Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Inspirational


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Vijay Kumar उपनाम "साखी"

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खुदा की नज़र

खुदा की नज़र

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मोतीनगर मे कालू, मोनू और टोनू नाम के तीन दोस्त रहते थे। कालू एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता था। मोनू बचपन से बेहद गरीब था। उसके मां की मृत्यु भूख से हो गई थी। पर वर्तमान में वह रईसी की जिंदगी जी रहा था। लोग कहते थे की वो दो नम्बर से अमीर बना था। टोनू बचपन से बेहद अमीर था। टोनू का व्यवहार सबसे ज़्यादा ख़राब था।  

जैसे-जैसे समय निकलता गया टोनू का व्यवहार और ख़राब होता गया।

कालू एक नेक दिल इंसान था। पर उसकी एक बहुत बुरी आदत थी। वह एक नम्बर का पक्का जुआरी था। इस एक अवगुण के अलावा कालू में ढेर सारे गुण थे। वह जरूरतमंद लोगो की मदद किया करता था। पर उससे भी महत्वपूर्ण बात यह थी की वह नेक कार्य करता था परन्तु स्वयं के अलावा किसी को पता नही चलने देता था। वह गरीब मजलूमों के यहां चुपके से अनाज की बोरियां रख देता और उनको पता भी नही चलने देता था।

ऐसे ही वक्त गुजर रहा था की एकदिन कालू के साथ बहुत बुरी घटना हो गई। वह जुए मे सब हार गया था। उसके पास अब एक फूटी कोड़ी भी नही बची थी। वह अपने दोस्त टोनू के पास गया परन्तु टोनू ने उसे दुत्कार भगा दिया।

बेचारा कालू अब दर-दर का भिखारी हो गया था। वह गांव के मंदिर के बाहर भीख मांगकर गुजारा करने लगा। कुछ समय बाद उसे कोढ़ हो गया। सब लोग कहते थे यह तो पापी है, इस कारण इसे कोढ़ हो गया है। रोज कोई न कोई उसे पत्थर मारता, धीरे-धीरे कालू और ज्यादा बीमार रहने लगा। कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई। लोगो को कालू की नेकी के बारे में पता नही था, लोग उसकी मृत्यु होने पर उसका उपहास उड़ा रहे थे औऱ कहते थे चलो मोतीनगर में एक पापी कम हुआ।

इधर मोनू दो नम्बर के पैसों से गरीबो की मदद करता था। उसका मानना था, मेरी माँ भूख से मरी है, पर अब से कोई मेरे आसपास भूख से नही मरेगा। वह अमीरों को लूटता और उस पैसे को मजलूमों में बांट देता था। मोनू की सबसे बड़ी ख़ासियत यह थी की वह नेकी का काम करता, पर वह उसमे अपना नाम नही बताता था। वह जिन भी लोगो की मदद करता था, वह उनके किसी रिश्तेदार का नाम बता देता था। मोनू का मानना था, लोगो को जब पता चलेगा वह मदद करता है, तो लोग उसे कुछ समय याद रखेंगे, परन्तु जब कोई उनका अपना मदद करेगा तो लोग उसे जिंदगीभर याद रखेंगे और उसे दुआएं देंगे। इससे उनका और उनके रिश्तेदारों में आपसी प्रेम और गाढ़ होगस। ऐसे ही अच्छा समय चल रहा था की एकदिन पुलिस मुठभेड़ में मोनू की मृत्यु हो गई। लोगो को मोनू की अच्छाई के बारे में पता नही था। मोनू की लाश बहुत दिनों तक लावारिश पड़ी रही। फिर एकदिन एकभले आदमी ने उसका अंतिम सँस्कार किया था।

इधर टोनू बाहर से अच्छा दिखने का नाटक करता था। उसके परिवार में उसके अलावा सभी अच्छे लोग थे। टोनू दिखावे के लिये लोगो से मीठा बोलता, पीछे से उनकी पीठ में छूरा घोपता था। साल में एकबार वो अपने जन्मदिन पर गरीब लोगों को भोजन कराता था और इस चीज को बढ़ा-चढ़ाकर बताता था। पीछे से वह लोगो का बहुत बुरा करता था। कभी वह रात को चोरी से गरीबों की झोपड़ी में आग लगा देता। कभी वह गरीबों को कटी हुई फसलो को चुपके से जला देता था। फिर गरीबो को मोटे सूद पर पैसा देता था। उसे ऐसा करने में बड़ा मजा आता था। फिर भी लोगो की नज़रो में वह हीरो था। क्योंकि लोगो को उसकी बुराइयों के बारे में पता नही था। ऐसे ही समय निकलता गया। एकदिन टोनू शहर की ओर जा रहा था की अचानक सामने से एक ट्रक आया। टोनू की गाड़ी के उसने टक्कर लगा दी, टोनू की मौके पर ही मृत्यु हो गई। कालू, मोनू और टोनू तीनों मरने के बाद खुदा के पास पहुंचे। ख़ुदा ने पूंछा तुम तीनो में सबसे बड़ा पापी कौन है। कालू, मोनू एक साथ बोले हे!मालिक हम दोनों सबसे बड़े पापी है, इतने में टोनू बोला हां, परमात्मा ये दोनों बहुत बड़े पापी है, में तो एक पुण्यात्मा हूं, ये दोनों दुरात्मा है, इन दोनों को कठोर से कठोर सजा दो। ख़ुदा बोले नही, ये दुनिया की नजर में पापी है, मेरी नज़र में ये दोनों बहुत ही नेक इंसान है, तुम दोनों जन्नत में जाओगे। ख़ुदा ने एक प्रकाश पुंज की ओर इशारा किया, मेरे प्रिय बेटे कालू और मोनू ये जन्नत का रास्ता है, तुम दोनों जन्नत जाओ। टोनू तुम एक दुष्ट आत्मा हो, लोगो की नज़र में तुम भले ही अच्छे हो, पर मेरी नज़र में तुम एक शैतान हो, तुम गहरे अंधेरे की तरफ़ जहां दोज़ख़ है, वहां जाओ और वहां की आग में जलो।

फिर ख़ुदा कहते है, इंसान उच्च कुल में पैदा होने से बड़ा नही बनता है अपितु अपने उच्च कर्मो से बड़ा बनता है। कोई दुनिया की नज़र में कितना ही अच्छा हो, गर वो ख़ुदा की नज़र में बुरा है तो उसका अंत बुरा होगा। इसलिये खुदा की नज़र में अच्छा बनो लोगो की नज़र में नही।

खुदा का वो सबसे प्यारा बन्दा है।

जो निःस्वार्थता का करता धंधा है।


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