Bhawna kukreti

Drama Inspirational


4.5  

Bhawna kukreti

Drama Inspirational


राष्ट्र निर्माता

राष्ट्र निर्माता

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"अनुज, तुमने अभी तक नाश्ता नहीं किया ?" अमिता ने अपने बेटे से पूछा। बेटा, अमिता के पर्स में रखे तिरंगे झंडों को देखे जा रहा था। आज 15 अगस्त था।अमिता को स्कूल जल्दी पहुंचना था। "बेटा ,फिनिश करो प्लीज़" अमिता ने इस बार जोर देकर कहा। "माँ, क्या फायदा इन झण्डों को ले जाने का जब बच्चे ही नहीं आएंगे" अनुज ने कहा। "ये डेकोरेटिव हैं, नाव फिनिश योर ब्रेकफास्ट" अमिता ने झुंझलाते हुए कहा।

"मां लीव देम ,देखो न ये मेड इन इंडिया भी नहीं हैं!"अनुज ने अमिता के पर्स से सारे तिरंगे झंडों को बाहर ने निकालते हुए कहा।"अनुज!!" अमिता की आवाज ऊंची हो गयी।"जस्ट पुट देम बैक", अमिता बहुत लेट हो चुकी थी। उसका सब्र का बांध टूट गया।उसने अनुज के पास आ कर जल्दी जल्दी चम्मच से अनुज के मुंह मे पोहा भरा।अनुज माँ को ऐसे देख कर चुपचाप खाता चला गया।

असल मे अमिता आज सुबह से बहुत तनाव में थी।अतिथियों को विद्यालय में सुबह 8:30 का समय कहा था और 7:00 घर पर ही हो चुके थे। स्कूल तक का रास्ता 1 घण्टे का था।

"मां, आज भी आप साड़ी पहन कर नहीं जा रहीं?"अनुज ने फिर कहा। अमिता अपनी कुर्ते और लेग्गिंग में कंफर्टेबल थी।

"है ईश्वर!! आज तुमको हो क्या गया है अनुज? "

"नथिंग माँ, बस सोच रहा था कि कम से कम आज के दिन तो आप साड़ी में जाएं !"

"मतलब क्या है तुम्हारा?"

"माँ मैंने पढ़ा था की शिक्षक देश निर्माता होते है।"

"हाँ, तो?"

 "तो आपको तो आज पूरी तरह तन मन से भारतीय दिखना भी तो चाहिए न, लोग फॉलो करते है न, टीचर को! टीचर जो आदर्श होता है संमाज का और माँ सब छोड़ भी दो तो महिला शिक्षिका का ड्रेस कोड साड़ी है न?! " 

अनुज, उन्ही आदर्श और नियम की बाते दुहरा रहा था जो उसी ने उसे जोइनिंग के दिन गर्व से बताई थीं। तब कितना कर्तव्यबोध और आदर्श भरा हुआ था उसमें। लेकिन विपरीत और करू अनुभवों ने उसे भी अब काम चलाऊ कार्य करने वाली राह पर मोड़ दिया था।

किशोरावस्था में जाते बेटे के इस बोल के आगे अमिता एक दम से बौनी हो गयी। अभी कुछ देर पहले तक अमिता के लिए 15 अगस्त महज एक औपचारिकता था लेकिन बेटे की बातों ने उसको टोक दिया।

9 बजे अमिता साड़ी में अपने स्कूल में ध्वजारोहण कराने जा रही थी। फूलों और मालाओं से तिरंगे रंग में उसने स्कूल को ही नहीं सजाया बल्कि हर आगंतुक को भारतीय होने के गर्व और स्वदेशी अपनाने की प्रेरणा दी। कुछ ही देर में पूरा स्कूल चंद लोगों के होने के बावजूद "जन गण मन" से तरंगित हो रहा था।

उसी समय घर पर अनुज टी वी के आगे पूरे देश के साथ राष्ट्र गान गा रहा था। राष्ट्र गान पूर्ण होते एक सा स्वर एक साथ घर और स्कूल में गूंजा " जय हिंद !"


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