Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Abstract


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Vijay Kumar उपनाम "साखी"

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मौक़ापरस्त दोस्त

मौक़ापरस्त दोस्त

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हाथीपुर गांव में दो दोस्त मोनू और सोनू रहते थे। मोनू एक सरल ह्रदय का व्यक्ति था। वह सोनू को अपना जिगरी दोस्त मानता था। वहीं सोनू, मोनू का फायदा उठाता रहता था। वह मोनू का धोखेबाज दोस्त था। वह उसे दुनियादारी में बेवकूफ़ समझता था। उसी गांव में रानू नाम का एक युवक रहता था।

वह केवल मोनू का दोस्त था। उसकी नज़र में सोनू एक मौकापरस्त घटिया इंसान था। रानू को दुनियादारी का खासा अनुभव था। वह मोनू को समझाता रहता देख दोस्त, सोनू अच्छा आदमी नही है। वह तेरी दोस्ती के क़ाबिल नही है। सोनू एक स्वार्थी इंसान है। इस पर मोनू, रानू को कहता देख दोस्त यदि मैंने सोनू को दिल से सच्चा दोस्त माना है तो इसकी सारी बुराइयों को में दूर कर दूंगा और अपनी सारी अच्छाइयां इसके अंदर भर दूँगा।

रानू कहता है ठीक है मोनू जैसी तेरी इच्छा तुझे ठोकर लगने के बाद ही मेरी बात समझ आयेगी। उधर सोनू, मोनू का हरपल फ़ायदा उठाने में ही रहता। मोनू दोस्ती में 100, 50 रुपये का ज्ञान नही लगाता था। खेती में हर बार मोनू के सोनू से 3, 4 बोरी ज़्यादा होती थी। पर सोनू के कहने पर वह दोस्ती के ख़ातिर 1, 2 बोरी सोनू को यूँही दे देता जिससे दोनों के अनाज की बोरी बराबर हो जाये। उधर सोनू, मोनू की निस्वार्थ दोस्ती को उसकी बेवकूफी समझता।

समय-समय पर सोनू, मोनू का फ़ायदा उठाता रहता था। एक बार मोनू अनाज का ट्रैक्टर लेकर उसे बेचने के लिये शहर की तरफ़ जा रहा था।

दुर्भाग्यवश मोनू दुर्घटना का शिकार हो गया। सामने से एक गाय को बचाने के चक्कर मे मोनू का ट्रैक्टर एक पेड़ से टकरा गया और वो बेहोश हो गया। उधर से ही शहर से मोनू का दोस्त रानू आ रहा था। मोनू का ट्रैक्टर देखकर वो पास गया, मोनू को बेहोश देखकर उसके होश उड़ गये।

वो आनन-फानन में मोनू अस्पताल ले गया। कुछ समय बाद मोनू को होश आया। जब मोनू के दोस्त सोनू को पता चला तो वो भी अस्पताल मगरमच्छ के आंसू बहाते हुए आया, हाय मेरे दोस्त तुझे क्या हो गया, तेरी जगह ख़ास मेरा एक्सीडेंट हो जाता। पास में मोनू के साथ रानू बैठा हुआ था, उसे सोनू का ये दिखावा अच्छा नही लग रहा था। उसके दिमाग मे एक योजना आई, रानू ने सोचा, आज अच्छा मौका है, मोनू के दिमाग से सोनू का चश्मा उतारने का। उसने धीरे से मोनू के कान में कहा, तू सोनू को कह डॉक्टर ने कहा है की उसके ह्रदय में ब्लॉकेज है, अतःउसका ऑपरेशन करना पड़ेगा, उसके लिये 2 लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी। मेरे दोस्त सोनू मुझे तू पचास हज़ार की ही मदद कर देना, बाकी रुपये तो मेरे पास है। ये बात जब मोनू ने सोनू को कही तो वो बगले झांकने लगा, वो बोला मित्र पैसे तो नहीं है।

मोनू बोला अभी तो तेरे भी 100 बोरी अनाज की हुई है फिर तू मना क्यों कर रहा है। सोनू बोला मित्र अनाज तो कल तक गोदाम में ही रखा था। पर आज सुबह जाकर मैंने देखा तो पता चला सारा अनाज चूहे खा गये है। मोनू समझ गया था सोनू सरासर झूठ बोल रहा है।

मोनू को बड़ा अफ़सोस हुआ, उसकी आँखो में आंसू आ गये। जिस दोस्त को उसने भाई से ज्यादा माना, आज वो ही उसके साथ दगा कर रहा है। मोनू बोला मित्र कोई बात नही में कोई और व्यवस्था कर लूंगा। मोनू, रानू के गले लगकर फुट-फ़ूटकर रो रहा था। मोनू बोला मित्र तू सही था, मैंने एक मौक़ापरस्त इंसान को अपना दोस्त बना रखा था। पर मित्र रानू इसको एकदिन सबक जरूर सिखाऊंगा। कुछ साल ऐसे ही निकल गये।

मोनू ने सोनू को ज़रा भी भनक नही लगने दी की वो उसे सबक सिखाना चाहता है। मोनू, सोनू के साथ पहले जैसे ही मधुर व्यवहार रखता रहा। एक साल भयंकर काल पड़ा। सोनू की आर्थिक स्थिति बहुत बिगड़ गई। मोनू के आर्थिक स्थिति उस समय भी अच्छी थी। सोनू, मोनू के पास आया, मित्र इस समय मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी नही है। घर पर दो वक्त की रोटी के ही लाले पड़ रहे है। कृपया मित्र मोनू मेरी मदद कर।

मोनू बोला मित्र सोनू में तेरी मदद कर देता। पर आज सुबह जब में गोदाम गया तो पता चला, सारा अनाज तो चींटियाँ ले गई है। सोनू को पता था मोनू झूठ बोल रहा था पर वह कर ही क्या सकता था क्योंकि उसने भी झूठ बोला था की 100 बोरी अनाज को चूहे खा गये थे। अब उसे नहले पर दहला मिल गया था। वह चुपचाप गर्दन नीची करके वहां से चला गया था। सोनू को मौक़ापरस्त होने की क्या ख़ूब सज़ा मोनू ने दी।


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