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Dishika Tiwari

Abstract


4.5  

Dishika Tiwari

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पृथ्वी दिवस

पृथ्वी दिवस

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आज एक ऐसी चीज का दिवस है जो देकर भी है नहीं मांगती । हमारी धरती। हरी-भरी शीतल हवा देने वाली। जिसका हम कर्ज़ कभी नहीं चुका पाएंगे। अगर हम इस धरती पे कभी पेड़ ना लगाते तो आज क्या होता कोरोना वायरस के मरीज तो ऐसे ही मर जाते । अगर पेड़ न होते तो हमें ऑक्सीजन ना मिलता इसलिए कहा जाता है।

पेड़ लगाओ अच्छा जीवन बनाओ । आज वह पेड़ काम आ रहे हैं। सबसे ज्यादा धन्यवाद हमें अपनी धरती को बोलना चाहिए। जिसने एक बार भी हिम्मत नहीं हारी। नहीं तो हमने इस धरती पर कितना जुर्म किया है। हम पेड़ काटते रहे ,प्रदूषण फैलाते रहे, गंदगी फैलाते रहे क्या यह कम है।

आज हम जी रहे हैं इस धरती के सहारे। हम छोटी सी चोट के लिए रोने लगते हैं हल्का सा दुख क्या आ जाता है । हम परेशान हो जाते हैं। पर यह धरती हमारी पृथ्वी बहुत सहनशील है गर्मी सर्दी बरसात को आसानी से कहती है। हमें भी धरती की तरह सहनशील बनना चाहिए।

यह बात तो रहीम जी ने भी बताई है। हमें अपनी पृथ्वी को स्वच्छ सुंदर प्यारी और न्यारी बनाना है। हम अपनी पृथ्वी की जितनी तारीफ करें उतनी कम है। हमें हमेशा कहा जाता है कि पेड़ लगाओ पर हमें मजाक लगता है कि हमें जरूरत क्या है। जैसे जीवन चल रहा है चलने दो। पर हमें क्या पता हमारा जीवन भी इन पेड़ों पर चल रहा है।

हमें ने पेड़ लगाने की कभी सोची नहीं और आज वही पर हमारी जान बचा रहे हैं। इस करो ना वायरस से अगर पेड़ ना होते तो ऑक्सीजन ना होता और लोग मर जाते। हम अपनी पृथ्वी का कर्ज कैसे चुका है। एक एक पेड़ लगाकर। जानती हूं कि अभी लॉक डाउन चल रहा है तो कोई घर से बाहर नहीं निकल रहा है बात नहीं आपके घर में जो भी छोटा सा पौधा है । उसकी सेवा करें। उसको पानी दो। अगर पौधा नहीं है तो भी कोई बात नहीं। कागज पर एक पौधा बनाओ और सच्चे मन से उसे याद करो जैसे वह तुम्हारे घर में है। अगर वह भी नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं आप किसी का भला करें पृथ्वी मां बहुत खुश होंगी।


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