STORYMIRROR

Vimla Jain

Tragedy Action Inspirational

4  

Vimla Jain

Tragedy Action Inspirational

लड़की पर इमोशनल अत्याचार

लड़की पर इमोशनल अत्याचार

12 mins
395

घर में बहुत चहल-पहल चल रही थी।

 मां बाबूजी कमरे के अंदर और एक मनु चाचा जी कमरे में अंदर आ जा रहे थे।

 कमरा अंदर से बंद था। रिचा कॉलेज से घर आई उसने देखा दोनों बहनें बाहर बैठी हैं ।

बाहर और लोगों की चहल-पहल है।

 उसने आते ही पूछा मां बाबूजी कहां है ।

उसकी मां सौतेली थी और उसकी दो बहने सौतेली थी।

 वह बड़ी थी थोड़े से पक्के रंग की थी।

 उसकी शादी की बहुत जगह पर बात करते थे मगर बात बन नहीं रही थी। 

2 साल से वह लोग तलाश कर रहे थे ।

और अचानक ही घर आकर बोला की शादी तय कर दी है ।

कल शादी है ।

और मेहमानों को भी बुला लिया था ।

वह तो कॉलेज गई हुई थी उसको कुछ पता नहीं था ।

वह शोध कर रही थी। पीएचडी का आखिरी साल चल रहा था।

 थोड़े दिनों में परीक्षा होने वाली थी। 

उसने घर में इतने लोगों को देखा तो पूछा क्या बात है दोनों बहने चहक कर बोली दीदी आपकी शादी तय हो गई है।

वह बोली ऐसे कैसे तय हो गई है।

 मैंने तो लड़के को भी नहीं देखा है।

 ऐसे कैसे तय हो गई। थोड़ी देर में उसके पिताजी बाहर आए बोले बहुत मुश्किल से रिश्ता मिला है।

 मैं लड़का और घर देख लिया है सब अच्छा है। और वे लोग कल ही शादी चाहते हैं।

 इसलिए मैंने रिश्तेदारों को बुला लिया है कल तुम्हारी शादी है वह तो जैसे आसमान से जमीन पर गिर पड़ी। उसको लगा दाल में कुछ काला है।

 बहुत कहा उसकी मां ने आकर उसको डांट दिया बहुत मुश्किल से तो तुम्हारी शादी तय हुई तुम्हारे पक्के रंग के कारण तुम्हारी शादी कहीं हो नहीं रही थी और अब तुम इसके अंदर भी ना नुकुर कर रही हो लड़का देखने की बात कर रही हो।

 मैं कह रही हूं करो

 यह शादी तो होकर रहेगी।

 पापा के ऊपर विश्वास करो ।

अगर तुम शादी नहीं करोगी तो पीछे की दोनों बहनों की शादी कैसे होगी।

 उसने अपने पिता की तरफ देखा मगर कहते हैं ना जब मां मर जाती है तो पिता भी सौतेला हो जाता है।

यहां पर भी वही हाल था वह भी सौतेला जैसा ही व्यवहार करता था।

उसने डांट कर और प्यार से उसको समझाया कि तुमको शादी तो करनी ही पड़ेगी।

 अब शादी कब के लिए मना करोगी तो हमारी इज्जत का क्या होगा हमारी इज्जत का तो ख्याल रखो ।

मरती क्या ना करती। भावनाओं में बह गई दूसरे दिन रिचा की शादी हो गई।

शादी के थोड़ी देर पहले भी उसने देखा कमरा अंदर से बंद है।

 मगर खिड़की थोड़ी सी खुली है उसने देखा उसके पापा जी बहुत सारे नोटों की गड्डियां गिन रहे थे दो ₹2000 की गड्डियां थी और बहुत सारी थी।

 उसका माथा ठनका कि मेरे पिता के पास तो इतना पैसा ही नहीं है। यह पैसा कहां से लाएं। मगर बेचारी क्या करती मजबूरी में शादी करनी पड़ी ।

शादी करके ससुराल गई वहां भी उसको कोई हंसी उल्लास वाला कोई खुशी का माहौल नहीं दिखा ।

उसने देखा ठंडा ठंडा सा व्यवहार था।

 उसकी सास ने उसकी नौकरानी को बोला इसको कमरे में ले जाओ।

 कमरा थोड़ा सजा हुआ था।

 कपड़े बदलने के बाद उसने सोचा बाहर जाकर के खाना खा लेती हूं सबके साथ बैठती हूं।

 मगर उसकी सास ने उसको बोला  कमरे में खाना आएगा खाना खा लेना।

 नाश्ता कमरे में आएगा कमरे में नाश्ता कर लेना।

 बाहर सबके साथ बैठने की जरूरत नहीं है।

 रिचा बड़ी हैरान हुई उसने देखा अभी तक उसका पति भी नहीं आया है।

 सुबह से रात हो गई रात को 2:00 बजे तक इंतजार करते-करते सो गई।

देर रात को उसका पति विनोद घर आया उसने उसको सोता देखा और चैन की सांस ली।

सुबह उठते ही तैयार होकर के वापस निकल गया।

सुबह रिचा नहा कर तैयार होकर अपनी सास के पास गई उनसे पूछा कि विनोद नहीं दिखे अभी तक आए। नहीं क्या।

सास बोले तुम तो सो रही थी घोड़े बेचकर वह तो चले भी गए।

 उसने कहा देर से आए थे तो मुझे उठा देते क्या फर्क पड़ता।

मैंने तो अभी तक अच्छी तरह उनसे बात भी नहीं करी है।

उसकी सास उसको भला बुरा बोलने लगी। और बोला अपने कमरे में से तुम्हें बाहर आने की जरूरत नहीं है ।

तुम्हारा खाना पीना सब वही पहुंच जाएगा। तुमको कोई बात की कमी नहीं रहेगी।

 अब तो उसको लगा जरूर कुछ दाल में काला है।

 ऐसे ही दो दिन और बीत गए तीसरे दिन वह सोई नहीं उसका पति घर आया।

 उसने उसको जागते हुए देखा उससे बात करने की कोशिश करी तो वह दूसरी तरफ मुंह करके सो गया।

 बोला मैं बहुत थक गया हूं कल बात करेंगे।

अब तो इसका दिमाग बहुत ही गर्म हो गया उसने कहा हो ना हो जरूर कुछ ना कुछ यह लोग मुझसे छुपा रहे हैं।

उसने सुबह जब विनोद नहाने गया तब उसने उसका फोन लिया और देखा तो उसमें उसके बीवी बच्चों की तस्वीर थी।

 अब उसकी बात समझ में आई।

उसने फोन छुपा दिया।

और खुद जाकर लेट गई जब विनोद चला गया।

तब उसने फोन में से सब चेक करके उसकी पत्नी के फोन पर फोन करा

 पत्नी ने सोचा पति का फोन है बोलती है अब तक कहां हो।

 अभी तक तुम उस रिचा के पास ही हो क्या अब तुम्हारा मन बदल गया है।

 और जोर-जोर से बोलने लगी।

 नई पत्नी आते हुए पुरानी पत्नी को भूल गए।

 रिचा को तो यही सब सुनना था।

 उसने यह सब अपने फोन से रिकॉर्ड कर लिया और फोन बंद कर दिया।

उसने अपनी सास के पास जाकर के उनसे बहुत झगड़ा करा।

उसकी सास ने कहा मैं जैसा रहती हूं तुमको वैसा ही करना पड़ेगा। जब सब जने आएंगे तब तुमको अपने आप को विनोद की पत्नी के रूप में ही प्रस्तुत करना है।

मेरी और तुम्हारे पिता की इज्जत का सवाल है।

उसने कहा ठीक है मेरे को परीक्षा देनी है और नौकरी करनी है सास ने कहा तुमको जो करना है करो।

 मगर मुझे इस बारे में कोई बात ना करो।

उसने अपने पिता और मां को फोन लगाया तो पिता ने अपनी इज्जत की दुहाई देकर कि तेरी बहने बैठी हैं उनकी शादी करनी है तू घर आने का तो सोचना ही मत नहीं तो लोग मेरी इज्जत उछालेंगे।

तुझे तो कोई भी हालत में वही रहना है।

 बहुत मुश्किल से शादी करी है अब तेरी बहनों की शादी करनी है इसलिए अब तेरे को यहां नहीं आना है वही तेरा घर है वही मर खप जो करना है कर।

उसकी मां ने पिता के हाथ से फोन छीन करके उसको बहुत जोर से डांट लगाई और बोला अपनी मां को तो खा गई अब हम सबको को भी खाने वाली है क्या ।

जा यहां से।

 मेरे घर कभी मत आना यह तो एकदम सकते में आ गई। 

थोड़ी देर रोती रही फिर उसने देखा अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा।

 पूरी आत्मविश्वास से भर के आगे की तैयारी करने के लिए जुट गई उसने अपनी सास से बोला मुझे परीक्षा देने दो कॉलेज जाने की अनुमति दो।

 और गाड़ी दें।

उसकी सास ने एक ड्राइवर के साथ में उसको एक गाड़ी दे दी बोला तुमको छोड़कर आएगा और लेकर आएगा।

 और तुमको जो करना है वह करो ।

मेरी तरफ से कोई रोक-टोक नहीं है।

 मगर अब तुम मेरे बेटे के बारे में मुझे नहीं पूछोगी और कोई सवाल नहीं करोगी। खाना पीना रहना इसमें तुम्हारी कोई बंदिश नहीं है ।

जहां जाना है जाओ मगर मुझसे मगजमारी मत करो ।

और कोई भी आए तो तुमको विनोद की बहू की तरह ही पेश आना है।

उसने थोड़ी आनाकानी करी तो सास को गुस्सा आ गया ।

बोला पूरा एक करोड़ रुपया देकर तुमको खरीदा है।

 तुम्हारे बाप ने तुमको कुछ बताया नहीं पैसा लेकर के बैठ गए घर में और तुम यहां मेरे से मगजमारी कर रही हो। अब तुम कुछ नहीं कर सकती। तुम हमारे गुलाम हो खरीदी हुई।

अब उसको यह बात समझ में आई कि वहां पैसे की चहल-पहल क्यों हो रही थी ।

पापा के हाथ में इतनी मोटी पैसे की गड्डियाँ क्यों थी। उनका दिल बेटी को बेचने कैसे मान गया। 

अब उसने सोचा मुझे थोड़ा समझदारी से काम लेना चाहिए।

 सबसे पहले तो यह पता करना है कि इन्होंने एक पत्नी की होते हुए मुझसे शादी क्यों की और इसके पीछे क्या कारण है।

उसने घर के अंदर काम करने वाले नौकरों से सबसे बहुत अच्छा व्यवहार करना चालू करा।

एक दिन ड्राइवर ने अपनी मालकिन से छुट्टी मांगी और कुछ पैसे मांगे तो उसने मना कर दिया और डांट लगा दी।

 तो ड्राइवर अपनी मालकिन से नाराज था।

इधर रिचा का थीसिस पूरा हो गया था।

 उसने कॉलेज में अप्लाई कर दिया था वहां से उसका अपॉइंटमेंट लेटर आ गया।

उस दिन ड्राइवर बहुत दुखी था उसने उनसे पूछा कि ड्राइवर काका क्या बात है आप बहुत दुखी हो।

ड्राइवर ने बोला मेरी मां बहुत बीमार है।

 गांव में है उनके इलाज के लिए पैसे मांगे तो इन्होंने नहीं दिए और छुट्टी के लिए भी मेरे को मना कर दिया।

 मुझे तुम्हारे लिए भी बहुत दुख होता है तुम इनके बली का बकरा बन गई हो।

करोड़ों रुपए के सामने एक करोड़ तो कुछ नहीं है जो तुम्हारे पिताजी को दिया गया है।

अब रिचा का माथा ठनका।

उसने ड्राइवर को विश्वास में लेते हुए बोला आप मुझे बताइए क्या बात है।

 मैं किसी को भी नहीं बताऊंगी।

ड्राइवर ने कहा उनके दादाजी की करोड़ों की संपत्ति है पूरे परिवार का इकलौता वारिस है लड़का विनोद है।

 मगर इसकी हरकतें और इसकी मां की हरकतें दादाजी को बिल्कुल पसंद नहीं है। तो उन्होंने सारी संपत्ति विनोद की शादी अगर सजातीय परिवार में हो जाती है

तो उसकी पत्नी के नाम करनी है ।

ऐसा कहकर उन्होंने वसीयतनामे में सारी संपत्ति विनोद की सजातीय पत्नी के नाम कर दी है।

जबकि विनोद तो पहले से ही अपनी प्रेमिका से विवाह कर चुका है। तब इन लोगों ने तिकड़म लगाई और तुम्हारे पिताजी को फांस लिया।

 तुम्हारे पिताजी पैसे के पाजी निकले और उन्होंने अपनी बेटी को एक करोड़ में बेच दिया।

तुम्हारे दादा ससुर जी के स्वर्गवास के बाद यह तुमसे विल के पेपर अपने नाम करवा कर

तुम्हारा भी पत्ता साफ कर देंगे या तो तुम्हें रास्ते से हटाने के लिए तलाक देंगे या ऊपर ही पहुंचा देंगे संभल के रहना बेटी।

 तुम तो मेरी बेटी जैसी हो।

यह सब सुनकर के रिचा एकदम चौंक गई मगर उसने अपनी चेहरे की हकीकत को छिपा लिया और घर में भी एकदम नॉर्मल बनी रही।

 एक दिन उसको कॉलेज से अपॉइंटमेंट लेटर आ गया उसी दिन में ड्राइवर के साथ जाकर कॉलेज में ज्वाइन कर लिया और वही एक दो रूम रसोई का घर ढूंढ के किराया ले लिया और उसमें धीरे-धीरे करके सामान बसा लिया।

 एक दिन उसने ड्राइवर से बोल अच्छा आप यह तो जानते होंगे कि वह विनोद रहता कहां है अपने परिवार के साथ। वह ड्राइवर के साथ उसके घर गई।

 उसकी पत्नी को यह नहीं बताया कि वह कौन है और उससे दोस्ती करने की कोशिश करी साथ में फोटो खींची चाय पी।

फिर बोली तुम्हारी एल्बम तो दिखाओ।

एल्बम देखते देखते उसने उससे बोला थोड़ा पानी लेकर आओ ना विनोद की पत्नी पानी लेने गई उसने चुपचाप एक शादी की फोटो निकाल कर अपने बैग में रख ली और जल्दी-जल्दी एल्बम देखकर बंद करके और बाहर आ गई ।

पानी पीया बोली अब मैं चलती हूं।

मैं रिचा हूं विनोद की पत्नी जिससे उसने धोखे से शादी करी है।

क्या तुमको पता है।

तो वह हंसते हुए बोली मुझे तो सब मालूम है।

तुम्हें तो एक करोड़ में खरीदा है।

बस थोड़े दिन की मेहमान हो फिर तो तुम्हारा पत्ता कट जाएगा।

अच्छा हुआ तुमसे मिलना हो गया नहीं तो मन में एक मलाल रह जाता कि मैं तुम्हें देख भी नहीं पाई और तुम चली गई।

बोलती है अब निकल घर से थोड़े दिन में मन से भी निकाल दी जाएगी ।

तब मैं अपने ससुराल पहुंच जाऊंगी और उसके मुंह पर दरवाजा बंद कर देती है।

रिचा को समझ में आ गया कि यह इन सब लोगों की मिली भगत है और यह मेरा पत्ता साफ कर देंगे पैसा आते ही। उसने ड्राइवर की मदद से सब जगह जाकर पेपर वगैरह तैयार करवा लिए।

 सबूत इकट्ठे करे हुए थे यह भी सब उसके साथ लगा दिए पुलिस में कंप्लेंट भी कर दी।

 और बोला एक्शन में कहूं तब लेना।

 थोड़े दिनों में दादाजी का स्वर्गवास हो गया दादाजी के अंतिम दर्शन के लिए भी उसे नहीं ले जाया गया।

उसने नौकरों से बात करके और भी सबूत जुटा लिए और आराम से जाकर सो गई।

 तीन दिन बाद विनोद और उसकी सास दनदनाते हुए आए पूरे वसीयत के पेपर और तलाक नामा

उसके सामने रखा और बोला अभी के अभी इस पर दस्तखत कर।

वह एकदम संयत रही

बोली रख दो सुबह कर दूंगी पढ़कर।

मुझे भी तुम्हारे साथ कोई रहने में दिलचस्पी नहीं है तुम तुम्हारे रास्ते में मेरे रास्ते।

मां बेटे ने सोचा हमारी चाल कामयाब हो गई। पैसा भी पूरा मिल जाएगा थोड़ा इसको दे देंगे नहीं मानेगी तो।

 रास्ते में से हटा देते ।


अब ऐसा तो है नहीं तो थोड़े पैसे देकर के और इससे तलाक ले लेंगे। सब पैसे के हम मालिक बन जाएंगे ।

बहुत सारे दिवा स्वप्न देखते हुए दोनों सो गए।

दूसरे दिन सुबह उसने पहले पुलिस को इन्फॉर्म करा और पेपर बदलकर तलाकनामे के पेपर पर जो उसने बनवाया था उस पर सही करके ।

और प्रॉपर्टी के पेपर पर सही नहीं करी क्योंकि वह उसके नाम पर थी।

पेपर अपने पति को विनोद को हाथ में थमाये। 

विनोद बहुत खुश था उसने जैसे ही पेपर देखे उसने बोला यह पेपर वे नहीं है जो मैंने दिए थे।

उसने कहा यह मेरी तरफ से तुम्हारे लिए उपहार है।

तुम मुझे क्या तलाक दोगे मैं तुम्हें तलाक दे रही हूं और पुलिस में फरियाद कर दी है 

2 दिन पहले ही।

 पुलिस आती ही होगी तुम दोनों को पकड़ने के लिए


उसकी सास और वह इज्जत की दुहाई देते हैं हमारी इज्जत चली जाएगी ।

यह क्या कर रही हो तुम चाहे तो पूरा पैसा ले लो।

 मगर चुपचाप यहां से चली जाओ तलाक वलाक का झंझट छोड़ो।

उसने कहा था कि तुम थोड़े दिनों में मुझे अपने रास्ते से हटा दो मार डालो जला करके या कुछ भी करके और सब संपत्ति हथिया लो।

मुझे तुम्हारे सारे

 मनसुबे पता है।

पहले मेरे पिताजी को फंसाया पैसे का लालच देकर।

 मुझे और मेरी जिंदगी को नर्क बना दिया तुमको ऐसे ही नहीं छोडूंगी।

उसका पति व मां उसको अपशब्द बोलते हैं और वार करने वाले होते हैं कि पुलिस आ जाती है और दोनों को गिरफ्त में ले लेती है और बोलती है तुम लोगों ने पहले ही इसको बहुत परेशान किया है इसलिए हमको बहुत दिन पहले ही पुलिस कंप्लेंट लिखवा दी थी और बोला था फोन करूं तब आना और आज वह दिन आ ही गया।

 दोनों को बोला यू आर अंडर अरेस्ट।

वे रुचि को बोलते हैं तुम्हारे जैसी हिम्मत हर में लड़की दिखाएं जिस पर अत्याचार हो रहे हैं तो यह नौबत कभी ना आए यह एक सबक है।

वह भी उनके सामने ही

अपनी सूटकेस लेकर निकल जाती है कि मैंने तुम्हारा रिश्ता और तुम्हारा घर दोनों छोड़ दिया है ।

अब मेरा तुमसे और मेरे पियर वालों से कोई वास्ता नहीं और अपने नए घर की और निकल पड़ती है।

 विचार करती है इस पैसे का क्या करूं।

फिर विचार करती है कि मेरे जैसी परेशान और घर से ठुकराई हुई लड़कियों के लिए अपना घर खोल देता हूं। 

जहां उनको हिम्मत हौसला और अपनापन मिले कुछ कर दिखाने का मौका मिले और ससुराल वालों के और अपने मां-बाप के स्वार्थ के आगे उनकी इज्जत की दुहाई के आगे घुटने टेक करके अपने आप को खाई में धकेल देने वाले लड़कियां जो समाज के ठुकराई हुई होती हैं उन सबके लिए एक प्यार भरा आशियाना खोलने का मन बनाती है और काम में जुट जाती है। उसके मुंह पर एक संतोष की लकीर होती है कि उसने जो किया वह सही किया और आगे भी वह निसहाय लड़कियों को

सहारा देकर सबल बनाएगी।

 ताकि उनका कोई शोषण न कर सके। इज्जत की दुहाई देकर उन्हें बेइज्जत ना कर सके।



Rate this content
Log in

Similar hindi story from Tragedy