पहाड़ों में प्यार.
पहाड़ों में प्यार.
**कहानी का शीर्षक:** **"पहाड़ों में प्यार"**
**शैली:** रोमांटिक, भावनात्मक
**भाग 1: वो पहली नज़र**
शिमला की वादियों में बर्फ की हल्की चादर बिछी हुई थी। हवा में ठंडक थी, लेकिन दिल में एक अजीब सी गर्माहट थी। विशाल, एक लेखक, शहर की भागदौड़ से दूर सुकून की तलाश में आया था। वह अपनी डायरी और एक कैमरा लेकर हर सुबह किसी नए पहाड़ी रास्ते पर निकल पड़ता।
एक दिन, जब वह कुफरी की ओर एक सुनसान ट्रेक पर था, तभी उसने देखा – एक लड़की पेड़ के नीचे बैठी पेंटिंग बना रही थी। ऊनी टोपी में उसका चेहरा आधा छिपा था, लेकिन उसकी आँखें… उनमें कोई गहराई थी, जैसे पहाड़ की झीलें।
"तुम यहाँ रोज आती हो?" विशाल ने झिझकते हुए पूछा।
वह मुस्कराई, **"और तुम रोज पूछते हो?"**
यहीं से शुरुआत हुई थी, एक संवाद की, एक रिश्ता बनने की।
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### **भाग 2: सर्द हवाओं में गर्म चाय**
रोज सुबह दोनों मिलते – वो अपनी डायरी में कुछ लिखता, और वह अपनी पेंटिंग में रंग भरती। नाम पूछा, तो पता चला उसका नाम था नेहा। नेहा, जो लोकल स्कूल में बच्चों को आर्ट सिखाती थी। उसका कहना था, **"प्यार और पेंटिंग – दोनों में धैर्य चाहिए।"**
एक दिन, जब बर्फ ज़्यादा गिर रही थी, विशाल की तबीयत बिगड़ गई। वह होटल में अकेला पड़ा था। दरवाज़ा खटका – नेहा हाथ में गर्म अदरक वाली चाय और ऊनी कम्बल लेकर खड़ी थी।
पहाड़ों को बस तस्वीरों में देखते हैं, जीते नहीं," उसने मुस्करा कर कहा।
उस दिन विशाल को एहसास हुआ – पहाड़ जितने सख्त बाहर से लगते हैं, उतने ही मुलायम अंदर से होते हैं। **ठीक नेहा की तरह।**
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### **भाग 3: विदाई या वादा?**
समय जैसे उड़ चला था। विशाल की वापसी का दिन आ गया। स्टेशन पर जब वह नेहा से मिल रहा था, तो दिल भारी था।
"क्या तुम कभी वापस आओगे?" नेहा ने पूछा।
विशाल ने उसकी आँखों में देखा – **"पहाड़ों में कुछ अधूरा रह जाए, तो दिल वहीं रह जाता है। मैं यहीं हूँ, जब तक तुम मुझे भूल न जाओ।"**
ट्रेन चली, पर दोनों की आँखों में नमी थी, और दिलों में एक वादा।
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### **भाग 4: लौट आओ, विशाल**
छह महीने बाद, शिमला के उसी रास्ते पर एक लड़की फिर पेंटिंग बना रही थी। पीछे से आवाज़ आई –
**"अब तो रोज़ पूछने की ज़रूरत नहीं, मैं रोज़ यहीं रहूँगा।"**
नेहा ने पीछे मुड़कर देखा – विशाल था, हाथ में एक डायरी और एक अंगूठी।
**"पहाड़ों से तो प्यार हो ही गया था, पर असली प्यार तो तुमसे हुआ है।"**
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### **अंत**
बर्फ गिर रही थी। दूर से पहाड़ शांत थे, लेकिन दो दिलों में बहार आ चुकी थी। **क्योंकि कभी-कभी, पहाड़ की खामोशी में ही सबसे खूबसूरत प्रेम कहानियाँ लिखी जाती हैं।**
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