मुकद्दर
मुकद्दर
आज रात भर रोहिणी को नींद नहीं आई उसके मन में खुशी के कारण खलबली सी हो रही थी। हो भी क्यों ना आज उसका रमन अमेरिका से वापस लौट रहा था।
पूरी रात वह अपने प्रियतम अपने प्रेमी और अपने दोस्त तथा बालसखा रमन के बारे में सोचती रही। रमन बचपन से ही उसका कितना ध्यान रखता था। यदि उसको जरा भी तकलीफ होती तो रमन को उस से 100 गुना ज्यादा तकलीफ होने लगती थी ।रमन के रहते कोई भी दूसरा बच्चा उसे परेशान करने की सोच भी नई सकता था शारीरिक रूप से सामान्य शक्ति का मालिक रहते हुए भी वह अपने से कहीं अधिक बड़े लडको से रोहणी के कारण भिड़ चुका था।खुद मार खा कर भी वह रोहणी को सबसे बचा कर रखता था।उसके रहते रोहणी अपने आपको उसी तरह सुरक्षित समझती थी जैसे की उसके मम्मी पापा के साथ रहने पर सुरक्षित महसूस करती थी।
पढ़ाई करने में यदि रोहिणी का कुछ काम कभी रह भी जाता तो पूरा होमवर्क करवाने की जिम्मेदारी रमन की ही रहती थी ।यदि उसे गणित समझ में नहीं आता था तो रमन उसे समझा देता था।किसी कारण यदि वह पढ़ाई करने में लेतलाली करती तो गुस्से से भरा रमन उसे तभी अपनी टेबल से उड़ने देता था जब वह अपना कार्य पूरा कर लेती थी।
रोहिणी का पढ़ाई में मन कम ही लगता था । वह बहुत होशियार भी नहीं थी।वह हमेशा यही मौका देखती रहती थी कि किस तरह से कुछ कमी छोड़ कर वह रमन को अपनी तरफ आकृष्ट कर सकती है ।रोहिणी की हर कमी को पूरा करने के लिए उसका पड़ोसी और उसका सच्चा दोस्त रमन हर पल उसके साथ खड़ा रहता था ।रमन पढ़ने लिखने में बेहद जहीन किस्म का इंसान था। एक बार पढ़ लेने के बाद जैसे उसके दिमाग में किताब की फोटो से खिंच जाती थी और जो भी उससे पूछो उसका जवाब वह फट से दे देता था ।उसकी इसी खूबी के कारण वह क्लास में सभी लोगों का चहेता था। बस उसकी एक ही कमी थी कि वह शारीरिक रूप से थोड़ा कमजोर था एक्सरसाइज और खेलकूद उसके जीवन के ज्यादा हिस्सा कभी भी नहीं बन पाए और परिणाम स्वरूप पढ़ाई लिखाई का श्रेष्ठ व्यक्ति रमन शक्ल सूरत से बेहद आकर्षक व्यक्तित्व वाला व्यक्ति होते हुए भी स्वास्थ्य की तरफ से एक सामान्य व्यक्ति ही था।
रमन के वैसे और कोई दोस्त नहीं थे। हां साथी जरूर बहुत सारे थे ।पर उसकी सच्चे हृदय से दोस्ती केवल रोहिणी से ही थी।
उसकी यही दोस्ती उम्र के साथ-साथ आकर्षण बनती गई। और प्रति पल सहारा पाते हुए रोहणी की दोस्ती उसकी तरफ से ही पूर्ण समर्पित प्यार में बदल गई। रोहिणी की स्थिति अब यह थी कि वह रमन के बिना रहने की कल्पना भी नहीं कर पाती थी ।उनका निश्चल निष्कपट प्रेम आत्माओं के स्तर का था उसमें स्वार्थ का कहीं नाम नहीं था।
कालेज के टूर के दौरान जब रोहिणी की तबीयत अत्याधिक थकान के कारण खराब हो गई थी तो रमन सारे संकोच और सारी मर्यादा भुला कर उसकी तीमारदारी में जुट गया था। जब रोहणी का बुखार उतरा ,
तो अपने पूर्ण समर्पित पागल प्रेमी के प्रति उसकी निष्ठा काफी हद तक बढ़ गई थी। अनजाने में ही उसने रमन को अपने ऊपर बिस्तर पर ही खींच लिया रमन कटी पतंग सा उसकी खुली बाहों में जा समाया। पहली बार उसने रमन को अपने सीने से चिपका कर उस पर ताबड़तोड़ चुंबनों की बरसात कर दी ।रमन उसकी भावनाओं को समझते हुए उसके साथ प्यार के अनंत ज्वार में बहता चला गया। बिना जमाने की चिंता किए हुए वह दोनों बेहिचक शारीरिक तौर पर पहली बार एक दूसरे के हो गए और अपने बीच की सारी दूरियां मिटा बैठे।
हालांकि रमन की चेहरे पर एक शर्मिंदगी का भाव था पर रोहणी को इस प्यार और समर्पण पर कतई भी न तो कोई ग्लानी थी और न ही दुख था। बल्कि उसे अपने संपूर्ण होने का सुख ही अनुभव हुआ था।
इसके बाद दो बार और उन दोनों का ऐसी ही एकांत और सुखमय परिस्थितियों में शारीरिक मिलन उनके जीवन की सुंदरतम यादगार पल बन गए थे।
तभी रमन का आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका में सिलेक्शन हो गया था और अपनी बेहतर भविष्य के लिए रमन उसे को दिलासा देकर अमेरिका चला गया था।
कुछ समय तक तो रमन की तरफ से रोहिणी को हमेशा ही काफी फोन आते रहते थे ।पर पिछले एक डेढ़ महीने से रमन की तरफ से अचानक ही फोन वगैरह आना एकदम काम हो गया था। इसका कारण क्या हो सकता है यही रोहिणी की चिंता थी ।रोहिणी अपनी तरफ से जब भी रमन को फोन करती,तो रमन उसकी उपेक्षा ही करता रहता था।
आज रमन अपनी पढ़ाई खत्म करके अमेरिका में अच्छी नौकरी पा चुका था और कुछ दिन के लिए वह भारत आ रहा था ।रोहिणी का मन इसी कारण बेहद प्रसन्न था।
लगभग सुबह के 8 बजे एक टैक्सी आकर रुकी और उसमें से रमन नीचे उतरा ।रोहिणी ने देखा रमन शारीरिक तौर पर बेहद कमजोर हो चुका था उसका शरीर पीला पड़ गया था और आंखें अंदर की तरफ धस रहीं थीं। आंखों के नीचे काले गड्ढे से पड़ गए थे।
रमन की निगाहें बरबस ही रोहणी को खोज रही थी। पर
आज रमन की तरफ से उसे अपने प्रति वह दीवानगी और जुनून नजर नहीं आया जिसे देखने की रोहणी को आदत हो चुकी थी।
रोहिणी को अनदेखा कर कर वह अपना सामान लेकर अपने घर के अंदर चला गया। भागती हुई रोहिणी उसके घर जा पहुंची और उसके मम्मी पापा के सामने ही उसने रमन को अपनी बाहों में भर लिया।
पर रमन की तरफ से उसे कोई उत्साह भरा प्रत्युत्तर नजर नहीं आया।रमन के इस अप्रत्याशित व्यवहार से रोहिणी अंदर तक आहत हो गई।
एक दिन इसी तरीके से गुजर गया रमन और रोहिणी के बीच में उनकी जिंदगी में शायद यह पहला अवसर था जब उनके बीच की दूरियां स्पष्ट नजर आ रही थी।
उन दोनों के मकानों की छत एक दूसरे से सटी हुई थी।शाम को जब रमन छत पर अकेला टहल रहा था तो अपने घर की छत से होकर रोहिणी रमन की छत पर चली आई और रमन के दोनों बाजू पकड़कर उसकी आंखों में झांकती हुई बोली।
" रमन ऐसा क्या हो गया!! मुझसे क्या गलती हुई है कि पिछले 1 महीने से तुम मुझसे ढंग से बात भी नहीं कर रहे हो !!!जब मैं तुम्हें फोन लगाती हूं तो तुम हां हूं मैं जवाब देकर फोन काट देते हो।"
रमन की आंखों का सूनापन और गहरा गया वह रोहिणी से हाथ छुड़ाकर छत की मुंडेर पर बैठ गया और कुछ नहीं बोला ।
लेकिन रोहिणी भी उसका पीछा छोड़ने वाली नहीं थी उसने रमन को बाहों में लेकर अपने होंठ उसके होठों की तरफ चुंबन लेने के लिए बढ़ा दिए।
व्याकुल होकर रमन ने उसको धक्का दे कर पीछे हटा दिया और आंखों में आंसू भरकर बोला।
"मैं अब इस योग्य नहीं रह गया हूं कि मैं तुम्हें प्यार कर सकूं! मुझसे अब तुम दूर ही रहना रोहिणी। इसी में तुम्हारा और मेरा दोनों का भला है!"
रोहिणी इस बात का अर्थ ना समझ सकी और उसने आगे बढ़कर रमन को अपनी बाहों में भर लिया।
रमन उसे बलपूर्वक अपने से दूर करते हुए बोला
"रोहिणी मुझे एचआईवी का इंफेक्शन हो चुका है! तुम मुझसे दूर ही रहो और मेरे सारे घर वाले भी मुझसे दूर रहें!! इसी में ही सबका भला है !!!आप सब खुश रहोगे तो मैं भी खुश रहूंगा !!!क्योंकि मुझसे यदि यह बीमारी मेरे किसी भी अपने को हो गई तो मैं अपने आप को शायद कभी क्षमा नहीं कर पाऊंगा और यही वजह थी कि मैंने तुमसे दूरी बना ली थी।"
रोहिणी को तो मानो ऐसा सुनकर सांप ही सूंघ गया ।
वह धम्म से छत की मुड़ेर से जा टकराई। रमन ने उसे बताया कि वहां अमेरिका में प्रवास के दौरान एक दिन पार्टी में उसे अनजाने में ही रोजी नाम की लड़की के सम्मोहन में फस गया था और उससे उसके शारीरिक संबंध बन गए थे। रोजी को एचआईवी था और यही एचआईवी अब उसके शरीर में आ गया था।
रोहिणी रमन की बात सुनकर एकदम सुन्न सी होकर रह गई ।
अगले दिन रोहिणी हॉस्पिटल चली गई वहां उसकी एक परिचित डॉक्टर एम्स में एचआईवी के केस ही देखती थी उससे उसने बात की।
उस डॉक्टर ने उसे बताया की एचआईवी होने के बाद भी रमन सामान्य जिंदगी जी सकता है और वैवाहिक जीवन भी जी सकता है। बस दो बातों का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी कि उसके साथ जब भी शारीरिक संबंध बनाए जाएं तो उसमें कंट्रासेप्टिव का प्रयोग किया जाए।
"पर इससे तो हमें कभी भी संतान की प्राप्ति भी नहीं हो पाएगी " आंखों में आंसू भर कर रोहिणी ने कहा।
डॉक्टर बोली" यदि तुम अपने प्यार को पाना चाहती हो तो तुम्हें कुछ ना कुछ तो खाना ही पड़ेगा! हां यदि तुम संतान भी चाहती हो तो उसके लिए टेस्ट ट्यूब बेबी की व्यवस्था है! इस तरह से तुम रमन के प्रति समर्पित रहकर भी बिना किसी दूसरे पुरुष की संपर्क में आए अपनी खुद की संतान भी प्राप्त कर सकती हो।"
अगले दिन रोहिणी ने जाकर रमन को सारी बात बता दी और अपने मां-बाप समाज और रिश्तेदारों के ,परवाह न करते हुए उसने रमन से विवाह कर लिया। वह रमन की धर्मपत्नी बन कर उसके साथ अमेरिका चली गई।
इस घटना को आज लगभग 10 साल बीत चुके हैं बाजार में उपलब्ध दवाओं के प्रभाव से रमन अमेरिका में सुखमय जिंदगी जी रहा है और रोहिणी कंधे से कंधा मिलाकर जीवन के पथ पर आगे बढ़ी जा रही है।
उसका 9 साल का एक बेटा भी है जो टेस्ट ट्यूब विधि से हुआ है। और एचआईवी के बावजूद भी उनकी जिंदगी सामान्य व्यक्तियों की तरह पटरी पर दौड़ रही है।
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