पति का बटुआ

पति का बटुआ

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उमा का 5 वर्षीय बेटा गुब्बारों के लिए मचल रहा था उमा पति के पास आकर "बोली सोनू को गुब्बारे लेने हैं" पति ने कुछ कहा तो नहीं पर बड़े अनमने भाव से अपने पर्स निकाला और उमा को पांच का एक सिक्का निकाल कर दिया।

उमा को कोई भी छोटी बड़ी चीज लेनी होती तो उसे पैसे अपने पति से मांगने पड़ते हैं। वह रोज सुबह बताती कि आज उसे दिनभर क्या जरूरत पड़ सकती है तो उसका पति उसे जरूरत के अनुसार उसे पैसे दे देता हालांकि वह बड़ी मितव्ययी थी वह इन पैसों में भी कुछ पैसे बचा लेती जिसे वह सब से छुपा कर रखती।

कभी मायके जाना होता तो छोटे भाई -बहनों को विदा -विदाई के लिए संभाल कर रखती थी पतिदेव तो बस किराया भाड़े और मिठाई के पैसे देते।

हालांकि उमा को हर छोटी बड़ी चीज के लिए पति से पैसे मांगना थोड़ा अजीब लगता था पर करती भी क्या ?वह ज्यादा पढ़ी-लिखी भी नहीं थी, ना ही उसे कोई हुनर आता था और ना ही उसने कभी यह सोचा कि वह खुद पैसे कमाए।

दिवाली से पहले ही उमा की बुआ सास आई, सब बहुत खुश हुए उमा ने उनकी ऐसी सेवा की कि वह तो उमा की प्रशंसक बन गई पर उन्हें एक बात खटकती और वह था उमा का 1-2 रुपये के लिए भी पति के आगे हाथ फैलाना और पति का हर बार मुंह बनाकर पैसे देना।कभी-कभी तो ताने भी मिलते "जब देखो मुंह उठाकर आ जाती हो पैसे मांगने, पैसे पेड़ पर उगते हैं क्या ? खुद कमाओ तो पता लगे, फ्री का मिल रहा है तो उड़ा रही हो।

भतीजे की यह बात बुआ को बर्दाश्त ना हुई तो वह बोल पड़ी "फ्री का काहे ? उसका आधा हक है तेरी कमाई में और सारा दिन तो फिरनी जैसे नाचती रहती है, तुम्हारे घर को संभालती हैं, तुम्हारे बच्चे ,मां बाप रिश्तेदार और तुम उसे एक 2 के लिए सुनाते हो। अरे बहुत तो लक्ष्मी होती है।

बुआ जी ने उमा को समझाया कि उसे कोई हुनर सीखना चाहिए और छोटी मोटी आमदनी का जरिया आना चाहिए।

उमा बोली बुआ जी क्या करूं समझ नहीं आता यह कोई काम नहीं करने देंगे।

तब बुआ ने उसे चोरी छुपे सिलाई सिखाई। उमा ने पहले घर के फिर बाहर के कपड़े सीना शुरू किया जिससे उसे पैसे भी मिलने लगे और उसके पैसों की भी बचत होने लगी। अब उसे हर छोटी बड़ी जरूरत के लिए पति के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता।

उसने बुआ जी को बहुत-बहुत धन्यवाद कहां तक बुआ जी ने कहा सिर्फ अपने को साबित करने के लिए नहीं बल्कि अपने आत्मसम्मान और परिवार का स्तर सुधारने के लिए भी महिलाओं को अपने पति के साथ मिलकर आर्थिक सहयोग करना चाहिए।

उन्होंने उमा के पति को भी जब समझाया तो उन्हें भी समझ आ गया क्योंकि बार-बार पैसे मांगने से वह झल्ला जाता क्योंकि खाने वाले पांच और कमाने वाला एक।

पर अब ऐसा नहीं था अब पत्नी का बटुआ भी उसके साथ था।


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