्रियाओं के साथ नग्नता और मांस मदिरा सेवन जरुरत थी। और आज तो अभी अमावस्या दूर थी ।
नीलिमा को लगता है कि आज तो केवल जशन मनाना पड़ेगा। और बैंक मैनेजर को मंदिरा सेवन नीलिमा अपने हाथों से पिलाती हैं। बस नर पिशाचनी के तंत्र में एक मानव का वीर्य पात पिशाचनी के न हो। और नीरजा बनी नीलिमा के जिस्म के अंदर तांत्रिक कैद था। और अगर कोई नीलिमा को यौन सुख के साथ अपना वीर्यपात अंदर कर देगा वह तांत्रिक पुनः जीवित हो उठेगा और रहस्यमयी खूबसूरती को अपनी असली उम्र के साथ सभी शक्तियों को पुनः जुटाने को फिर पर पुरुष के साथ श्मशान प्रकिया से सिद्धि करनी होगी।
बैंक मैनेजर की राह और नीलिमा भी मदमस्त पौरुष बल से तृऊहो रही थी नीलिमा भी भूल चुकी थी कि वह तांत्रिक को अपने जिस्म में कैद कर चुकी हैं। और वह पर पुरुष के वीर्यपात से पंचतत्व में विलीन शक्ति पा लेगा। बस यही भूल कर बैंक मैनेजर और नीलिमा एठ न दो तीन बार में वीर्यपात नीलिमा यौनसुख में तृप्ति पा लेती है। और सुबह की सूर्य की पहली किरण नीलिमा के असल रुप को ला देती हैं। हम बिस्तर हुए बैंक मैनेजर की जब आंखें खुलती हैं तब वह अपने आगोश में अपने से दो गुनी उम्र की अधेड़ को देख वह डर जाता है। और जब नीलिमा सामने दर्पण में अपने चेहरे की झुर्रियां और असली रुप देख अपने पेट पर और अपनी योनि को हाथ लगा देख वह अपनी रात की मादकता और गलती का सच जान जाती है। वह अब समझ जातीं हैं बैंक मैनेजर समझ चुका था। वह डरकर भागने लगता है तब नीलिमा अपने रहस्यमयी खूबसूरती तिलिस्म को टुटता देख बैंक मैनेजर के सिर पर तांत्रिक तिरशूल से प्रहार कर अंत कर देती है। और अपने विला से पास श्मशान घाट में उसकी लाश को लेकर जातीं हैं।
श्मशान घाट का चण्डाल भी नारी सुख का भुखा था आधुनिक समय और हालात में सब ही बहती नदी में हाथ धोते हैं।
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नीरज कुमार अग्रवाल चंदौसी उत्तर प्रदेश

