मां से बड़ा कोई गुरु नहीं
मां से बड़ा कोई गुरु नहीं
मोहिनी बहुत ही सुलझी हुई औरत है। उसके दो बच्चे एक लड़का और एक लड़की है। वह सोचती कि घर में हम बच्चों को सुरक्षित वातावरण तो दे देते हैं। पर उसे बेटी को स्कूल दूर भेजने की चिंता थी। बेटी निधि अभी बाहरी दुनिया से अनजान थी। उसकी नजर में बेटी नादान है।पर समाज में ऐसी ओछी सोच के भी लोग मौजूद होते हैं कब क्या कर जाए। कोई भरोसा नहीं होता।
उसे लगता कि बेटी को सही ग़लत के बारे में बताएं पर पति कहते कि तुम उसकी मां हो तुम ही उसे सही ग़लत के बारे में समझाओ। उसे हमेशा आगे ही बढ़ना है, घर से बाहर अकेले तो निकलना ही पड़ेगा।
उसने अपनी बेटी को समझाया कि बेटी दुनिया में भिन्न भिन्न प्रकार के लोग हैं ,हमें उनसे बचकर नजरें और नजरिया पहचान कर आगे बढ़ना है। मैं चाहती हूं कि तुम ऐसी परिस्थिति से न गुजरो जिससे मैं गुजरी। इसलिए एक बात बताती हूं।
एक बार की बात है कि मैं आटो से घर जा रही थी पर आटो वाले ने लंबा रास्ता घर पहुंचाने के लिए ले लिया। उसकी नियत साफ़ नहीं थी। यह बात मेरे कालेज के समय की है। मैंने आटो वाले को पूछा भी भैया इस रास्ते से क्यों ले जा रहे हो? उसने कहा ये पास वाला रास्ता है।जबकि एक दो जगह लोगों ने उसे रोका भी पर वह नहीं रुका नहीं,इस तरह मैं उसके इरादे भांप चुकी थी। तो मैंने तुरंत रोकने कहा पर वह नहीं रुका तब पुलिस हेल्प लाइन में मैसेज किया, और मां पापा को मैसेज किया कि वह पुलिस को फोन करें तभी पुलिस वालों ने मेरा नंबर ट्रेस किया और पीछा किया इस तरह आटो वाला पकड़ा गया।
तभी से मुझमें आत्मविश्वास आ गया कि हम अपने आपको कभी कमजोर नहीं समझे।
वह जहां जाती तो अपनी बेटी को समझाती लोगों की सोच आज भी नहीं बदली है।बाहर जाओ तो अजनबियों से सावधान रहो। उनको बाहर से देखने में कुछ समझ नहीं आता है।
वह हमेशा चाहती है कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ो और मुसीबत के समय पहले से सावधान रहो। वह हमेशा कहती कि बिट्टू तुम हेल्प लाइन नंबर सेव रखो।और मिर्च पाउडर भी साथ रखो।वह कहती कि कहीं भी आने-जाने में अकेले जब सफर करो तो दिमाग खुला रखो। क्योंकि दसवीं कक्षा में पास होने के बाद बेटी को नये स्कूल में अब एडमिशन करा दिया था।
उसे कभी बस से स्कूल जाना होता, कभी आटो से,इस तरह हिदायतें सुनते ही उसकी बेटी परेशान होकर कहती कि" मम्मी अब मैं तो समझदार हो गई हूं।आप बेफिक्र रहिए। "
लेकिन एक दिन उसने देखा कि कुछ मनचले लड़के लड़कियों को धक्का मुक्की करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। तब उसे एहसास हुआ कि मम्मी सही कहती हैं हमें ऐसे लोगों से सावधान होने की जरूरत है। जब घर वह आई तो उसने अपनी मम्मी से पूरी बात बताई कि कुछ लड़के जानबूझकर कैसे धक्का देकर आगे बढ़ते हैं और वे ऐसे भोले बनते हैं कि कुछ किया ही न हो। तभी मम्मी ने कहा कि मैं इसीलिए निधि तुम्हें समझाती रहती हूं।
कुछ दिन बाद उसने अपनी बेटी को स्कूटी दिला दी। ताकि अपने हिसाब स्कूल जा सके। अब बेटी भी खुश, वह भी संतुष्ट हुई। उसके साथ उसकी सहेली भी जाती ।क्योंकि स्कूल दूर था पर अच्छे स्कूल में एडमिशन कराना था। इस तरह मम्मी के समझाने के कारण निधि का नजरिया बदल गया।वह समझ गई कि आगे बढ़ने के साथ समझदारी से लोगों के प्रति नजरिया उसका कैसा होना चाहिए। ताकि विपरीत परिस्थितियों में सामना कर सके।
हमें अपने बच्चों की जिम्मेदारी निभाने के साथ सावधानी रखनी भी सिखानी जरुरी होती है। ताकि वे विपरीत परिस्थितियों में मुश्किलों का सामना कर सके।
दोस्तों - आज बेटी- बेटा के प्रति नजरिया तो बदला है, पर समाज में बेटियां आज भी सुरक्षित नहीं है। उन्हें हमें ही संभालने की जिम्मेदारी निभानी होगी। ताकि हमारी बेटियां स्वतंत्र होकर अपनी जिंदगी जी सके। और अपनी पहचान बना सके।
