STORYMIRROR

Chandan Kumar

Abstract

4  

Chandan Kumar

Abstract

पहली मुलाक़ात

पहली मुलाक़ात

1 min
16

पहली मुलाक़ात बारिश की रिमझिम में दिल्ली का कनॉट प्लेस कुछ ज़्यादा ही हसीन लग रहा था। भीगे रास्तों पर चलते हुए वह लड़की, नीले दुपट्टे में लिपटी, जैसे खुद किसी कविता का मुखड़ा हो। मैं, आरव, पहली बार किसी अनजानी सी पर इतनी अपनी लगने वाली लड़की से मिलने जा रहा था — नेहा। हमारी पहचान ऑनलाइन हुई थी। हफ्तों की बातचीत के बाद, आज पहली बार मिलने का दिन था। मन में घबराहट भी थी और उम्मीद भी। वो आई, मुस्कुराई, और एक हल्की सी "हाय" कहकर बैठ गई। "तुम्हें बारिश पसंद है?" मैंने पूछा। "हाँ," उसने कहा, "क्योंकि ये पुराने ग़म भी धो देती है और नए एहसास भी जगा देती है।" उसकी आवाज़ में वो नमी थी जो किसी पुराने खत की तरह मन को छू जाती है। हमने कॉफी पी, कुछ किताबों की बातें कीं, कुछ खामोशियां भी साझा कीं — और उन खामोशियों में शायद सबसे ज़्यादा बातें हुईं। वो पहली मुलाक़ात थी, लेकिन दिल ने जैसे मान लिया कि यह कोई आखिरी नहीं होगी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Abstract