शीर्षक - आप और हम (अपने भविष्य के स्वरूप को पत्र)
शीर्षक - आप और हम (अपने भविष्य के स्वरूप को पत्र)
आप और हम ही अपने भविष्य के स्वरुप को पत्र लिखकर अपनी सोच हम लिखते हैं। बस भविष्य की चिंता में हम सभी कल की सोच रखते हैं। न आज हम जीवन जीते हैं। बस आप और हम जिंदगी की सोच में लगे रहते हैं। तेरे मेरे सपने और हमसफर हम बने होते हैं। भविष्य संतान की राह को चुनते रहते हैं। न अपनी जिंदगी हम सब आप और हम आधुनिक समय में भी न आज में समझते हैं। सोच के शब्दों में आप और हम रात दिन मेहनत और लगन के साथ अपनी राह दूसरों की सोच को सहयोग करते हैं। सच हम सभी अपने अपने विचार और व्यवहार कहा अपने लिए सोचते हैं। आप और हम सदा दूसरों के लिए सहयोग करते रहते हैं।
सच तो आप और हम भूल कर एक-दूसरे की भावनाएं और हालात में भी समय न समय एक-दूसरे को दे पाते हैं। आजकल आप और हम अपने भविष्य को भूल घर परिवार के भविष्य को समाज के साथ साथ सोचते रहते हैं। भाग दौड़ और धन संपत्ति के लिए हम सही गलत राह पर भी चले जा रहे हैं।
समय और हम आधुनिक बस आप और हम कहां संग साथ एक दूसरे को चाहत और मोहब्बत की राह पर चलते हैं। भविष्य संतान सुख और समृद्धि की राह पर चलते चलते उम्र की सोच भी हम भूल जाते हैं।
यादों की तस्वीर और आप हम अपने मन भावके पल कहा बीता पाते हैं। हां सच अपने भविष्य के स्वरुप में हम सभी अपने मन को समझाते हैं। समय बदल जाता हैं। और सफेदी के साथ हम अपने बीते कल को इप और हम एक यादों की तस्वीर के साथ बस आज हम सोचते हैं।
आओ अपने भविष्य के स्वरुप को आज भी आप और हम सोचते हैं। कुछ फल साथ बीताते हैं।
*""""""******""""""******
नीरज कुमार अग्रवाल चंदौसी उत्तर प्रदेश

