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Kunda Shamkuwar

Abstract

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Kunda Shamkuwar

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लावारिस

लावारिस

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"आपको क्या अहसास होगा लावारिस होने के दर्द का?"उसने बड़ी तल्खी से मुझसे सवाल किया।वह बिना रुके कहता गया,"मैं हमेशा ही अपने दोस्तों के birthday celebration को देखकर confuse हो जाता हूँ की मेरा birthday कौन सा है? जिस दिन मैं इस दुनिया में unwanted सा आया था या उस दिन मुझे कचरे के ढेर से अनाथ आश्रम में लाया गया था? आप ही बताओं मुझे कब अपना birthday मनाना चाहिए?"


मैं उसके सवालों की बौछार से विमूढ़ सा खड़ा रहा।शायद मेरे पास उसके किसी भी सवाल का कोई जवाब नही था। 

मुझे खामोश देख वह फिर से कहने लगा,"उन रातों का हिसाब मैं किस से माँगू जब मैं छुप छुप कर सारी रात रोया करता था?मेरे देखे अनदेखे ख्वाबों के टूटने बिखरने का गुनहगार मैं किसे मानु?मेरे उन सुनहरे दिनों के बारे में आपके क्या ख़्याल है जब मैं सहमा सा रहता था तब स्कूल के सारे बच्चे चहकते रहते थे।मैं चाह कर उड़ने की सोच नहीं पाता था सिर्फ पंख फड़फड़ाकर ही रह जाता था।"


मुझे रोकते हुए ही वह फिर बोलने लगा,"आप के ख़्यालात में जिंदगी बहुत खूबसूरत होगी,पर मेरे खयाल से तो बिलकुल भी नहीं।"


एक पल रुक कर वह फिर से बोलने लगा,"सुना है कि दीवारों के कान होते है,अच्छा है उनकी जबान नहीं होती।नहीं तो अनाथ आश्रम की सारी दीवारें चीख चीख कर उन सारे बच्चों की दर्दभरी कहानियाँ सुनाती रहती।उन मासूम और बेगुनाह 'लावारिस' बच्चों की ही बातें करती जिन्होंने अपनी जिंदगी किसी उम्रक़ैद की तरह बिताई हो..."


उसके सारे सवालों ने मुझे एकदम निशब्द कर दिया,मैं बस मौन खड़ा रह गया...

उसके किसी भी सवालों का मेरे पास कोई जवाब नही था।


क्या आपके पास है कोई भी सवाल का जवाब?


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