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Nupur D

Drama Romance

4  

Nupur D

Drama Romance

अनकही यादें

अनकही यादें

3 mins
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संध्या आईने के सामने खड़ी थी। सुबह का सूरज खिड़की से कमरे में झाँक रहा था, लेकिन उसका चेहरा बुझा हुआ लग रहा था। शादी को तीन साल हो चुके थे और अजय के साथ उसका रिश्ता हर मायने में स्थिर था। अजय हमेशा उसका ध्यान रखता, छोटी-छोटी बातों में उसे खुश करने की कोशिश करता। फिर भी, पिछले कुछ दिनों से उसके मन में एक अजीब सी हलचल थी।

रात होते ही जब अजय चैन से सो जाता, संध्या करवटें बदलती रहती। सपनों में बार-बार वही चेहरा आता — आरव। उसका कॉलेज वाला प्रेमी, जिसके साथ उसने चार साल बिताए थे। हंसी, दोस्ती, झगड़े, कसमें, और अधूरी कहानियाँ… सब जैसे अचानक लौट आए थे।

एक रात उसने सपना देखा कि आरव उसे कैंटीन वाली पुरानी टेबल पर बैठा रहा है। वह हंसते हुए कहता है, “देखो संध्या, हम अलग होकर भी अलग नहीं हो पाए। आज भी तुम मेरे ख्यालों में हो।” संध्या की आँखों से आँसू बह निकले। सपना इतना सजीव था कि नींद टूटने के बाद भी उसका असर बना रहा।

सुबह अजय ने जब उसकी आँखों में थकान देखी, तो उसने पूछा,
“सब ठीक है न, संध्या? तुम कुछ दिनों से परेशान लग रही हो।”

संध्या ने मुस्कुराने की कोशिश की, “कुछ नहीं, बस काम की थकान है।”
लेकिन भीतर ही भीतर वह जानती थी कि यह झूठ है।

दिन बीतते गए, और उसके सपनों का सिलसिला जारी रहा। अतीत का आकर्षण उसे अपने वश में करने लगा। एक शाम जब वह बालकनी में बैठी थी, अजय उसके पास आया और बोला,
“जानती हो, जब मैं ऑफिस से लौटता हूँ और तुम्हें यहाँ मेरा इंतज़ार करते देखता हूँ, तो लगता है ज़िंदगी कितनी खूबसूरत है।”

संध्या ने उसकी ओर देखा। अजय की आँखों में एक सच्चाई थी, जो शायद आरव की आँखों में भी कभी रही होगी। लेकिन फर्क ये था कि अजय आज उसके साथ था, उसका हर सुख-दुख बाँट रहा था।

उस रात संध्या ने फिर सपना देखा। इस बार उसने खुद को एक पुराने रास्ते पर खड़ा पाया। सामने आरव था।
आरव ने कहा, “तुम्हें लगता है तुम खुश हो? तुम्हारा दिल अब भी मेरे पास है।”

संध्या के भीतर एक संघर्ष चला। आँसुओं से भीगी आँखों के साथ उसने धीरे से जवाब दिया,
“हाँ, मैंने तुम्हें बहुत चाहा था। लेकिन अब मेरी दुनिया बदल चुकी है। अतीत कितना भी खूबसूरत क्यों न हो, वह वापस नहीं आता। मेरी सच्चाई, मेरा प्यार अब अजय है। वही मेरा वर्तमान और मेरा भविष्य है।”

आरव का चेहरा धुंधला पड़ने लगा और धीरे-धीरे सपना मिट गया।

सुबह जब संध्या उठी तो उसका दिल हल्का था। उसने रसोई में जाकर अजय के लिए पराठे बनाए। अजय हैरान होकर बोला,
“वाह! आज तो नाश्ता इतना प्यार से बना है, क्या बात है?”

संध्या मुस्कुराई और बोली,
“क्योंकि आज मुझे एहसास हुआ है कि मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी खुशी तुम हो। तुम्हारा प्यार ही मेरी दुनिया को पूरा करता है।”

अजय ने उसका हाथ थाम लिया। दोनों की आँखों में नमी थी, मगर उस नमी में भरोसा और गहरा प्यार झलक रहा था।


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