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Pawan Gupta

Horror


4.2  

Pawan Gupta

Horror


कर्ज़दार

कर्ज़दार

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तुमसे नाराज नहीं ए जिंदगी हैरान हूँ मैं,

हां..परेशान हूँ मैं

तेरे मासूम सवालो से परेशान हूँ मैं...ओ.... हैरान हूँ मैं...

ये गाना मेरे मोबाइल पर चल रहा था, और ईरफ़ोन मेरे कानो में लगा हुआ था, मैं आज बहुत परेशान था, रोज़ की तरह आज भी मेरी बस छूट गई थी, और मैं रोज़ की तरह आज भी ऑफिस जाने में 15 मिनट लेट हो जाऊंगा, बॉस मुझे बहुत डाटने वाले है, यही सब मेरे दिमाग में चल रहा था, और मैं आखे बंद करके गाने सुन रहा था, तभी किसी ने कंधे पर मेरे हाथ रखकर मुझे हिलाया, मैंने आँखेखोलीऔर उसकी तरफ देखा तो मेरे दिमाग से ऑफिस का सब डर निकल गया, अब कुछ दूसरा ही डर मेरे दिल में घर कर गया, पता नहीं ये कैसा डर था, परन्तु दिल जोर - जोर से धड़कने लगा, मेरी पलके झपकना भूल गई, और गाने की आवाज मेरे कानो में आनी बंद हो गई, तभी एक प्यारी आवाज आई,

एक्सक्यूज़ मी..

क्या मैं यहाँ बैठ जाऊँ

( मेरे बगल की सीट की तरफ इशारा करते हुए )

मैं हां बोलना चाहता था पर मेरी आवाज मेरे गले में ही घुट कर रह गई, बस मैंने अपना सर हिला कर अपनी हां का संकेत दिया, वो लड़की मेरे बगल में बैठ गई, उसके शरीर से एक अलग ही मोहक खुसबू आ रही थी, मेरा मन बार - बार उसको देखने का करता पर मेरी नज़रे उधर जाती ही नहीं, दूसरी तरफ खिड़की में मेरी नज़रे टीकी रहती, और मेरा दिल उसकी खूबसूरती के बारे में सोचता उसकी मोहनी खुशबु का आनंद लेता, मन बार - बार होता की एक बार देख लू पर ये मुझसे हो नहीं पा रहा था,

वो गेहुए रंग की थी पर खूबसूरती किसी से कमना थी, बड़ी - बड़ी आँखे लम्बी पल्खें, जब भी वोपल्खें निचे करती मानो कोई रिश्ता सा जोड़ लेती, नयन नक्श एक दम तीखे मासूमियत भरी सूरत उसके लम्बे घने बाल और उसके चेहरे पर आती बालो की एक झुरमुठ ! औऱ उसका अपनी हाथो सेउन लटोको अपने कान के पीछे करना ऐसा मानो कोई जादू कर रहा हो, मैं भले ही उसको नहीं देख रहा था, पर पुरे रस्ते उसकी मासूम मुस्कराहटप्यारी शक्ल के बारे में ही सोच रहा था, इतने में फिर से उसी प्यारी आवाज ने मेरे कानो पर दस्तक दिया, .एक्सक्यूज़ मी....

मैंने उसकी तरफ नज़र घुमाई, फिर से मेरी नज़र उसके चेहरे पर टिक गई, मैं चाह कर भी अपनी नज़र नहीं हटा पा रहा था, .उसने मुझसे पूछाआपको कहा जाना है ! मैंने हिम्मत की और कुछ बोलना चाहा पर मैं खुद ही भूल गया था कि जाना कहाँ है, वो मुझे उसी मासूमियत भरी नज़रो से देखते हुए मेरे जबाब का इंतज़ार कर रही थी, उसके चेहरे पर एक हलकी मुस्कान थी, तभी मुझे अपना बैग देख के याद आया कि मैं ऑफिस जा रहा हूँ, याद आते ही तुरंत मैंने जवाब दिया

सरिता विहार !

वो मुसकुराते हुए बोली, आपका स्टॉप बस आने ही वाला हैं !

उसको देखना उसकी आवाज को सुनना बहुत अच्छा लग रहा था,

अगर सच्चे दिल से कुछ चाहो तो पूरी कायनात उसे हमसे मिलाने में लग जाती है, ये कहावत सच है, तो मैं आज सच्चे मन से उसके साथ समय बिताना चाहता था, मुझे पता था वो अनजान लड़की थी, पर पता नहीं क्यों मेरा मन बस में नहीं था, वो लड़की मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रही थी, तभी उसने अपने हाथ मेरे कंधो पर रख कर बोली, कहाँ खो गए, आपका स्टॉप आ ही गया, और मेरा भी !

ये सुन के लगा क्या बात है, अब मैं कुछ पल और उसे देख पाउँगा !

जब हम बस से उतर रहे थे, तो उसने गेट का हैंडल पकड़ी हुई थी, और मुझसे आगे थी, तभी मेरी नज़र उसकी हाथो पर गई, उसके हाथ बड़े प्यारे थे, लम्बी - लम्बी उंगलिया और उसके प्यारे नेल्स ! वाटर कलर की नेलपॉलिश वाले उसके हाथ बहुत ही प्यारे लग रहे थे, मेरी नज़र उसकी हाथो पर थम सी गई, बस रुकी और वो उतर गई, मैं भी पीछे - पीछे उतर गया, फिर वो अपने ऑफिस चली गई और मैं अपने ऑफिस !

बस रस्ते में उसी के बारे में सोचता और ये मन में बिचार किया ये सब बड़ी बड़ी कहावते बस बनाई जाती है ये सच हो जरुरी नहीं है,

यही सब सोचते हुए ऑफिस पहुंच गया, आज बॉस की डाट भी मुझपर असर नहीं कर रही थी, पूरा आज का दिन मेरा उसकी यादो में बीता,

पुरे दिन यही बात सताती रही कि क्या वो कल भी मिलेगी, या आज वो किस्मत से टकरा गई, शाम हुई और ऑफिस की छुटी हुई, बस से घर जाते वक़्त मेरी नज़र पुरे बस में उसे ही ढूंढ़ रही थी, पर वो कही नहीं थी, फिर मन ही मन हसतेहुए खुद को समझाया, कि वो इत्तेफाक था, ज्यादा ना सोचु उसके बारे में, घर पंहुचा डिनर करके थोड़ा टीवी देखा और सोने चला गया, नींद आने के बाद उसके ही सपने आने लगे ! वो बहुत दुखी थी, उसकी आँखेआसुओ से भरी थी, वो मुझसे हेल्प मांग रही थी, ऐसा सपना देखकर मेरी नींद अचानक से खुल गई, और मुझे एहसास हुआ कि ये सब मेरे ज्यादा सोचने के कारण हो रहा है, मैंने अपना मन शांत करने के लिए लम्बी - लम्बी सासे लेने लगा और मन शांत करके मैं दोबारा सो गया ! सुबह लेट जगा, आज फिर बॉस की डाट का डर सताने लगा, फटाफट तैयार होकर मैं निकला पर आज भी मेरी बस छूट गई, मैंने फिर दूसरी बस ली,

आज भी खिड़की वाली सीट खाली थी, जिसपर कल हम बैठे थे, मैं जाकर बैठ गया, मुझे कुछ खास उम्मीद नहीं थी कि आज भी वो लड़की मिलेगी अचानक फिर मेरे कानो में एक आवाज आई !

एक्सक्यूज़ मी...

मैं यहाँ बैठ जाऊ, उसके चेहरे पर स्माइल थीं, आज मैं भी मुस्करा दिया, बैठने का इशारा करते हुए कहा " जरूर "

वो बगल की सीट पर बैठ गई, आज हमारी कुछ बात भी हुई, उसने अपना नाम पूजा बताया, वो सरिता विहार में ही कॉल सेन्टर में जॉब करती थी, और अपने मम्मी पापा के साथ बदरपुर में रहती थी, मैंने भी अपना नाम बताया

मैं पवन और मैं ओखला की एक कंपनी के अकाउंट डिपार्टमेंट में जॉब करता हूँ, मैं भी अपनी फॅमिली के साथ बदरपुर में रहता हूँ,

अब हम रोज़ बस में मिलने लगे, अब मेरी बस मिस नहीं होती थी, क्युकि अब पूजा से मिलने की ख़ुशीमें नींद जल्दी खुल जाती, जल्दी तैयार होके बस स्टॉप पहुंच जाता था, किस्मत कहे या कुछ और पर मुझे बस की वो खिड़की वाली सीट हमेशा ख़ाली मिलती, कई बार ये बात अजीब लगती कि खिड़की की ये दो सीट हमेशा ख़ाली क्यों मिलती है, और मेरे बस में बैठने के बाद ही पूजा क्यू आती है, पूजा कभी टिकट नहीं लेती जब भी मैं पूजा से कहता पूजा टिकट लेली तो कहती पास है मेरे पास ! पर इतने करीब के सफर के लिए पास कोई क्यू बनवाएगा !

पर इन बातो का क्या फ़ायदा था, जो मैं सोच रहा था वो मिल रहा था, पूजा रोज़ कुछ ना कुछ मेरे लिए खाने को ले आती कभी लड्डू कभी चॉकलेट तो कभी पास्ता !कभी कभी लंच भी ले आती और अपना एक्सपीरियंस बताती की कैसे उसने ये लंच बनाया है, उसके लंच की एक अलग ही बात थी, ऐसा खाना मैंने कही नहीं खाया था, यूहीदिन बितते गए, वही बस वही सीट !

सब मनो फिक्स हो गया हो, हमारे बीच प्यार या दोस्ती को लेकर कोई कमिटमेंट नहीं हुई, फिर भी हम दोनों को साथ समय बिताना अच्छा लगने लगा, एक दूसरे की आँखो में एक दूसरे केप्रति सम्मान और प्यार दिखने लगा, यूही दिन बीतते रहे, कभी पूजा कुछ लाती तो कभी मैं, ऐसे ही दिन बीत रहा था, एक दिन पूजा बस में आई, वो उस दिन ख़ुश नहीं थी, चेहरा मुरझाया सा लग रहा था, उसने आज ब्लैक सूट पहनी हुई थी, जिसका कालर गोल्डन लेस्सेस से बना हुआ था, आज उसके बाल खुले थे, और हाफ कर्ली थे, और आँखो में काजल और हल्का मेकअप चेहरे पर था,

आज वो आके चुपचाप बैठ गई कुछ भी नहीं बोली, आज वो बहुत प्यारी लग रही थी, सूट से मैच करता हुआ नेलपेंट लगाई थी,

इतनी प्यारी लगने के बावजूद उसे चुप देख के ऐसा लग रहा था, मानो खिले हुए गुलाब पर सूरज की रौशनी ना पड़ रही हो, मैंने उससे कई बार पूछा पर वो कुछ ना बोली,

उसने खुद को सँभालते हुए बोला !

पवन मैं तुमसे कुछ मांगू ...दोगे ! ये बोलते हुए उसकी आंखे भर आई, मैंने उसे इतने दिनों में ऐसा कभी नहीं देखा !

मेरे दिल मेँ आचानक दर्द हुआ,

उसकी आँखो में फसे आंसू लग रहे थे कि अब आँखो से निकलकर उसके गालों को भींगा देंगे, पर उसकी पलको ने उन कीमती बूंदो को समेट रखा था, मैंने अपने दिल की धड़कन को दबाते हुए तुरंत बोला " हां बोलो पूजा पर प्लीजहसकर बात करो !

पूजा ने कहा - आज तुम ऑफिस मत जाओ ऑफिस से छुटी लेलो प्लीज !

मैंने कहा " बस इतनी सी बात .. प्लीज अब तुम चुप हो जाओ मैं नहीं जाऊंगा आज ऑफिस"

पूजा ने कहा - आज का दिन मैं तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूँ,

मैंने कहा ठीक है कोई बात नहीं हम चिड़ियाघरचलते है, वही पार्क में बैठेंगे कुछ खा भी लेंगे वहां

आज मौसम भी अच्छा है, उसने पलके झुका के सरहिला के चिड़ियाघर के लिए हामी भर दी,

चिड़ियाघर पहुंचकर पूजा बहुत खुशथी, अब पूजा किसी उगते गुलाब की तरह प्यारी लग रही थी, वो ऐसी लग रही थी मानो वो भी प्रकृति का एक हिस्सा हो ऊचे- ऊचे पहाड़ झरने घने जंगलो के समान मोहक लग रही थी, आज मुझे लगा की उसके आँखो में आंसू मुझे किस हद तक दर्द दे सकते है,

हमने कुछ खाया और शाम तक वही रहे,

वहां बहुत भीड़ थी, बच्चे कप्पल बुजुर्ग कॉलेज के के बच्चे सभी थे, सब चिड़ियाघर घूमने आये थे और सर्दी की अच्छी धुप में सब एन्जॉय कर रहे थे, समय बीतता गया, और उस मोहक चेहरे पर उदासी छाती चली गई,

साम 5 बजे पूजा ने कहा " पवन आज मेरा एक काम और कर दो"

उसने एक लिफाफा दिया जिसमे पचास हजार का चेक था, और एक लैटर था, उस लिफाफे पर एक एड्रेस भी लिखा हुआ था,

पूजा ने कहा " पवन प्लीज मेरा ये आखरी काम कर दो, ये लिफाफा इसपर लिखे एड्रेस पर पंहुचा दो, मैं ही इसको ले जाती पर वास्तव में मैं वहां नहीं जाना चाहती, जिनको ये देना है, मैं उनकी कर्ज़दार हूँ, मैं उनसे नज़रे नहीं मिला सकती, इसलिए प्लीज तुम मेरा ये आखरी काम कर दो,

मैंने कहा - पूजा तुम बार बार प्लीज मत बोलो, मैं ये काम कर दूंगा, तुम परेशान ना हो, और फिर हम दोनों चुप हो गए, अब घर जाने का वक़्त हो चला था, मन तो दोनों का नहीं था कि हमघर जाये, पर घर जाना तो था ही !

दोनों 405 नम्बर की बस पकड़कर अपने अपने घर आ गए

अगले दिन संडे था, मैं भी आराम से सो कर 9 बजे जगा !

कल सारी बाते याद आ रही थी इसलिए लेट सोया, इसलिए जागने के बाद सर भारी हो रहा था, इसलिए तुरंत फ्रेश होने चला गया फ्रेश होके नाश्ता किया और प्लॉन किया कि आज ही वो लिफाफा उसके एड्रेस पर पहुँचा दू, 12 बजे मैं उस एड्रेस पर पहुंच गया, घर नार्मल था, मैंने डोरबेल बजाई !

थोड़ी देर में दो बुजुर्ग कप्पल बहार आये और पूछा, कौन हो तुम !

मैंने कहा " पूजा ने ये लिफाफा भिजवाया है "

उन्होंने एक दूसरे को देखा फिर मुझसे कहा अंदर आजाओ बेटा, आंटी जी ने कहा मैं चाय बनाकर लाती हु, ये कहकर वो किचन में चली गई,

अंकल ने कुर्सी की तरफ इशारा करते हुए बैठने को बोला !

मैंने उनसे कहा आपलोग पसरेसान ना हो मैं नाश्ता करके ही आया था, पर उन्होंने जिद करके बिठाया, और बाते करने लगे,

बेटा तुम पूजा को कैसे जानते हो, लिफाफे में क्या है, . मुझे समझ नहीं आ रहा था कि पूजा से मेरा रिश्ता क्या बताऊ, क्या कहुँ, पूजा मेरी दोस्त है, पर दोस्ती की बात तो पूजा ने कभी नहीं कही,

इतने में चाय आ गया, सबने चाय ली, फिर मैंने सारी बात सच सच बता दी,

बातें सुन उनकी आँखो से आँसुओ की धारा फुट पड़ी, उन्होंने दिवार पर लगी फोटो को दिखाकर बोला, बेटा इसी की बात कर रहे हो,

मैंने जब फोटो देखा तोमानो पैरो तले ज़मीन खिसक गई हो,

मुझसे रोया भी नहीं गया बस अपना सर हां में हिला दिया, अब मेरी आँखो में भी पानी उतर आया, उन्होंने बताया कि 11 जनवरी को हमारीबेटी पूजा एक बस एक्सीडेंट में चल बसी !

हम उसपर आश्रित थे, वो हमारी बेटी नहीं बेटा थी, पर भगवान् को ये भी देखा नहीं गया, उन्होंने हमारी पूजा को हमसे छीन लिया ये कहकर दोनों फूटफूट कर रोने लगे, मुझसेभी आंसू रोका नहीं गया, .

ये सब जान के मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया, समझ नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा है फिर मैंने उनको लिफाफा खोलने को बोला, और बताया की इसमें आप लोगो के लिए एक लैटर और पचास हजार का एक चेक है, उसके माँ पापा ने बताया कि चालीस हजार का क़र्ज़ था, उनके ऊपर जिसको पूरा करने के लिए पूजा बहुत मेहनत कर रही थी, और पैसे बचा रही थी,

अब सारी बाते समझ में आ गई, कि ये सब क्या हो रहा था, पर मन अब भी मानने को तैयार नहीं था, उनको शांत कराकर समझकर घर आ गया,

ये सारी बाते मुझे सता रही थी, ये बाते प्रेक्टिकल नहीं थी इसलिए विस्वास होना मुश्किल था,

मैंने सोचा कि कल उसके ऑफिस जाऊंगा वहां कुछ पता चल जाये शायद !

सोमवार को मैंने ऑफिस की छूटी करके उसके ऑफिस गया, वहां पता लगा कि पूजा शुक्रवार तक काम पर आई थी, पर उसके बाद नहीं आई ना कोई उसकाकॉल आया,

उसकी फ्रेंड ने बताया की 11 जनवरी को उसका एक्सीडेंट हुआ था, पर 12 को जॉब पर आई थी, उसे कोई चोट नहीं आई थी, उसकी फ्रैंड ने बताया कि 12 जनवरी को मैंने उससे बोला कि आराम कर लें, तो वो बोली "बहुत जिम्मेदारिया है मुझपे मैं छूटी नहीं कर सकती, और वो रोज़ जॉब पर आती थी, पर शनिवार से नहीं आई, ये सब पता करके मैं जब घर जाने को हुआ तो उसके ऑफिस के बहार पूजा मुझे दिखी,

सर पर चोट के निशान थे, हाथो पर गहरे घाव थे, मैंने पूछा " पूजा ये सब क्या हुआ"

वो आँखो में आंसू लिए बोली " पवन तुम अब तक नहीं समझे मेरी मौत तो 11को ही हो गई थी, पर पापा का क़र्ज़ था, जिसके कारण मुझे मुख्ती नहीं मिली, और आज सब ठीक हो गया है, तो मैं तुम्हे ये सब बता रही हूँ,

मैंने कहा "अगर ये सच है तो मैं ही क्यों तुम तोकिसी की भी हेल्प ले सकती थी"

पूजा ने कहा "नहीं मैं किसी और की हेल्प नहीं ले सकती थी, मुझे किसी पर भरोसा नहीं था,

मुझपर क्यों भरोसा की मैंने पूछा !

पूजा ने कहा " मैं तुमको पिछले 6 महीने से पसंद कर रही थी, तुम्हारी अच्छाई मुझे अच्छी लगने लगी, शायद इसीलिए तुमपर भरोसा किया,

और इतना ही नहीं तुम भरोसे के लायक हो की नहीं ये देखने के लिए पिछले एक महीने से तुम्हारे साथ थी, तब मुझे तुमपर भरोसा हुआ की सच में तुम एक अच्छे इंसान हो, फिरमैंने वो चेक देकर तुम्हे अपने घर भेजा !

मैं तुम्हे बहुत पसंद करती थी, ये कहते हुए पूजा की आँखे भर आई, और वो मेरी आँखो के सामने ही गायब हो गई !

इन एक महीनो में मेरे साथ बहुत कुछ हो गया, और ये भी समझ गया कि पूजा एक अच्छी और जिम्मेदार लड़की थी,

उस रात सब बात सोचता रहा और मैंने डिसाइडकिया कि पूजा के माँ पापा की देखभाल मैं करूँगा, मैं उसके बाद से हर महीने पुरे महीने का राशन और कुछ पैसे पंहुचा दिया करता, हर रविवार और त्योहारों पर उनसे मिलने जाता उनसे मिलकर ऐसा लगता कि मैं पूजा के करीब ही हूँ, पूजा हम सबको देख रही है और मुस्कुरा रही है......


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