पैन ...... निर्जीव
पैन ...... निर्जीव
शीर्षक - पैन ..... निर्जीव
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पैन एक निर्जीव वस्तुओं के साथ होती हैं। हम सभी निर्जीव वस्तुओं को कहां समझते हैं। बस हम प्रयोग कर और भूल जाते हैं। सच तो निर्जीव वस्तुओं का न अपना वजूद होता है बस जिस इंसान और दिमाग के साथ वो जुड़कर रहते हैं। सच और सही या ग़लत मार्गदर्शन बन सकता है। पैन भी लेखक पत्रकार और अधिकतर सभी का उपयोगी होता हैं। न्याय और लेखकों के साथ पत्रकार के पैन अहम भूमिका निभाते हैं। जीवन और जिंदगी में प्रेम चाहत इश्क और जिंदगी का सफर भी पैन लिखते हैं। सच और हकीकत के रंगमंच पर पैन एक निर्जीव वस्तुओं के साथ बनकर भी हर एक इंसान के साथ सहयोग करता है। और पैन अपने रंगों के साथ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सच और झूठ की राह भी पैन के निर्जीव वस्तुओं के साथ हम सभी उपयोग करते हैं।
प्रेम प्यार चाहत और मोहब्बत के साथ भी पैन का नाम और मान भी होता है आज भी वो यादों के साथ हम सभी जानते हैं कि पैन निर्जीव वस्तुओं के साथ तेरे मेरे सपने और हमसफर बनकर रहता हैं। कभी कभी तो हम पैन की जरूरत के साथ हम पैन एक-दूसरे से मांग भी लेते हैं। और हम पैन की जरूरत बस समय तक करते हैं। परन्तु हम स्वार्थ और मतलब पैन निर्जीव वस्तु के साथ भी रखते हैं। सच तो यही है इंसान का किरदार एक मतलब के साथ रहता है। बस हम पैन को निर्जीव वस्तु ही समझते हैं। बहुत महत्वपूर्ण पैन निर्जीव वस्तु के साथ रहता है। आओ पैन को भी हम संभाल कर रखते हैं। और सदा उपयोग कर अपनी जेब में रखते हैं। निर्जीव पैन की जरूरत होती है।
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नीरज कुमार अग्रवाल चंदौसी उत्तर प्रदेश
