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Khwabeeda Khwabeeda

Abstract Romance

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Khwabeeda Khwabeeda

Abstract Romance

पहली मुलाकात

पहली मुलाकात

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सुबह के छह बज चुके थे, कमरा सूरज की किरणों से प्रकाशित हो गया था जिससे सिमरन की नींद टूट चुकी थी और उसे घर के मंदिर से घंटी की आवाज़ आ रही थी। उसने उठ कर आदतन सबसे पहले अपना मोबाइल देखा। सतीश का मैसेज था - "गुड मॉर्निंग बेबी!!"

मैसेज देख कर सिमरन के चेहरे पर मुस्कान आ गयी। उसने तुरंत रिप्लाई किया - "गुड मॉर्निंग, आज तुम जल्दी उठ गए?"

सतीश जैसे सिमरन के रिप्लाई का ही इंतज़ार कर रहा था, उसने झट से रिप्लाई किया - "जल्दी नहीं उठा, रात भर सो नहीं पाया एक्साइटमेंट से।"

सिमरन मैसेज का तात्पर्य नहीं समझ पाई। "किस बात की एक्साइटमेंट, सतीश?" सिमरन ने सवाल करते हुए रिप्लाई किया।

"क्या तुम भूल गई, आज शाम को हमने मिलने का प्लान किया है, तुमसे मेरी पहली मुलाक़ात।"

सिमरन ने तुरंत बिस्तर के पास टेबल पर रखा डेस्क कैलेंडर देखा तो आज की तारीख पर लाल पेन से गोला बना था, और उसके बाजू में उसने लिखा था - 'स्पेशल डे'। सिमरन ने खुद के सर पर हल्की टपली मारते हुए कहा - "जिस दिन का मैं कब से इंतज़ार कर रही हूँ, वो मैं कैसे भूल गई!"

सिमरन ने तुरंत फेसबुक खोलकर पोस्ट कर दिया - "काफी दिनों से आज का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी और आज समझ नहीं आ रहा कैसे खुद को शांत रखूं।" उसने अपनी बेस्ट फ्रेंड शिखा को भी टैग कर दिया। फिर सतीश का प्रोफाइल सर्च किया और उसके प्रोफाइल फोटो को देखने लगी।

पाँच महीने पहले सिमरन ने फेसबुक पर अपना अकाउंट खोला था और कुछ दिनों में कई दोस्त भी बना लिए थे। वह केवल जान-पहचान के लोगों के ही फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करती थी, पर एक दिन जब सतीश की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई, तो वह उसे रिजेक्ट नहीं कर पाई। अनजान होते हुए भी सतीश को दोस्त बनाने की अत्यंत इच्छा हुई। ना जाने क्यों, पर कोई बात तो थी, खासकर उसकी बड़ी-बड़ी काली आँखें, जो जैसे विशाल सागर में छुपे किसी मोती की तरह चमक रही थीं। उसकी आँखें जैसे सिमरन से बातें कर रही थीं। सिमरन उसकी प्रोफाइल फोटो को निहार ही रही थी कि तभी सतीश का पहला मैसेज आया, और फिर धीरे-धीरे दोनों अनजान दोस्त से बहुत अच्छे दोस्त बन गए। उनकी बातचीत टेक्स्ट मैसेज से वीडियो कॉल तक पहुँच गई, और डिजिटल दुनिया में ही सही, पर दोनों की नजदीकियाँ बढ़ने लगीं।

शाम को सिमरन अपना पसंदीदा पिंक टॉप और ब्लू जींस पहनकर तैयार हो गई। खुद को आईने में देखकर उसने एक हल्की मुस्कान दी, फिर जल्दी से पर्स उठाया और कैफे की ओर चल पड़ी, जहाँ वह सतीश से मिलने वाली थी।

कैफे में पहुंचकर सिमरन की धड़कनें तेज हो गईं। चारों ओर नज़र घुमाने के बाद उसकी नज़र एक टेबल पर पड़ी, जहाँ एक गुलाब का फूल लिए सतीश बैठा था। जैसे ही सतीश ने उसे देखा, उसकी आँखों में वही चमक थी जो पहली बार सिमरन ने उसकी प्रोफाइल फोटो में देखी थी।

"तो आखिरकार, हम मिल ही गए!" सतीश ने मुस्कुराते हुए कहा।

सिमरन हल्की सी हंसी और शरमाते हुए बैठ गई। दोनों ने काफी बातें कीं, हंसी-मज़ाक किया और अपनी पसंद-नापसंद शेयर की। वक़्त कब बीत गया, पता ही नहीं चला।

रात होते ही सतीश ने जेब से एक छोटा सा गिफ्ट बॉक्स निकाला और सिमरन की ओर बढ़ाया। सिमरन ने हैरानी से पूछा, "ये क्या है?"

सतीश ने मुस्कुराते हुए कहा, "आज सिर्फ हमारी पहली मुलाकात ही नहीं, बल्कि वैलेंटाइन्स डे भी है... मेरे लिए सबसे खास दिन।"

सिमरन हैरान रह गई, उसने सुबह से कई बार कैलेंडर देखा था पर वो वैलेंटाइन्स डे था ये उसके ज़हन में आया ही नहीं। 

"खोलो इसे," सतीश ने कहा।

सिमरन ने धीरे से बॉक्स खोला तो उसमें एक खूबसूरत ब्रेसलेट था, जिस पर छोटे-छोटे मोतियों से "S & S" लिखा था।

"सतीश... यह बहुत खूबसूरत है," सिमरन की आँखें खुशी से चमक उठीं।

"तुम मेरी ज़िंदगी में अचानक आई, पर अब लगता है जैसे हमेशा से मेरी थी," सतीश ने धीरे से कहा।

सिमरन के चेहरे पर हल्की गुलाबी रंगत आ गई। उसने ब्रेसलेट को अपने हाथ में पहन लिया और मुस्कुराते हुए कहा, "अब यह हमेशा मेरे साथ रहेगा, ठीक तुम्हारी तरह।"

चमकते शहर की रोशनी में, दो अनजान दिलों की यह पहली मुलाकात एक खूबसूरत शुरुआत में बदल चुकी थी। वैलेंटाइन्स डे की यह रात उनके जीवन की सबसे यादगार रातों में से एक बन गई।


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