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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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मेरा आदर्श हिंदी ग्राम--संस्मरण

मेरा आदर्श हिंदी ग्राम--संस्मरण

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कहते हैं सोते समय जो सोचते हैं वही स्वप्न में आता है। और मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। कल मैं, मेरी मित्र से हुई बात को सोते समय सोच रही थी। उसका कहना था जब भी कवि सम्मेलन होता है। हिंदी, इंग्लिश और हिंग्लिश में कविताएं बोली जाती हैं। इंग्लिश में कविता कहने वाले बहुत ही गर्व से कहते हैं। हमें हिंदी नहीं आती अतः आप इंग्लिश में अपनी कविता का अर्थ समझा दीजिए। लेकिन जब इंग्लिश की कविता हमें समझ में नहीं आती तो उन्हें अर्थ बताने के लिए कहने पर हमें झिझक महसूस होती है और अगर हिम्मत कर हम कह भी देते हैं तो उन लोगों के व्यंगात्मक चेहरों का सामना करना पड़ता है। जाने अनजाने हीन भावना का प्रवेश हो रहा है। इन बातों को सोचते-सोचते जाने कब आंखें लगी पता ही नहीं चला।

लेकिन जब सुबह उठी बहुत ही तरोताजा महसूस हुआ क्योंकि, मैं अपने आदर्श गांव की सपने में चित्रकारी कर चुकी थी। बस उसे मूर्त रूप देना बाकी था। ऐसा गांव जिसका नाम लेते ही गर्व से सीना फूल जाए। ऐसा गांव जहां अपनों को अपनों पर गर्व हो। जहां दूसरी भाषाओं का सम्मान तो हो लेकिन वे सिर चढ़कर न बोले। गांव के प्रवेश द्वार पर पहुंचते ही हरियाली ने स्वागत किया। अनुशासित जीवन, सूर्योदय के साथ ही योगा, प्रतिभाएं निखारते बच्चे, बड़े। आधुनिक तकनीक से सुसज्जित लेकिन प्रदूषण रहित। सभी साइकिल से अपने दूरियां तय करते हुए, खेतों में फसलें लहलहा ती, कोई मजहब से परिचित नहीं। सभी इंसान थे और इंसानों की तरह ही रह रहे थे। हर घर में री-सायकल प्लांट, घर की बिजली घर में ही उत्पन्न करना, हर क्षेत्र में समृद्ध गांव,फर्राटेदार शुद्ध हिंदी साथ ही अन्य भाषाओं का भी ज्ञान और ज्ञान भी ऐसा कि अहिंदी भाषी भी हिंदी न आने पर शर्म से पानी -पानी हो जाए और हिंदी सीखने पर मजबूर हो जाए।बच्चों का सर्वांगीण विकास। हिंदी पर और भारतीय संस्कृति पर नाज। तकनीकी ज्ञान भी ऐसा कि चाहे वह आईआईटी हो या एनआईटी हो या सीए किसी भी परीक्षा को पास करना बच्चों के लिए बाएं हाथ का खेल। इस गांव में तकनीक मनुष्य की दास है लेकिन मनुष्य तकनीक का दास नहीं।

व्याधियाँ तो इस गांव में ऐसे आती हैं जैसे कि कोई दूर देश का रिश्तेदार 2-3 साल में एक बार आता है वह भी सिर्फ 3-4 दिन के लिए। ऐसा गांव जहां से लोग शहर नहीं वरन शहर के लोग गांव आना चाहते हैं। मुझे मेरा आदर्श गांव वैदिक युग और आधुनिक ज्ञान का सम्मिश्रण लगा।


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