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Kumar Vikrant

Crime

4  

Kumar Vikrant

Crime

मुक्त

मुक्त

4 mins
338


उसके कपडे धूलधूसरित थे, जूते कीचड़ से सने हुए थे l वो सूनी सडक पर दौड़ रही थी, दौड़ रही थी अपनी जान बचाने के लिए, सडक उसे कंहा ले जाएगी उसे पता नहीं था l वो बस दौड़ रही थी, उस नर्क से दूर; जहाँ पिछले दो दिन अपना सब कुछ गवाँ चुकी थी, इज्जत, मान, अभिमान सब कुछ l हैप्पी होम नामक उस नर्क में वो पिछले दो दिन से जिस्मफरोशों की कैद में थी, जहाँ उसके साथ वो सब हुआ; जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी l वो वहां कैसे पंहुची? उसे वहां पंहुचाया था विशाल ने, उसके अपने विशाल ने l उसका मोबाइल फोन उस से छीना जा चूका था l दो दिन पहले उसके मोबाइल फ़ोन पर आई एक कॉल ने उसकी जिंदगी बदल दी थी l 

दो दिन पहले

“रात के आठ बज रहे हैं मै नहीं आ सकती l” —उसने विशाल की जिद को ठुकराते हुए कहा l 

“क्या बात कर रही है रिया, दुनिया कहाँ से कहाँ पंहुच गयी है, रात के आठ बजने से क्या होता है?” —विशाल ने जिद्द करते हुए कहा l 

“मै लड़की हूँ, इतनी रात में कैसे आ सकती हूँ?”

“लड़की होने से क्या होता है, अब लड़कियां पूरी तरह से आजाद है; किसी भी समय कही भी आ जा सकती है! तू घबरा मत, अपने पेरेंट्स से केमिस्ट्री के नोट्स बाज़ार से खरीदने के बहाने चली आ, मैं तेरा इंतजार कर रहा हूँ l” —विशाल उसे समझाते हुए बोला l

“लेकिन..........?”

“अब लेकिन-वेकिन कुछ नहीं, बस अब आ जाओ......”

घर के लोगो से बहाना बना कर जब वो विशाल के रेंटल फ्लैट पे पंहुची तो उसने देखा की वहाँ विशाल के अलावा चार लोग और थे l

“क्यों यही है छोकरी?”—उनमे से एक बोला l 

विशाल ने हाँ कहा l 

“लेकिन ये तो सोलह साल से ज्यादा की है, इसके तीन लाख नहीं मिलेंगे..........”

“क्यों नहीं मिलेंगे, यही तो तय हुआ था..........” —विशाल थोड़े रोष में बोला l 

“बकवास मत कर लड़की अठारह से कम की नहीं है, एक लाख से ज्यादा एक पैसा नहीं l”

“चलो एक ही निकालो........” —विशाल निराशा के साथ बोला l

“ये क्या हो रहा है विशाल? मैं जा रही हूँ l” —रिया तड़प कर बोली l

“कही नहीं जायेगी तू..........” —कहते हुए उन चारो में से एक रिया पर झपटा और उसके मूहँ पर क्लोरोफॉर्म से भीगा एक रुमाल लपेट दिया और रिया सुधबुध खो बैठी l

जब होश आया तो खुद को जीवनी नाम की कद्दावर औरत की कैद में पाया, और दो दिन तक नोंची गयी इंसान रुपी गिद्धों द्वारा l लेकिन आज सुबह वो भाग निकली एक दयावान ग्राहक की मदद से, जो उसे मर्दाना कपड़ो में लवली होम से बाहर ले आया था और उसको उसके हाल पर छोड़ कर गायब हो गया था l 

रिया की सांस फूल रही थी, वो एक पल के लिए रुकी सांस लेने के लिए l उसने पीछे मुड़ कर देखा तो लवली होम के गुंडों से भरी गाडी को अपने पीछे आते देखा l वह पुनः दौड़ पड़ी लेकिन तब तक गुंडों भरी कार उसकी बगल में आ चुकी थी l 

क्या उसे फिर उस नर्क में जाना होगा? सोचकर रिया काँप उठी l गुंडे उसके पीछे–पीछे गाड़ी में आ रहे थे और उसके हाल पर ठहाके लगा रहे थे l तभी एक बड़ा ट्रक रिया के बगल से निकला l रिया ने बेबसी के साथ गुंडों की तरफ देखा और ट्रक के नीचे छलांग लगा दी l ट्रक के पिछले पहियों ने उसे कुचल दिया और उसका निर्जीव शरीर ट्रक के साथ घिसटता रहा l

राहगीरों के शोर मचाने पर ट्रक रुका और ट्रक के चारो तरफ तमाशबीन इकट्ठा होने लगे l तब तक किसी ने पुलिस को फोन कर दिया l बीस मिनट बाद पुलिस के एक बड़े अधिकारी की गाड़ी वहां पंहुची, अधिकारी ने मृत लड़की को देखा और तमाशबीनो से बात करके एक फोन किया, वो किसी से कह रहा था— “राणा ये मामूली सुसाइड केस नहीं है l लोगो ने बताया लड़की के पीछे कुछ लोग थे, उन्हें पकड़ो l चौबीस घंटो में पता लगाओ कि इस परिघटना के पीछे कौन था? कोई भी बचना नहीं चाहिए l केस की प्रोग्रेस की रिपोर्ट मुझे हर घंटे चाहिए l”


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