पाती नेह की
पाती नेह की
प्रिये
हार्दिक आभार
इस पत्र का अभिप्राय केवल इतना ही है कि वह बातें, जो संभवतः मै कभी अपने पुरुषोक्त अहंकार के कारण या कभी सामाजिक परिस्थितियोंवश तुम्हे सम्मुख हो नही कह पाता, वह तुम तक पहुँचे |
मै वैसे तो हर बात के लिए तुम्हारा ॠणी हूँ, परंतु मै कहना चाहता हूँ कि मुझ जैसे हठधर्मी और अनुदार विचार वाले व्यक्ति को जिस सहजता से तुम इतने वर्षो तक झेल सकी वह निश्चय ही प्रसंसा एवम् साधुवादिता का पात्र हैं |
तुम्हारा धैर्य प्रशंसनीय हैं | जीवन के हर ढलान पर जब मेरा स्वयं का विश्वास धराशायी हो गया , तुम्हारा दृढ़ आवलंब और प्रोत्साहन सदैव मेरे ध्वस्त मनोबल को सहारा देने के लिए उपस्थित रहे |
निराशा और हताशा से उत्पन्न मेरे क्रोध और कड़वाहट को भी तुमने नीलकंठ के समान ही सदैव बिना झिझक के पान कर लिया |
तुम मेरे जीवन का वह मधुवन हो, जहाँ विश्व भर के तिरस्कार, घृणा और द्वेष से पीड़ित मेरे अंदर का पशु शांति को प्राप्त हो जाता हैं |
तुम्हारा मेरे पार्श्व में होने का महत्व , न तो मै तुम्हे शब्दों में बता सकता हूँ और न ही मेरे व्यवहार में , परंतु मै इतना अवश्य कहना चाहता हूँ कि तुम ही वह भावनात्मक आधार हो जिसके कारण प्रेम, अपनत्व , उदारता, बंधुत्व जैसी मानवीय भावनायें मेरे अंदर आज भी जीवित हैं |
वह तुम ही हो जिसके चेहरे की स्मिता, मेरे क्लांत एवम् व्यग्र हृदय को संतोष प्रदान कर जाती हैं |
वह तुम ही हो जो मुझे निरंतर चलायमान और उत्कृष्ट प्राप्त करने के लिये प्रेरित करती हो |
तुम्हारा संतोष और कभी न शिकायत करने वाला व्यवहार मुझे उद्वेलित करने के साथ ही साथ प्रेरित भी करता रहता है, मै चाहता हूँ कि विश्व भर के समस्त ऐशोआराम तुम्हारी झोली में डाल दूँ |
यद्यपि तुम कभी किसी विषय या वस्तु के लिए शिकायत नही करती, हर परिस्थिति में सामंजस्य बिठा लेती है , फिर भी तुम्हारा संतोष मेरे हृदय को मथ देता हैं |
कभी कभी तो लगता हैं कि मेरा अस्तित्व तुम्हारे ऊपर ही निर्भर हैं, तुम हो तो मै हूँ, तुम नही तो शायद कुछ भी नही |
ऐसा नही है कि मै तुम्हारे मौन या तुम्हारे मूक संवादों को समझना नही चाहता परंतु मेरा पुरुषोचित अहंकार इसे इतना सहज नही होने दे सकता |
अंत्तोगत्वा मै केवल इतना कह सकता हूँ कि यदि तुम्हे कभी यह द्वंद हो या भ्रम हो कि क्या मै तुम्हे प्रेम करता भी हूँ या नही , तो मेरे शब्दों पर ध्यान मत देना , मेरे कार्य देखना , वे शायद तुम्हारे विचारों को स्पष्टता प्रदान कर पायें |
तुम्हारा सदैव

