माँ! दीदी को भी तैयार कर दो ना
माँ! दीदी को भी तैयार कर दो ना
"मम्मी! मेरे साथ शानू दीदी को भी तैयार कर दो ना आप। देखो तो वह खुद अपनी कैसी चोटी बना रही है!"
सोनाक्षी ने उमा से कहा तो उमा ने शानवी की तरफ उपेक्षा से देखते हुए कहा,
"कर दूँगी... बाबा... कर दूँगी। तेरी शानू दीदी को भी तैयार कर दूँगी। पहले अपनी गोरी चिट्टी इस गुड़िया रानी को तो तैयार कर दूँ!"
पहले उसे अच्छे से तैयार करके फिर शानवी को तैयार किया।
और उसे हिदायत भी देती जा रही थी कि,
" वहाँ ज़्यादा मस्ती मत करना और ऐसा करना कि तुम भी दादा दादी के साथ जल्दी ही लौट आना। जब वह लोग ज्यादा जिद करेंगे तो कहना है कि, तुम्हें पढ़ाई करनी है इसलिए जल्दी घर जाना चाहती हूं!"
हमेशा से चुपचाप रहने वाली शानवी ने अपनी मां की बात सुनकर सिर हिला दिया। जैसे हामी भर रही हो कि मम्मी वहां आपकी बेइज्जती कराने के लिए मैं ज्यादा देर तक नहीं रुकूंगी। जल्दी चली आऊँगी। आप इसकी फिकर मत करें!"
यह कोई आज नई बात नहीं थी। बचपन से ही उमा अपनी दोनों बेटियों में भेदभाव करती आई थी। बड़ी बेटी शानवी का कुछ रंग दबा हुआ था। और नाक नक्श भी अपने पिता प्रदीप जैसा लेकर आई थी।जबकि छोटी बेटी सोनाक्षी एकदम गोरी चिट्टी और तीखे नाक नक्श लेकर आई थी और बड़ी सुंदर लगती थी।
उमा सब जगह छोटी बेटी को ही ले जाना चाहती थी। तो सब उसकी इस रंग रूप की तारीफ करते तो गर्व से भर जाती थी।
इधर बड़ी बेटी शानवी को अपने साथ ले जाते हुए उमा संकोच भर जाती।
अकसर शानवी को देखकर उमा की सहेलियां कह उठती कि,
"उमा! यकीन नहीं आता कि शानवी तेरी बेटी है। कहां तू तू इतनी सुंदर और कहां यह काली सी। और नाक नक्श भी कुछ खास नहीं है। जबकि सोनाक्षी को देखो, बिलकुल तुम पर गई है !"
यह सब सुनकर उमा को बहुत बुरा लगता। और
इसलिए वह दोनों बेटियों में भेदभाव करने लगी थी।
छोटी बेटी सोनाक्षी को को सजा धजा कर रखती और बड़ी बेटी शानवी को उपेक्षित रखा करती थी।
कभी कभी एक माँ भी जाने अनजाने में बेटियों से भेदभाव कर जाती है ।
उमा भी यही गलती कर रही थी और इससे शानवी का दिल बहुत दुखता था।
वह ऐसा करते हुए ज़रा भी नहीं सोचती थी कि शानवी के दिल पर क्या गुजर रही होगी।
उन्हीं दिनों उमा की सास भी आई हुई थी उन्होंने जब उमा को ऐसा कहते सुना तो उसे समझाया,
कि....
"बहू! तुम दोनों बेटियों में भेदभाव मत करो। रंग रूप तो भगवान की देन है। तुम अगर सिर्फ एक ही बेटी को प्यार करोगी तो शानवी में हीन भावना आ जायेगी।
और....अगर तुम उसे भी बराबर प्यार दोगी तो वह भी आत्मविश्वास से भर उठेगी और उसके गुणों की भी चर्चा होगी!"
अब उमा को भी अपनी गलती का एहसास हुआ।
उसने सोनाक्षी के साथ शानवी को भी को अच्छे से तैयार किया।
और उस दिन पार्टी में सब सोनाक्षी की रूप की तो तारीफ कर ही रहे थे साथ ही शानवी के इंटेलिजेंस और उसके गुणों की भी चर्चा हो रही थी।
अब उमा समझ गई थी कि हर बच्चे में अलग-अलग गुण होता है। सिर्फ सुंदर हो ना ही कभी किसी बच्चे की काबिलियत नहीं हो सकता।
(समाप्त)
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