Vikrant Kumar

Inspirational


4.8  

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नन्हे इंजीनियर

नन्हे इंजीनियर

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जिस प्रकार एक शिक्षक प्रत्येक बालक की क्षमताओं को पहचान कर उसे सीखने को प्रोत्साहित करता है ठीक उसी प्रकार प्रकृति के असंख्य मूक जीव भी अपने हुनर और कला से मनुष्य को सीखने के लिए प्रेरित करते है बशर्तें मनुष्य में संवेदनाएं और सीखने की ललक जिंदा हो।


शेयर की जा रही फ़ोटो उस समय की है जब हमारे विद्यालय के शिक्षक श्री रूपेश जी अदभुत कलाकारी से युक्त एक पक्षी का आशियाना हाथ में थामें उसकी बारीक सिलाई को देख कर अचंभित हो रहे थे।उनके मन में ये भाव उठ रहे थे कि आज जहाँ युवा पीढ़ी-" ये कार्य मेरे से नहीं होगा।" कह कर किसी भी मेहनत वाले कार्य को करने से इनकार कर देती है, वहीं ये नन्हे कलाकार कितनी तल्लीनता से अपने कार्य को अंजाम देते है।

और तो और उन्हें ऐसी इंजीनियरिंग सिखाता कौन है??? 

जो कार्य साधारणत्या मनुष्य भी कुशलता से नहीं कर पाता उसे ये मूक प्राणी कैसे इतनी कुशलता से कर लेते हैं ?


खैर... ये बात तो तय है कि उस सर्वशक्तिमान ने हर जीव की जरूरत के अनुसार क्षमताओं का भंडार दिया है, जो उसके जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होती है। स्वामी विवेकानंद भी कहते है कि प्राणी में शक्ति या क्षमता जन्म से ही अंतर्निहित होती है, बस आवश्यकता है अपनी क्षमताओं को पहचान कर अनुकूल इस्तेमाल करने की। 

परन्तु आज के दौर में एक दूसरा पहलू भी है कि सभी जीव प्रकृति के नियमों का पालन करते है परन्तु मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए उन नियमों को तोड़ कर उसी प्रकृति से खिलवाड़ कर रहा है जिससे ही उसका जीवन है।मनुष्य की इन्ही स्वार्थपरक हरकतों से प्रकृति अपना मूल स्वरूप खोती जा रही है।


आज जरूरत है कि मनुष्य भी इन नन्हे इंजीनियरों से प्रेरणा ले और अपने उस हुनर की पहचान करे जिसमें जीवन की आवश्यकता को पूरा करने के अलावा प्रकृति के साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार भी सम्मलित हो।




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