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Vigyan Prakash

Romance

2  

Vigyan Prakash

Romance

प्रेम कहानी

प्रेम कहानी

2 mins
360

“अमा बोल भी दो यार।”

“कैसे बोल दे? जो उसने सैन्डल निकाल के वहीं मारना शुरु कर दिया कसम से पुरे शहर मे मुंह ना दिखा पायेंगे। दोस्ती जायेगी सो अलग। हमसे ना होगा भाई।”

“अरे तुम डरते बहुत हो यार। पहले जरा कोशिश तो करो। चढ़ जाओ सूली पर। अब इश्क़ किया तो डरना क्या।”

“कहने को बहुत आसान है भाई। हमारी तो जान हलक मे आ जाती है। और फिर दोस्ती है ना उसे समझना होगा खुद समझ जायेगी।”

“मतलब तुम अपनी जबान ना खोलोगे।”

“ना भाई हमसे मुमकिन नही।”

“डूब मरो मियाँ इश्क़ का इजहार नही कर सकते और ख्वाब ताज महल बनाने के करते हो।”

“हमे तो कभी कभी लगता है इश्क़ है ही नहीं हमरे भाग में। उपर वाला लिखना ही भुल गया वो पन्ना।”

“जाओ यार खुद बोल नही पाते और खता खुदा की बताते हो। जाओ कॉलेज जाओ।”

हमे लगा ये किस्सा यहीं खत्म हो जायेगा। मगर इश्क़ का बुखार हमपे से जाने वाला ना था। और वो तो दोस्त था। गढ्ढे मे धकेलना काम था उसका।

शाम को जब घर आये तो जनाब ने चिठ्ठी तैयार रखी थी और दरवाजे पर बैठे थे।

“ये बस्ता लाओ और ये चिठ्ठी लो। और सीधा निकलो निधी के घर समझे। जबतक पहुचोगे रात भी हो जायेगी। पीछे से चढ़ जाना। और हाँ बिना चिठ्ठी दिये लौटे तो घर मे घुसने ना दूंगा।”

“अरे मगर भाई…”

“निकलो निकलो जल्दी।”

और धक्का देते हुए हमे निकाल दिया गया।

मरते क्या ना करते। चल दिये हम भारी कदमों से।

घर पहुंचते पहुंचते तो हमारी हिम्मत ने जवाब दे दिया। मगर हमने भी सोच लिया था आज आर या तो पार। घर के उस तरफ गये जिस तरफ उसका कमरा हुआ करता था और चढ़ने की कोशिश शुरु कर दी।

अब हम कोई फिल्मी हीरो तो थे नही। गिर गये और घुटने छील गये हमारे। जोरदार आवाज भी हुई। तभी उपर बालकनी से आवाज आयी।

“अरे शेखर!”

“अरे निधी जी वो मै वो…” और जुबां अटक गई हमारी।

“हाँ आप?” एक अजीब सी मुस्कुराहट के साथ वो बोली।

“वो मै इधर से गिर रहा था निकल गया।”

“आपका मतलब है निकल रहे थे गिर गये।”इस बार उसकी मुस्कान साफ देखी जा सकती थी।

“ही ही ही जी बिलकुल।”खीसे निपोरते हुए हमने कहा।

“मगर इधर से क्यूँ इधर से तो रास्ता नही है। इधर तो खेत है। रास्ता तो सामने से है जनाब। किधर जाने का इरादा है।”

“आपके दिल में।” मै बिलकुल अनायास ही बोल गया।

हाँ वो मुस्कुरा रही थी और हर सैकेण्ड के साथ उसकी मुस्कुराहट बढती ही जा रही थी। घुटने का दर्द कहाँ गायब हो गया था पता ही नहीं।

हमारा दिल तो खुशी के मारे सारी हदें तोडे जा रहा था। बस यही थी हमारी प्रेम कहानी की शुरुआत।


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