Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Tragedy


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Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Tragedy


पछतावा

पछतावा

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राहुल और मोनिका दोनों पति-पत्नी थे। दोनों में बहुत प्रेम था। पर राहुल में एक बहुत बड़ा अवगुण था वो था,उसका गुस्सा। उसे छोटी-छोटी बातों पर बहुत क्रोध आता था और क्रोध करते वक्त उसे ज़रा सा भी भान नही रहता था की वह क्या बोल रहा है और क्या कर रहा है। क्रोध शांत होने पर उसे बहुत पछतावा भी होता औऱ वह अपनी पत्नी जल्द माफ़ी भी मांग लेता था। पर ऐसा कुछ दिन ही रहता था। कुछ समय बाद वह वापिस छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लग जाता था। उसकी पत्नी उसकी इस हरक़त से बहुत परेशान थी,वह कहती आपका गुस्सा कुछ पल ही रहता है,परन्तु आस-पड़ोस के लोग यह नही जानते है वो बाद में तरह-तरह की बाते बनाते है। इससे आपकी ही इज्ज़त उनकी नज़रो में कम होगी। वो आपकी क़द्र करना बंद कर देंगे। राहुल पर कुछ वक्त तो पत्नी की बातों का असर रहता,

पर कुछ दिन बाद वापिस उसकी वही स्थिति हो जाती थी। वो क्रोध मे प्यारा राहुल न होकर राक्षस राहुल हो जाता था। ऐसा करते-करते 10 वर्ष बीत गये थे। परन्तु राहुल की हरकतों में कोई सुधार नही आया था। अब तो राहुल के बच्चे भी उसके गुस्से से डरने लगे थे

वो भी राहुल के पास से आने से कतराने लगे थे। एकदिन तो हद ही हो गई थी,राहुल ने क्रोध में अपनी पत्नी को बहुत बुरा भला कहा,दोनों में उसदिन बहुत तू-तू में में हुई। आज तो राहुल की बुरी बाते सुनकर मोनिका को भी बहुत गुस्सा आ गया था।

मोनिका अक्सर राहुल के क्रोध रूपी आग पर पानी डालने का कार्य करती थी,जिससे उनकी लड़ाई ख़त्म हो जाती थी। परन्तु आज ऐसा नही हो रहा था। राहुल के गुस्से में आज उसकी पत्नी का गुस्सा,आग में घी डालने का काम कर रहा था। राहुल ने मोनिका पर हाथ उठाया,मोनिका रोने लगी औऱ बहुत देर तक रोती रही। मोनिका को देख उसके बच्चे भी रोने लगे।

अगले दिन मोनिका रूठकर अपने मायके आ गई।

राहुल बाद में बहुत दुःखी हुआ। उसने मोनिका के बहुत फोन लगाया, पर मोनिका ने फोन ही नही उठाया।

इससे राहुल औऱ ज्यादा दुःखी और क्रोधित भी हुआ। मोनिका को गये हुए पूरा एक सप्ताह बीत गया था।

एकदिन राहुल ऑफिस जा रहा था तो उसने देखा एक आदमी रास्ते मे पत्थर से ठोकर खाकर गिर गया था,वो और कोई नही उसका दोस्त कालू था। वो भी उसकी तरह ग़ुस्सेल शख़्स था। कालू वापिस उठा उसे उस पत्थर पर बहुत गुस्सा आया उसने उसे बहुत ज़ोर से लात मारी। वो पत्थर था कोई फूल नही,उल्टी उसके और ज्यादा चोट लग गई। उसका दांया पैर फैक्चर हो जाता है। राहुल दूर से उसकी बेवकूफ़ी और गुस्से पर हंसता है। परन्तु रास्ते में चलते वक्त मन मे सोचता है,उसमे और कालू में कौनसा अंतर वो भी क्रोधी है और में भी।

ऐसा सोचते-सोचते वो ऑफिस आ जाता है। पर वहां पर देखता है,वहां पर सन्नाटा छाया हुआ है। स्टाफ के साथी उसे बताते है ऑफिस के चपड़ासी राजू औऱ उसकी पत्नी में कल झगड़ा हुआ था। राजू ने क्रोध में आकर खुद को और पत्नी को आग लगा दी। दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। हम सब उसकी मौत पर दुःखी है क्योंकि वो एक अच्छा आदमी था। उसकी एक कमी ने उसे और उसकी पत्नी को खत्म कर दिया था। राहुल ध्यान से उनकी बाते सुन रहा था। वो रात भर दिन की दोनों घटनाओं को सोचता रहा। अगले दिन राहुल ऑफिस से छुट्टी लेकर अपने ससुराल जाता है। वो रात वही रुकता है, जब सब सो जाते है वो अपनी पत्नी से बात करता है, पर उसकी पत्नी दूसरी तरफ़ मुँह फेर लेती है। राहुल उसे एक गुलाब का फूल देता है औऱ प्यार से कहता है,प्लीज़ मोनू मुझे माफ कर दे। में क्रोध का परिणाम देख चुका हूं। मेरे स्टाफ के चपड़ासी और दोस्त कालू की क्रोध की घटनाओं से में स्तब्ध हूं। वह विस्तार से कल हुई घटनाओ को बताता है।  

इस क्रोध रूपी दैत्य का विनाश देख चुका हूं।

क्रोध एक ऐसी आग है जिसमे सामने वाले से ज्यादा आदमी ख़ुद जलता है। यह एक ऐसा राक्षस है जो आदमी के विवेक को खत्म कर देता है। क्या अच्छा है,क्या बुरा है वो भूल जाता है। क्रोध शांत होने के बाद रहती है तो सिर्फ़ राख और पछतावा। क्रोध वो दैत्य है जो हमारी सब अच्छाइयों को निगल जाता है।

क्रोध खत्म करने का एक ही उपाय है,जब भी आपको क्रोध आये दो मिनट का मौन ले और क्रोध वाली जगह को त्याग दे। फिर देखना चमत्कार कुछ देर में ही ये खत्म हो जायेगा। धैर्य रूपी अस्त्र से बड़े से बड़ा क्रोध रूपी दानव खत्म किया जा सकता है। मोनिका,राहुल की बाते सुन रही थी,अब उसकी सारी नाराजगी दूर हो चुकी थी। क्योकि पछतावे रूपी निर्मल से जल से उसकी आत्मा स्वच्छ हो चुकी थी। उसे आज क्रोधी राहुल नही,अपना पति राहुल मिल चुका था।

अगले दिन वह हंसी खुशी राहुल के साथ अपने घर आ जाती है।


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