राम नाम की महिमा
राम नाम की महिमा
एक नगर में राजा की रानी का नाम था कर्णावती। जैसा उसका नाम था वैसा ही उसका स्वभाव था। वह अपने सेवकों दास दासियों सब के साथ बड़ा मधुर व्यवहार करती, मीठे वचनों से और सम्मान सूचक संबोधन से उन्हें प्रसन्न करती।
राजमहल में सफाई करने वाली एक हरिजन महिला प्रतिदिन सफाई करने के लिए आती थी। रानी साहिबा उस के साथ अपनी छोटी बहन की भांति व्यवहार और वार्तालाप करती। महारानी की पुत्री राजकुमारी नव यौवना अत्यंत ही सुंदर थी। जिस पर एक बार सफाई करने वाली हरिजन के पति की नजर पड़ गई। वह बड़ा दुष्ट प्रवृत्ति का था। उसमें सभी प्रकार के कुलक्षण थे। उसने अपनी पत्नी (जो राज महल में जाती थी) से कहा मेरा विवाह उस राजकुमारी से करवा दो, अन्यथा मैं अन्नजल छोड़ कर के उसके प्यार में मर जाऊंगा। हरिजन पत्नी ने उसको बहुत डांट लगाई और समझाया राज परिवार को यदि तुम्हारी इस बात का पता चल गया तो वे तुम्हें फांसी पर चढ़ा देंगे। मृत्यु दंड देंगे। और मेरे इन बच्चों का क्या होगा ?... उस दुष्ट ने कहा राजा मारे या ना मारे लेकिन मैं उसके प्यार में मर जाऊंगा। वह बेचारी क्या कर सकती थी।
दूसरे दिन रानी कर्णावती की नजर उसके उदासीन चेहरे पर पड़ी। उसने दासी के साथ उस सफाई कर्मी को अपने महल में बुलवाया और कहा बहन उदास क्यों है ?.... क्या संकट है तेरे पर?.... उसने बिचारी ने रोते हुए रानीजी से कहा ~"रानी साहिबा जी मैं आपको नहीं बता सकती इतना घोर संकट है कि मैं आपके साथ जबान से बयां भी नहीं कर सकती।" ऐसा कहते हुए वह खूब रोने लगी।
रानी में उसको अभय दान देकर धैर्य बंधाते हुए कहा जो कुछ भी है तुम मुझे बता दो। वह रोती हुईं अपने दुष्ट पति की सारी करतूत बता दी। रानी ने हंसकर कहा तू सारा फिक्र छोड़ दे। तेरे पति को मेरे पास भेज दे। मैं अपनी राजकुमारी का विवाह उस हरिजन से कर दूंगी।
उसे ऐसी अनहोनी बात पर विश्वास तो नहीं हो रहा था, फिर भी उसमें अपने पति को रानी साहिबा की बात कह दी। (उसके पति का नाम कालू हरिजन था) वह बहुत ही आनंदित होकर के महल में गया। रानी साहब ने उससे कहा~ मैं अपनी पुत्री का विवाह तुम्हारे साथ कर दूंगी लेकिन इससे पहले तुम्हें हमारी एक शर्त मंजूर करनी पड़ेगी।
वह बोला इस काम के लिए मैं अपनी जान तक कुर्बान कर सकता हूं।
रानी ने कहा~ हमारे बाग में तुम्हारे लिए एक झोपड़ी बना दी जाएगी। तुम अपने घर नहीं जाओगे। जैसा भी राजमहल से रुखा सुखा भोजन मिले वही भोजन तुम्हें करना होगा। दिन और रात राम राम राम राम राम के नाम का जप करना पड़ेगा 6 महीने तक
उसने कहा महारानी जी मैं जीवन भर तक कर सकता हूं। रानी जी ने कहा नहीं नहीं तुम छ महीने तक ऐसा करोगे तो पवित्र हो जाओगे तब हम अपनी राजकन्या का विवाह तुम्हारे साथ कर देंगे। यह काम तुम कल से ही शुरू कर दो।
रानी साहिबा की तरफ से सारी व्यवस्था कर दी गई। कालू भी अपनी शर्त के मुताबिक बड़ी लगन से *राम राम राम राम राम नाम का जप करने लगा। उसको भोजन भी बहुत ही कम मात्रा में दिया जाता था। राम नाम के प्रभाव से उसका मन पवित्र होता गया। राम नाम के प्रभाव से उसके आसपास का वातावरण भी प्रभावित हो गया। लोग उसके दर्शन करने के लिए आने लगे। दर्शनार्थियों की भीड़ जुटने लगी। कुछ ही महीनों में उसका मन एकदम पवित्र हो गया। उसके अंदर का भंगीपना मर गया।
एक दिन रानी साहिबा अपनी राजकन्या को लेकर के उसके पास आई और बोली "कालू जी मैं अपने वचनों पर राजकुमारी का विवाह आपके साथ करने के लिए तैयार हूं'।
कालू ने हाथ जोड़कर रानी साहिबा को साष्टांग प्रणाम करते हुए कहा~ रानी साहिबा जी मुझे क्षमा कर दो, मैं बहुत नीच हूं जो इस प्रकार के दूषित विचार रखता हूं। माता जी आप मुझे क्षमा कर दें। यह राजकुमारी बाईसा जी भी मुझे अपनी मां के समान लगती है।
प्रिय सज्जनों यह मात्र कहानी नहीं है। मन में कभी भी दूषित विचार आते हों, मन मलीन होता हो, मन में किसी प्रकार का विक्षेप आता हो ,आप इस प्रयोग को करके देख लीजिए। आपका मन पवित्र हो जाएगा। घर में किसी सदस्य से किसी बात पर झगड़ा फसाद हो जाता हो।
तो "श्री राम जय राम जय जय राम" का कीर्तन करके देख लीजिए। सब विवाद समाप्त हो जाएंगे।
राम नाम कर अमित प्रभावा।
संत पुराण उपनिषद गाबा।।
राम सकल नामन ते अधिका।
होउ नाथ अघ खग गन बधिका।।
राम नाम मनी बसि उर जा के।
दुख लवलेश न होउ ताके।।
राम राम कही जे जमुहाई।
तिन्ह ही न पाप पुण्ज समूहाई।।
राम नाम की औषधि खरी नियत से खाय।
अंग रोग व्यापै नहीं महा रोग मिट जाय।।
जय श्रीराम
