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H.K. Joshi Joshi

Romance Others

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H.K. Joshi Joshi

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प्रेंम पथिक

प्रेंम पथिक

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प्रेम की एक उम्र हैं।

           दिल  नहीं   मानता,

           भला, जिसने रस चखा।

वह दीवाना सा हो गया,

न चाह ,न चिन्ता कोई है।

          बस एक नशा सा आया है,

          और खो गए मदहोशियों में।

कोई क्या समझें ?

 समझें तो क्या हो?

         जो राही है इस प्रेम पथ के,

         वह कभी रुका नहीं करते।

राहें आसां नहीं फिर भी,

फिर भी गिर गिर के चलेंगे।



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