Yashwant Rathore

Comedy Fantasy


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Yashwant Rathore

Comedy Fantasy


फ्रूट्स की कॉलेज

फ्रूट्स की कॉलेज

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आज कॉलेज का पहला दिन है। चारों और सुन्दर हरी पहाड़ियों से घिरा बीच में खुला मैदान, उसके पास बहती हुई नदी, इसी खुले मैदान के बीचो बीच था हमारा कॉलेज जिसका नाम था -' आमश्री कॉलेज ' 

उड़ते हुए घोड़े अकसर इन पहाड़ियों में घूमने आ जाते हैं 

बाबा बताते हैं ये चाँद नगरी से उड़ के आते है 

अरे अरे कॉलेज की बात चल रह थी ना। 

आज में भी कॉलेज जाऊंगी। 

मैं कौन ? वो अभी नहीं बताने वाली।.. जानना चाहते हो मुझे। आहा।... कोई लड़की इतनी जल्दी खुलती है क्या, परवाने शम्म में जल जाते हैं उसे पाने के लिए, तुम मुझे कुछ समय ही दे दो 

 हा हा हा क्या मेरी जवानी में' दिलचस्पी हैं तुम्हारी ?  आहा।

या मोहब्बत में, इतनी आसान नहीं मोहब्बत जनाब - "तिल तिल जलते भी रहोगे और ख़त्म होते भी "

अरे वाह कॉलेज का गेट खुला, आगे खुद ही देख लो।...

स्टूडेंट्स कॉलेज में एंटर होते हुए

केला - आय हाय ये मौसमी और नारंगी हैं क्या, क्या ब्यूटीफुल लग रही हैं यार 

अमरुद - बड़े बाप की बिगड़ी औलादे हैं यार, कपड़े देखो इनके

केला - अबे तुझे कैसे पता बिगड़ी हुई हैं साले, मुझे तो बिगड़ी हुई चलेगी,

अमरुद - कमीने,  मुस्कुराते हुए

केला - तू भी पटा लियो साले, कॉलेज बर्बाद नहीं होनी चाहिए भाई।

अमरुद - यार तेरे बाप के पास पैसा हैं, तुम्हारा तो साल भर का बिज़नेस हैं, हम तो सीजनल हैं यार, जिसके पास पैसा होता हैं ना उन्ही के ऊपर ये पिले कपड़े जचते हैं, में साइकिल पे पहन के आऊं पिले, अच्छा लगूंगा क्या ? इसलिए सोबर बन के आना पड़ता हैं, देख चेहरे पे दाग भी कितने हैं 

केला - अबे साले अमरूदिये तू बड़ा डरपोक हैं, उनपे ध्यान दे यार उनपे, और मौसमी को देख, सैम कपडे पहन के आयी हैं, मैचिंग मैचिंग अहह क्या बात हैं 

अमरुद - हसतें हुए , हाँ यार 

केला - पटा लियो, सोबर सोबर अहह ,  हा हा हा 

मौसमी - दी (नारंगी ) ये हमें घूर रहे है क्या 

नारंगी - ऐसा कौन है जो हमें न देखे इस जहां  में...अभी तो कई आशिक मरेंगे, इस जलवे हुस्ने यार पे।

इनका दिन बना दू आज 

मौसमी - दीदी तुम्हे पता हैं ना ये सब मुझे अच्छा नहीं लगता, स्कूल के बाहर भी आपके १० दीवाने खड़े रहते थे। 

नारंगी - ये नेक्स्ट लेवल ह बेबी,

केला और अमरुद दोनों घूर रहे हैं।.. 

नारंगी ने अपने दाएं हाथ से, बायीं तरफ से ड्रेस ( छिलका ) को थोड़ा नीचे किया 

केला - अरे बाप रे बहुत रसीली हैं  ये तो, मैं तो।.. 

अमरुद - चुप कर साले, तू तो ..पर रसीली तो हैं यार ..


लो में फिर से आ गई

पता है हमारे कॉलेज का नाम "आमश्री कॉलेज " क्यों हैं 

क्योंकि आम राजघराणे से बिलोंग करते हैं, इनके नाम से कई पार्क, बिल्डिंग और कॉलेजेस हैं 

इनको राजा किन्होंने बनाया, आप ऐसा सोच रहे हो ना, पता नहीं।।

हम तो बचपन से सुनते आ रहे हैं की ये पीढ़ियों से राजा ही थे 

अरे आप ने काफी मूवीज देखी होगी ना।

ना ना ना मूवीज की तरह सिर्फ रेप और लगान ही वसूल नहीं करते थे, कुछ बहुत अच्छे इंसान भी थे 

बापू कहते हैं शहर में इनके बहुत से हॉस्पिटल और कॉलेजेस है इनका ये आज भी एक रूपया ही किराया लेते हैं 

एक रूपया भी क्यों लेते है ऐसा ?

नाम के, तारीफ के और प्यार  के तो भूखे हैं राजाजी, इतना तो चहिये ना 

अब तो इनका राज भी कबसे गया पर काफी अपने आप को आज भी राजा ही समझते हैं 

अरे र र र ये कौन हैं

ये हमारी साइंस की टीचर हैं "बैंगन मैडम", आधे लड़के इनके  दीवाने हैं।

केला - अरे बाप रे, ये तो टीचर लगती हैं, क्या कमाल की तश।.

अमरुद -चल बे , अभी फर्स्ट क्लास इन्हीं की हैं, हवस का पुजारी 

केला - सुपरमैन में हूँ रणजीत का फैन।...

गाड़ी में तेज आवाज़ से म्यूजिक बजते हुए "आम भाई" की एंट्री 

साथ में आलू और प्याज  भी बैठे हुए

प्याज गेट खोलते हुए, आम भाई जुते जमीन पे ठोकते हुए , पहले कॉलेज को देखते हुए फिर आसमां को ताकते हुए खड़े हैं

प्याज़ आलू को - तेरे लिए भी अब गेट खोलू बे 

आलू - उतर रहा हूँ बे 

प्याज़ जोर जोर से बातें करते हुए , सबको दिखाते हुए की वो कार से आया हैं और छोटे राजकुमार "आम भाई " के साथ आया हैं और इधर उधर घूमते हुए आगे बढ़ जाता हैं 

आलू आम से- यार इसको क्यों साथ रखता हैं, बदबू मारता हैं, छिलका हैं साला कोई रीढ़ की हड्डी नहीं ह इसमें, सिर्फ तेरे पैसे पे मरता हैं, दोस्ती कोई नहीं इसमें 

आम - जानी हम अपने दोस्तों का साथ कभी नहीं छोड़ते 

आलू - ऐटिटूड से बाहर आ बे, तू स्टूडेंट हैं, यहाँ का राजा नहीं 

आम - ये कॉलेज मेरे दादाजी ने।.. 

आलू - हाँ पता हैं पता हैं बोर ना कर। १० बार बता चूका हैं 

केला और अमरुद आम की तरफ आते हैं 

अमरुद केले से - यार ये आलू और प्याज की आम से दोस्ती कैसे हुई 

केला - ये चलते सिक्के हैं, मार्किट में सबसे ज्यादा यही चलते हैं, बोलने में भी एक्सपर्ट हैं और प्याज तो बड़ा चापलूस भी हैं और आम तो वैसे भी तारीफ के भूखे होते हैं 

केला, अमरुद, आम,  और आलू से  मिलते हैं 

और भाई कैसे, सब बढ़िया, सब बढ़िया 

सब क्लास में चलते हैं.

तभी प्रिंसिपल - नारियल सर क्लास में आते हैं

अरे रर र में भी आ गई क्लास में

हमारे सर ना डिसिप्लिन के बहुत स्ट्रिक्ट हैं, बच्चे तो बच्चे टीचर्स भी इनसे डरते हैं

पर पता नहीं मुझे ये ना दिल से बहुत नाजुक लगते हैं.

फीलिंग इमोशंस से भरे लगते है, ऐसा लगता है आज की दुनिया में इतने शुद्ध फल कहां मिलते हैं

फलानियत को बचाने के लिए ऐसे बहुत फलों की आवश्यकता है.

नारियल -

क्रमश जारी हैं



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