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Rajeshwar Mandal

Romance


4.5  

Rajeshwar Mandal

Romance


प्रेम :तेरे रंग अनेक

प्रेम :तेरे रंग अनेक

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जब भी शहर से पढाई कर दो चार दिनों की छुट्टी में घर आता तो उनसे मुलाकात किये बगैर नहीं रहता। घंटो साथ बैठते और निरर्थक इधर उधर की बातें किया करते । और फिर अपने अपने घर। आज के दौड़ में ऐसे मेल मिलाप के न जाने कितने अर्थ अनर्थ निकाले जाते। पर सच कहुँ तो हम दोनों के मध्य इस तरह की कोई बाते नहीं होती थी। न कोई कल्पना और न ही कोई यथार्थ। 

उस दिन भी वह इसी तरह आई थी। पर आज उनकी आँखों में शायद कोई सपना था। बात - चीत के क्रम में पूछ बैठी,"बस पढते ही रहना है या नौकरी भी करना है।"

" प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल तो हो रहा हूँ पर हरेक बार एक आध नंबर से पीछे हो जा रहा हूँ।" प्रत्यूतर में मैने कहा। 

"तो थोड़ा और मन लगाकर पढाई किया करो न । मुझे तो लगता है इस एक आध नंबर के चलते हमलोगो की गाड़ी न छुट जाए।" मैने असहज भाव से उनकी ओर देखा।वो सर झुकाये नाखून से जमीन पर कुछ लिख रही थी। 

मतलब मैं समझा नहीं -"मैनें पूछा।" 

"तुम भी न....। मतलब घर में आज मेरी शादी की चर्चा हो रही थी ।" कहते कहते...... 

" हा हा मैं ठठाकर हँस पड़ा। "तो ये बात है। वही तो मैं तब से सोच रहा था मोहतरमा आज इतनी शर्मा क्यों रही है। अरे ये तो बड़ी खुशी की बात है। देखना मैं तुम्हारे लिए कितना अच्छा गिफ्ट लाउंगा शहर से। जल्दी कर ले शादी। मेरा तो अभी पता नहीं। ऊँट किस करवट बैठेगी। 

इसी बीच मैने गौर किया। उनकी आँखे नम हो गई है। और मुखमंडल रुआँसे होते जा रही है। मैने टोकटे हुए कहा।"इसमें रोने की क्या बात है। एक न एक दिन तो सबका शादी ब्याह होना है। ये तो प्रकृति का बना बनाया विधान है। आज तेरी तो कल मेरी। चुप हो जा पगली । या अभी शादी की इच्छा नहीं है तो बोल दो घरवालो को। छोटी सी तो बात है। या तुम्हें बोलने में संकोच हो रही है तो बोलो मैं ही बोल देता हूँ। "

बोल पाओगे तुम ? ओढनी से आँखे पोछते हुए पूछ बैठी। क्यों नहीं छोटी सी तो बात है चलो तुम्हारे सामने बोल दुंगा। इतना सुनते ही इनके चेहरे पर एक अलग खुशी सी छा गई ।फिर एक अदभुत मुस्कान से साथ बोली"बताओ क्या बोलोगे तुम । इतना आसान नहीं है मिस्टर जितना तुम सोच रहे हो। खैर छोड़ो ये सब बातें । वैसे क्या गिफ्ट सोचे हो तुम।"

लो कर लो बात । एक तरफ बोलती है छोड़ो ये सब बातें फिर कहानी वहीं से शुरू। "

इसी तरह उलूल जुलूल की बातें करते करते शाम हो चली थी । अपने अपने घर जाने का समय हो चला था। एक पश्नवाचक निगाहों से मेरी तरफ देखी जा रही थी। मैने कई बार उसे टोका पर वह एक टक मेरे तरफ देखी जा रही थी। अंत में मैने हाथ से हिलाते हुए पूछा क्या हुआ तुमको? ।एकाएक तन्द्रा तोड़ते हुए बोली कुछ नहीं । बस यूँही कहीं खो गई थी मै । शाम हो गया है अब हमे चलना चाहिए। पर ऐसा करो मैं चलती हूँ। मेरे जाने के बाद इसे पढ़ लेना। पर हाँ पसंद आये या न आये पर बुरा मत मानना। आगे तुम्हारी मर्जी। कह कर वो चली गई। 

बात चीत के क्रम में मैने ध्यान नहीं दिया कि वो ज़मीन पर क्या लिख रही थी। और उसे लिखने के बाद पलास के बड़े बड़े पतो से ढक दी थी। मेरे मन की सोई जिज्ञासा जाग उठी। जैसे ही मैने पता हटाया दिल धक से हो उठा। लिखा हुआ था "आइ लव यू"।

पढकर मैं आवाक सा रह गया। जिस चीज की कल्पना तक न की थी उसी से साक्षात्कार हो गया। एक अलग तरह की उधेर-बुन मन में चलने लगी। हाँ - ना हाँ -ना की सोच करते करते कब घर आ गया पता भी नहीं चला। निरर्थक की मुलाकात अब सार्थक लगने लगी थी। कभी घंटे सेकंड में बीत जाती तो कभी इंतजार का सेकंड घंटे सा प्रतीत होने लगा था। जो प्रतियोगिता परीक्षा एक आध अंक से छुटा करता था अब उसका दायरा चार पाँच अंको का हो गया । दिन महीने बितते रहे। दिन रात रोते रहे। एक दूजे में खोते रहे। एक दिन की बात है उसने मजाकिया लहजे में पूछ बैठी हमलोगो का जोड़ी कितना सुंदर है न। मैने भी मजाकिया लहजे में बोल दिया हाँ वैसे ही जैसे भारत के साथ श्रीलंका। पर ये क्या इतना सुनते ही वह तुनक गई, और पूछ बैठी मेरी तुलना श्रीलंका से क्यों ?मैं नाटी कद का हूँ ? ऐसी बात था तो तुम पहले क्यों नहीं बताया। मैं टाइम पास करने का सामग्री नहीं हूँ मिस्टर। एक ही सांस में आदी इत्यादि कई रंग की उलाहना देती हुई वह उठकर चली गई। 

एक छोटी सी मजाक ऐसा दृश्य उत्पन्न कर देगा वह सोचा तक न था। सच कहता हूँ उसके बाद कई प्रयत्न किये उसे मनाने का परंतु सारे प्रयत्न निष्फल रहा। कुल मिलाकर सारांश ये निकला कि वो अपने घर मैं अपने घर। समय के साथ यादें भी फीकी पड़ने लगी।बीस पच्चीस बरस बीत चुके है। सब अपने अपने में मस्त है। सब वादे यादों में सिमट चुकी है। 

गाँव के एक शादी समारोह मे अनायास मुलाकात हुई थी। मैंने उसे देखते ही कन्नी काटने की कोशिश की, पर उसके तीक्ष्ण निगाहों से बच नहीं पाया। मेरे अंदर का सोया गुस्सा जागने ही बाला था कि वो बोल बैठी " ओ मिस्टर व्हेयर आर यू गोईंग ,आई एम हीयर। डूनाॅट टेक इट सिरीयस बी हैप्पी मिस्टर। नैदर आई एम रौंग नोर यू आर रौंग । प्रिभीयसली व्हीच हैज बीन हैपेंड वीथ यू दैट वाज क्रियटेड बाई मी इन द प्लान्ड वे । बिकाउज यू वेयर फेल्ट इन माई लव डीपली एंड इन कोन्सेक्यूटेवली आॅफ माई लव योर प्रिपरेशन फार द एग्जामिनेशन बीकेम सफर्ड। डिफरेंसेस आॅफ मार्क्स वाज टेरीवल। व्हेन इट केम इन माई नाॅलेज आई डिसाइडेड टु डु सम सच ऐक्टिंग सो दैट यू कैन फाॅरगेट मी। एंड कान्संट्रेट योरसेल्फ रिगारडिंग प्रिपरेशन फार द कमिंग एग्जामिनेशन। "एंड आफ्टर ए लाॅंग गैप आइ हैभ हर्ड एबाउट योर सक्सेस।"बीलीव आॅर नाॅट । बट दीस इज ट्रू। नाऊ आई एम वेरी हैप्पी टू सी यू। एंड आई थींक देयर आर नो इलेगलीटी एंड एरर इन माई दैट डिसीजन। आई डूनाॅट नो व्हाट यू थींक । बट आई स्टील लव यू। "

 इतना सुनते ही मेरे मन में इनके प्रति सम्मान और बढ़ गया। जी चाहता था वो अविरल इसी तरह सुनाती रहे और मैं निर्विकार भाव से यूँ ही चुपचाप सुनता रहूँ। पर इसी बात चीत के क्रम में उनके पति महोदय आ गए। उन्होने मेरा परिचय उनसे करवाया। 

उनकी बातें सुनकर मुझे भी महसूस हुआ शायद नहीं बल्की उनका समय लिया गया निर्णय बिल्कुल सही था । अन्यथा....? 

पर बरसो की छिपी दर्द को नहीं संभाल पाया और अनायास ही आँखों से अविरल गंगा यमुना प्रवाहित होने लगी। पति महोदय के उपस्थिति के कारण वह ढ़ाढ़स तो नहीं बंधा पाई। 

पर जाते जाते चुपके से एक मैरुन रंग का रुमाल दे गई।


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