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VIPIN KUMAR TYAGI

Abstract

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VIPIN KUMAR TYAGI

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लौट के आना एं मुसाफिर

लौट के आना एं मुसाफिर

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एक गरीब परिवार एक छोटे से गांव में रहता था यह गांव एक पहाड़ी गांव था एक बार एक विदेशी दंपत्ति उस गांव में आया वह घूमने के उद्देश्य से वहां आया था उसने उस गांव की प्राकृतिक सुंदरता को देखा एवं उसे वहां की प्राकृतिक सुंदरता इतनी अच्छी लगी कि वह उस गांव में कुछ दिन रुक गया है।वह उस गरीब परिवार के साथ उनके घर में ही रुका।यह विदेशी दंपत्ति उस परिवार के आतिथ्य से इतना प्रभावित हुआ कि उसने अपने वहां रुकने को ओर बढ़ा दिया तथा वह परिवार 2 महीने तक उस गांव में रहा उस परिवार के साथ रहा ।उस परिवार के साथ घुल मिल गया तथा उसे उस परिवार में अपनापन दिखाई देने लगा।एक दिन जब उनके जाने की बारी आई तो उस परिवार के लोगों में मायूसी छा गई उन्हें लगा कि अब उनके मेहमान चले जाएंगे।इतने दिन साथ रहने से उनके मन में जो जुड़ाव उनके साथ आ गया था उनके साथ जो अपनापन बढ़ गया था उसे खोने के डर से ही वह सहम जाते थे ।उनके रात की नींद उड़ गई खुदा उन्हें डर सताने लगा कि अब उनके मेहमान चले जाएंगे ।उन्हें लगने लगा कि पता नहीं दोबारा वह वहां पर आ भी पाएंगे या नहीं इसी डर से उनके मन की परेशानी बढ़ती गई और मेहमानों के जाने का दिन नजदीक आता गया।

जिस दिन मेहमानों को जाने का दिन था उस दिन वह परिवार बहुत मायूस हो गया।उन्हें लगा कि आज उनका कोई अपना खो जाएगा।फिर विदाई के समय उस परिवार के सब लोग रोने लगे फिर उन्होंने अपने मेहमानों से कहा यदि हो सके तो फिर उसी गांव में आना यहां की प्राकृतिक सुंदरता को देखना हमारे मेहमान बन कर ही आना लौट के मुसाफिर फिर यही आना हमें मेहमान बाजी का मौका देना ताकि हम आपकी सेवा को पुनः कर सकें।उनके जाने के बाद भी उनका उनसे संपर्क बना रहा ।फोन पर वह संपर्क करते थे।वह परिवार हमेशा अपने मेहमानों से आग्रह करता था कि मुसाफिर एक बार फिर लौट कर आना।यही मेहमान बाजी भारतीयों की प्रसिद्ध है हम हमेशा दूसरों के साथ अपनापन बना लेते हैं और दूसरों को भी लगता है कि वास्तव में हमसे भी बिछड़ना आसान नहीं होता है ।इस कहानी का कहने का मतलब यह है कि कभी-कभी मुसाफिर से इतना लगाव हो जाता है कि उनसे बिछड़ने की सोचने पर भी हमें भय सताने लगता है और अलगाव लगने लगता है मन से डर लगाने लगता है इस कहानी का तात्पर्य यही है लौट के आना एं मुसाफिर हम आपका इंतजार करेगे।

वी के त्यागी।


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