इश्क़ दोबारा
इश्क़ दोबारा
सुबह के 5 बज रहे थे। सूरज की पहली किरण खिड़की को चीरते हुए मिस्टर गुप्ता के चेहरे पर पड़ी तो उनकी नींद टूट गई। उन्होंने करवट बदला और बगल में सो रही मिसेज गुप्ता पर अपना हाथ रखने के लिए उठाया ही था कि बीती रात दोनों के बीच हुई नोंक झोंक याद आ गयी और गुस्से से वापस करवट बदल ली। पर रोज़ सुबह जल्दी उठने वाले गुप्ता जी को बिस्तर पर लेटे रहने से असुविधा होने लगी तो वे उठ गए, बाथरूम जा कर फ्रेश हुए। बाथरूम से बाहर निकल कर देखा कि मिसेज गुप्ता अभी भी बिस्तर पर लेटीं थीं , इसका तो यही अर्थ था कि उनका गुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ है। परिस्थिति की नज़ाकत को समझते हुए मिस्टर गुप्ता किचन की ओर चले गए। 24 साल की वैवाहिक जीवन में ये पहली बार नहीं था जब दोनों के बीच झगड़ा हुआ था और मिसेज गुप्ता सूरज चढ़ने के बाद भी ना चाहते हुए बिस्तर पर पड़ीं थीं। इसका सीधा मतलब यही था कि आज सुबह की चाय मिस्टर गुप्ता को बनानी पड़ेगी और मिसेज गुप्ता को बिस्तर पर ला कर देनी पड़ेगी, वही शब्द जो आज कल की नई पीढ़ी ने ईजाद किया है, 'बेड टी'। वैसे तो मिस्टर गुप्ता की उम्र 45 वर्ष, और उनकी धर्मपत्नी की उम्र 43 वर्ष है, इस उम्र में भी दोनों ऐसे लड़ते है जैसे कोई टीनएज कपल।
कुछ देर में मिस्टर गुप्ता एक ट्रे में दो कप चाय और एक प्लेट में मिसेज गुप्ता की मनपसंद बिस्कुट ले कर कमरे में आए और अपनी धर्मपत्नी को प्यार से आवाज़ दे कर जगाया, हालांकि उन्हें मालूम था कि मिसेज गुप्ता सोने का सिर्फ ढोंग कर रहीं हैं। मिसेज गुप्ता ने भी नाटक को जारी रखते हुए अंगड़ाई लिया और बोलीं - "अरे आप ने क्यों कष्ट किया, मैं तो उठ ही रही थी। "
"कभी कभी मैं चाय बना कर अपनी पत्नी को दूंगा तो कोई प्रलय थोड़ी ना आ जायेगा। " ये कहते हुए मिस्टर गुप्ता मुस्कुराये और चाय की कप अपनी धर्मपत्नी की तरफ बढ़ा दी। हालांकि इस बात पर मिसेज गुप्ता ने अपनी एक भौं उठा कर मिस्टर गुप्ता की ओर गुस्से से देखा क्यूंकि रात को जो झगड़ा हुआ था उसका कारण ही ये था कि मिस्टर गुप्ता किसी भी काम में उनकी मदद नहीं करते। पर सुबह की दिनचर्या से समय निकाल कर उनके लिए चाय बना कर देना ही काफी था उनका गुस्सा शांत करने के लिए।
'बेड टी' से रात की नोंक झोंक ख़त्म हों गयी थी, मिस्टर गुप्ता ऑफिस के लिए निकल गए थे और मिसेज गुप्ता भी घर के कामों में व्यस्त हों गयीं थीं पर उनकी बेटी रूपा आज सुबह से किसी बात को लेकर गहरे सोच में थी। मिसेज गुप्ता ने उसे यूँ ख्यालों में खोये हुए देखा तो उससे पूछा -"क्यों आज कॉलेज नहीं जाना क्या, घर पर आराम से बैठ कर ख्यालों की खिचड़ी पकानी है ?"
"नहीं ना माँ। " रूपा अपनी बात पूरी कर पाती उससे पहले मिसेज गुप्ता बोलीं - "अच्छा है, अगर तू आज छुट्टी ले रही है तो घर के कामो में मेरा हाथ बंटा दे। "
"अरे मेरी बात तो सुनो, मैं आपके और पापा के झगड़े के बारे में सोच रही थी।"
"उसमे इतना सोचने वाली क्या बात है ?"
"आप दोनों जब झगड़ा करते हो तब लगता है कि डाइवोर्स लेकर ही मानोगे, पर अगले ही दिन सब ठीक हो जाता है, वो कैसे? कभी कभी मुझे शक होता है कि आप दोनों झगड़ा करने का नाटक तो नहीं कर रहे।"
"मुझे ये बता, पायल तेरी बहुत अच्छी सहेली है ना। "
"हाँ, वो मेरी बेस्ट फ्रेंड है, पर उसका इस बात से क्या ?"
"मेरी बात पूरी तो होने दे। तुम दोनों इतनी पक्की सहेलियां हो पर क्या तुम दोनों के बीच कभी भी नोंक झोंक नहीं होता, किसी बात पर बहस नहीं होता।" रूपा ने उत्तर दिया -"हाँ, होता है। "
"फिर उस झगड़े के बाद तुम दोनों फिर से बेस्ट फ्रेंड्स बन जाते हो ना।"
"हां पर हमारी बात अलग है, हम बेस्ट फ्रेंड्स हैं, और आप दोनों हस्बैंड वाइफ। हमारी और आप दोनों की तुलना नहीं हो सकती। "
"देख बेटा, किसी भी रिश्ते की शुरुवात अगर दोस्ती से हो तो वो रिश्ता बहुत मज़बूत होता है, तेरे पापा और मैं पति पत्नी होने से पहले बहुत अच्छे दोस्त हैं, जीवनसाथी हैं, और ये छोटी मोटी नोंक झोंके से हमारा रिश्ता ख़राब नहीं होने वाला। हमारे बीच का प्यार ही है जो हमे बांध कर रखता है एक दूसरे से।"
"इस उम्र में भी प्यार रहता है क्या भला।" रूपा ने आश्चर्य होकर पूछा।
"प्यार तो प्यार होता है, उम्र देख कर थोड़ी ना प्यार किया जाता है । ये प्यार ही है जो झगड़े के समय भी सीमा लांघने नहीं देता, ये प्यार ही है जो सुबह को रात की हर कड़वी बात को भुला देता है, ये प्यार ही है जो मुश्किल घड़ी में भी साथ खड़े हो कर लड़ने की ताकत देता है।"
मिसेज गुप्ता रूपा से ये बातें कह रहीं थीं पर प्यार का असली मतलब तो आज उन्होंने खुद की बातों से ही सीखा था। आज उनको मिस्टर गुप्ता से फिर एक बार प्यार हो गया था।

