Pawan Gupta

Horror Romance Tragedy


4.3  

Pawan Gupta

Horror Romance Tragedy


कर्ज़दार ३ (वो वापस आ गई)

कर्ज़दार ३ (वो वापस आ गई)

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अरे यार रविवार भी कब आता है , कब चला जाता है, शनिवार और रविवार दोनों छुट्टियाँ निकल गई पर सारे काम पेंडिंग रह गए।

  अकेले इंसान को हजारों काम होते हैं, ये रविवार भी न ऐसा लगता है कि नींद ही पूरी नहीं होती है।

   कितने काम थे... सब्जी लाना कार ख़राब थी उसे गैराज में देना कपड़े भी सारे ऐसे ही पड़े थे।

  हे भगवान अकेले रहना बहुत भारी है, चलो मैं सारा काम फटाफट निपटा लेता हूँ।


  मैं खाना बनाते बनाते यही सब सोच रहा था, दोपहर के एक बज गए थे, फटाफट लंच तैयार कर मैंने कपड़े वॉशिंग मशीन में डाले और सारे कपड़े धो लिए, घर की सफाई कर ली।उसके बाद कार गैराज में देकर सब्जी लेता हुआ घर वापस आया, शुक्र है कि मैं दोपहर का खाना खाकर निकला था, सारा काम खत्म होते होते शाम के सात बज गए। मौसम अच्छा था तो मैं छत पर टहलने चला गया, आस्मां बिलकुल साफ़ था, आज तो चाँद भी पूरा गोल था , शायद आज पूर्णिमा है। क्या ....आज पूर्णिमा है ( मैं अपनी पुरानी यादों में खोता हुआ ) पूजा को पूर्णिमा का चाँद और उसकी रौशनी कितनी पसंद थी।

कहती थी कि जी करता है कि हम दोनों इसी रौशनी में कही खो जाये, चाँद की शीतल रौशनी मन को बहुत सुकून देती थी, जब भी मैं उसके साथ होता था।

आज १८ साल बीत गए , पहले रोज़ ही पूजा की यादों में खो जाता था, पर अब घर और ऑफिस के काम से फुर्सत ही कहाँ है, यही शनिवार और रविवार ही ऐसा वक़्त होता है, जिसमे मेरा दिमाग शांत होता है और दिमाग शांत होते ही पूजा की यादें मुझे चारो तरफ से घेर लेती है।

शायद पूजा की यादें भी पूजा की तरह ही समझदार है, जब काम रहता है, या बिजी रहता हूँ तो कभी परेशां नहीं करती पर जब मैं सुकून के दो पल बिताना चाहता हूँ तो मेरे इर्द गिर्द आकर मेरा साथ देती है। मुझे कभी अकेला होने का एहसास नहीं होने देती है, छत पर लेटे लेटे चाँद को देखते हुए यही सब सोच रहा था।अचानक मैंने टाइम देखा तो 10 बज गए थे, मैं रूम में गया और खाना खाकर सोने चला गया, क्योंकि कल ऑफिस भी जाना है।

अचानक याद आया कार तो गैराज गई है, तो अब कल ऑफिस कैसे जाए, फिर मैंने सोचा कि मैं अपने दोस्त आर्यन को कॉल कर लेता हूँ , कल वो मुझे ऑफिस छोड़ता हुआ वो अपने ऑफिस चला जायेगा।

    

ये सोचकर मैंने आर्यन को कॉल किया ....

पवन - हेलो आर्यन कैसे हो आप ..

आर्यन - बिलकुल ठीक हूँ आप कैसे हो पवन 

पवन - मैं भी ठीक हूँ, बस एक काम था आपसे।

 मैंने अपनी कार गैराज में दी है, सर्विस के लिए और मुझे मेरी कार मंगलवार को वापस मिलेगी , तो क्या आप मुझे कल और परसो मेरे ऑफिस ड्राप कर दोगे। 

आर्यन - आप भी कैसी बात करते हो, पवन भाई आप आर्डर करो मैं पहुंच जाऊँगा।

पवन - अरे थैंक यू भाई ....तो कल आप मुझे 9 बजे सुबह पिक कर लेना।

आर्यन - ओके पवन भाई तो फिर कल मिलते है , ओके गुड नाईट ...

पवन - ओके गुड नाईट.. भाई ( फ़ोन काटते हुए ) थैंक गॉड एक प्रॉब्लम तो सॉल्व हुई अब सोने जाता हूँ।

अगली सुबह 7 बजे जगा, फटाफट नाश्ता तैयार किया फ्रेश होकर तैयार हुआ और फिर नाश्ता कर ऑफिस के लिए निकल गया।

आर्यन का भी दो बार कॉल आ गया था, वो मेरी गली के बहार अपनी कार में मेरा इंतज़ार कर रहा था। मैंने फटाफट अपना बैग उठाया और दरवाज़ा लॉक करके आर्यन की तरफ भागा, आज मैं लेट हो गया था, और मेरी वजह से आर्यन भी।

जाते ही पवन - सॉरी ...सॉरी आर्यन हम लेट हो गए कहते हुए कार में बैठ गया।

आर्यन कार को आगे बढ़ाते हुए " आप परेशां ना हो पवन भाई मुझे कोई परेशानी नहीं है। हम ऑफिस के लिए निकल गए थे। आर्यन के कार में एक गाना बज रहा था। जो मुझे शांत और दुखी कर रहा था।


इश्क़ होता नहीं सभी के लिए ये बना है , ...ये बना है , ...किसी किसी के लिए .....

 पवन - आर्यन ये गाना बंद कर दो प्लीज ...

 आर्यन - ओके ( और हम लाइफ की नार्मल बाते करने लगे )

आर्यन ने मुझे मेरे ऑफिस से थोड़ा पहले मैन रोड पर उतरा, वहां से मेरा ऑफिस महज ५ मिनट की दूरी पर था , और आर्यन अपने ऑफिस चला गया , जाते हुए आर्यन ने बोला कि वो मुझे ६ बजे लेने आएगा।

मैं पैदल अपने ऑफिस की तरफ चल दिया, मैं उस सड़क पर थोड़ी ही दूर चला था की पीछे से मुझे हार्न की आवाज़ सुनाई दी। सड़क एक दम ख़ाली पड़ी थी , मैंने सोचा जो होगा साइड से निकल जायेगा, या ये भी हो सकता है की ये हॉर्न किसी और के लिए बजाया जा रहा है। मैं ऑफिस के लिए लेट हो गया था तो मैं लम्बे लम्बे कदमों से ऑफिस की तरफ बढ़ रहा था। अचानक से एक बहुत सुरीली आवाज़ सुनाई अरे ...अरे ..सर हटो .. प्लीज .. मैं इस प्यारी आवाज़ को सुन के जैसे ही रुका की एक स्कूटी आई और मेरे पीछे बहुत जोर से ठोकर मारी।

   

मेरी तो कमर... हाय ....ऐसा लगा जैसे की मैं अब अस्पताल में मिलूंगा, पीछे ठोकर लगते ही मैं अपने घुटनों के बल ज़मीन पर गिरा, मुझे ऐसा लगा की मेरे घुटनों की कटोरिया चकनाचूर हो गई हो, दर्द से मैं कर्राहने लगा। दर्द बहुत ही असहीनय हो रहा था, अब इस दर्द के कारण मेरा गुस्सा सातवें आसमान पर था। उस रोड पर मैं अपने दर्द को दिखा भी नहीं सकता था, मर्द होना आसान नहीं होता साहब हमें अपना दर्द अपने सीने में दबा कर चेहरे पर मुस्कान रखनी पड़ती है। जब मैंने खड़ा होने की कोशिश की तो मुझसे खड़ा भी नहीं हुआ गया, दो लोगो ने सहारा देकर मुझे उठाया। अपने पैरो पर खड़ा हुआ तो एहसास हुआ कि चोट तो लगी है, पर सब ठीक है।

मैंने पीछे नजर दौड़ाई उस स्कूटी को एक लड़की चला रही थी, उसकी उम्र तक़रीबन 18 साल रही होगी, बला की खूबसूरत बड़ी बड़ी काजल लगी आँखें नयन नक्श एक दम तीखे दाँत एक दम मोतियों सी सफ़ेद और बाल घुंघराले कही कही ब्राउन कलर लिए हुए ब्लू जीन्स और डार्क ग्रे कलर की टी शर्ट उसपर मिकी माउस देख ऐसा लगता था जैसे इसे कार्टून बहुत पसंद हो तभी मेरी नज़र उसकी प्यारी उंगलियों पर गई वो खूबसूरत उंगलिया और इंद्रधनुष की तरह कलरफुल उसके नेल्स मैं सब भूलता जा रहा था उसकी खूबसूरती आज २१ सालों बाद मुझे मेरी पूजा की याद दिला रही थी।

पहले तो मन में यही था कि उसे एक थप्पड़ लगाऊं, पर अब उसकी हालत मुझसे भी बुरी थी वो स्कूटी के साथ गिर गई थी, उसका हाथ छील गया था, दो लोगो ने उसे उठाकर एक जगह बिठाया और उसकी स्कूटी खड़ी कर वो चले गए।

मैं गुस्से को अपने मन में लिए उसके पास गया और बोला - तुमने इस सड़क को बगीचा समझ रखा है क्या ?.. कि तुम घूमने निकल आई। खुद भी मरोगी और दूसरों को भी मरोगी, तुम्हारे माता पिता को थोड़ी भी अकाल नहीं है क्या ? कि तुम्हें स्कूटी देखर सड़क पर भेज दिए है। ये स्कूटी सिखने की जगह है 

जी तो करता है कि....( कहते हुए मैं रुक गया )

मैं अपना गुस्सा उसपर निकल रहा था और वो लड़की सर नीचे किये हुए वही बैठी हुई रो रही थी। उसके बाल उसके चेहरे के सामने आ रही थी।

अब मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ऐसी हालत में मुझे उसे डांटना चाहिए या चुप करा कर उसकी हेल्प करनी चाहिए। मैं थोड़ी देर के लिए शांत हो गया , और अपने गुस्से को अपने मन के एक कोने में समेटने लगा , चोट तो उसको भी आई है,और उसकी उम्र ही क्या है।

इस डॉट का उसपर क्या असर होगा ये सोचकर मैंने अपनी आवाज़ में नरमी लाई और बोला।

एक्सक्यूज़ मी..देखिये आपको ज्यादा चोट आई है, आप मेरे साथ अस्पताल चलिए , और आपको भी तो ऐसे सड़क पर स्कूटी नहीं चलानी चाहिए थी न ...

मान लो मेरी जगह कोई बच्चा होता तो कितना बड़ा एक्सीडेंट हो जाता। रोते रोते उसने अपने घुंगराले खुले बालों को पीछे करते हुए अपना सर ऊपर उठाई। मैंने अब उसकी शक्ल ध्यान से देखा उसे देखकर मैं एक मूर्ति की तरह बना रह गया। उसकी आँखों में अब भी आँसू थे।


उसकी शक्ल देखकर कई सालों बाद एक अनकहा सा दर्द उमड़ आया, क्या वो वापस आ गई थी, मैं समझ नहीं पा रहा था।

 कुछ तो समानताएं थी इस लड़की और पूजा में या मेरा दिमाग खेल... खेल रहा था।

 उस लड़की की आँखें पूजा की तरह ही थी बड़ी बड़ी पलके, हां इसके बाल पूरी तरह घुंघराले थे , लगभग बाल पीठ तक होंगे।

 पर पूजा के बाल घुंगराले नहीं थे और पूजा गेहुए रंग की थी , पर ये लड़की एक दम गोर , जिसके सामने चाँद की चमक भी इसके सामने फीकी थी।

 उसकी आँखे काजलों में डूबी हुई ऐसा लगता मनो घने अँधेरे में चाँद छिपने की कोशिश कर रहा हो पर उन्ही आँखो में आँसू भी थे, जो पूजा की याद दिला रहे थे, मैं इन सब बातों में खो सा गया था।

तभी मेरे हाथ को हिलाते हुए i am sorry sir...

मैं अपनी यादों से बाहर आया वो लड़की रोती हुई मुझसे बोल रही थी i am sorry sir मुझे माफ़ कर दीजिए, मुझे स्कूटी चलाने नहीं आती , पर मैंने नहीं सोचा था कि ऐसा होगा। सब कहते थे कि तू चला लेगी टेंशन मत ले जो साइकिल चला लेते है, वो स्कूटी भी चला लेंगे। मुझे क्या पता था कि एक्सीडेंट हो जायेगा , सॉरी सर आप मुझे माफ़ कर दो।

   

मैं उसकी आँखों के बहते आँसू देखकर तड़प सा गया, पूजा भी ऐसे ही डबडबाई आँखों से मुझसे बात करती थी, उसे अपनी अनजाने में की हुई ग़लती के लिए बहुत पछतावा था। तभी मेरी नज़र उसके हाथ पर गई उसका हाथ गिरने से छील गया था, खून भी निकल रहा था।उसकी ये हालत देखकर मेरा मन मसोस के रह गया। ओह ..मैं इसे डांटता रहा, अपने दर्द की सोच रहा था, इसके साथ कितना गलत हुआ है, मैं तो अपना दर्द भूल कर उस लड़की के आंसूओं और दर्द में तड़पता चला गया। मैंने बोला प्लीज आप मेरे साथ अस्पताल चलो मैं पट्टी करवा देता हूँ, ये चोट जल्दी ठीक हो जायेगा।

 मैंने उससे उसकी स्कूटी की चाभी लेकर उसे स्कूटी पर बिठा कर अस्पताल ले आया, मुझे अपने हरकत पर बहुत ग्लानि हो रही थी।

इंसान गुस्से में सही और गलत का भेदभाव भुला देता है मैं जनता हूँ कि इस लड़की ने गलती की थी पर जानबूझ कर नहीं पर मैंने तो अपने गुस्से की लहरों में बहता चला गया। उसके आँसू मुझे झकझोर रहे थे। डॉक्टर ने उसके हाथ की पट्टी की और आराम करने को कहा, मैंने उससे उसका नाम और पता पूछा उसने अपना नाम जहान्वी बतायी और अपने घर का पता भी बताई।

    

उसके हाथों पर पट्टी लगी थी, और पैरो में भी चोट थी, तो वो ठीक से चल नहीं पा रही थी, मैं उसके करीब आकर उसको सहारा दिया। अब वही खुशबु हवा में तैरने लगी जो खुशबु पूजा के करीब आने पर हवाओं में तैरने लगती थी। मेरा मन बार बार पूजा की ओर खींचता चला जा रहा था, मैं खुद को अधीर और असहाय महसूस करने लगा, इस लड़की ने ऐसा क्या जादू कर दिया था कि आज 18 साल बाद मैं किसी की तरफ खिंचा चला जा रहा था।

   जाह्नवी को जैसे ही सहारा देने के लिए मैं करीब पहुंचा ही था कि उसने मेरी बाहों को कसकर जकड़ लिया, उसकी वो नरम हाथ और वो खुशबु मुझे उसके और करीब खिंच रही थी। मैं अब उसे उसके घर छोड़ने चला गया। उसे घर छोड़ कर उसको उसकी स्कूटी की चाभी देकर मैं ऑफिस निकल आया। उसके घर से ऑफिस महज ही 2 किलोमीटर होगा , तो मैंने ऑफिस के लिए ऑटो ले लिया , ऑटो में पूरे रास्ते बस उसी की शक्ल आँखें उसके आँसू ही मेरी नज़रों के इर्द गिर्द घूम रहे थे।

तभी एक आवाज़ ने मेरे कानों पर दस्तक दिया " सर आपका एड्रेस आ गया "

जैसे किसी ने मुझे नींद से जगा दिया हो ..ओ. .. सॉरी... सॉरी ...भाई साहब कितने रुपये हुए ( मैंने ऑटो वाले से पूछा )

सर 50 रुपये (ऑटो वाले ने कहा )

 मैं आज ऑफिस लगभग एक बजे पहुंचा, आज सोमवार था, तो काम भी बहुत था, ऊपर से मैं आज बहुत लेट भी हो गया था, तो आज काम खत्म करते करते पता नहीं कब 6 बज गए !


तभी मेरा फ़ोन बजा आर्यन का फ़ोन था, वो मेरे ऑफिस के निचे ही मेरा इंतज़ार कर रहा था। मैंने कहा ऑफिस में आ जाओ , मैं बस 10 मिनट में निकलता हूँ। ये कहकर मैं अपना बैग पैक करने लगा, तभी आर्यन भी केविन में आ गया, मैंने पियोन को बोलकर दो चाय मँगवाली।

 हम दोनों चाय पीते पीते अपनी नार्मल लाइफ की बातें करते रहे, चाय खत्म कर हम घर की तरफ चल दिए।

घर पहुँचकर मैं फ्रेश हुआ एक कप चाय बनाया और अपनी बालकनी में बैठ कर चाय   पी ता रहा !

थोड़ी देर आराम करने के बाद मैं अपने रोज़ के कामों में लग गया खाना बनाकर खाने के अड़ जब मैं बिस्तर पर गया तो फिर से मेरी यादों ने दस्तक दिया , पर ये यादें पुरानी नहीं आज की नयी थी।

जाह्नवी .....पूजा ने कहा था मैं वापस आउंगी क्या पूजा ही जाह्नवी के रूप में आई है, या मैं गलत सोच रहा हूँ।  मन परेशान था इसे वो क्या समझे एक हादसा या हमारी नियति ..जो पूजा ने कहा था।


फिर अचानक मुझे अपनी उम्र के इस पड़ाव की याद आई, कि अगर पूजा भी हुई तो क्या उम्र के इस पड़ाव पर मुझे ऐसा कदम उठाना चाहिए।

मेरी अंतरात्मा हिल गई कि मुझे क्या करना चाहिए , इसे नियति समझ कर स्वीकार करूँ या ये सब गलत समझ कर दूर हो जाऊँ।

पर कुछ ही पलो में मेरा मन फिर से पूजा रूपी जाह्नवी की खूबसूरती में उतरता चला गया।

अब तक मैंने जाह्नवी को ठीक से नहीं देख पाया था, फिर भी उसकी खूबसूरती का कायल हो गया था।

नहीं तो इन 18 सालों में मेरे मन ने किसी की तरफ देखा भी नहीं था।

मन ने फिर से एक पासा फैका कि क्या वही पूजा थी ?  अगर हां तो उसने अंजान सा व्यवहार क्यों किया।

   

मेरा मन खुद ही सवाल करता और फिर उसका उत्तर भी खुद ही देता। मेरे मन की गहराइयों में यही सब चल रहा था कि मेरी नजर घड़ी पर गई , सुबह के तीन बज गए थे, और मेरी नींद गायब थी।

अब मुझे ऑफिस जाने की चिंता सताने लगी, मैं अब सोने की कोशिश करने लगा , पता नहीं कब नींद आ गई , फिर तो मैं सीधा सुबह 8 बजे उठा।

बहुत लेट हो गया था फटाफट तैयार होकर चाय नास्ता किया, और आर्यन का इंतज़ार करने लगा , आज मैंने लंच नहीं बनाया।

 आर्यन का फ़ोन आया कि वो गली के बहार मिलेगा मैं तुरंत ही दरवाज़ा लॉक करके ऑफिस निकल गया।

    

आज भी आर्यन ने वहीँ ड्राप किया, वहां से मैं पैदल ऑफिस के लिए निकल गया, बार बार मेरी नज़र पीछे जाती, जबकि मुझे पता था कि जाह्नवी को चोट आई है तो वो अपने घर पर रेस्ट कर रही होगी। फिर भी उसके लिए मेरा मन बेचैन हो रहा था, पर ऑफिस पहुंचने तक भी कोई नहीं दिखा।

मैं भी ऑफिस पहुंच कर अपने काम में लग गया, मेरे पास दोपहर में करीब ३ बजे गैराज वाले का फ़ोन आया उसने कहा की आपकी कार ठीक हो गई है।

मैंने उसे शाम को कार ले जाने की कहकर फ़ोन रख दिया और फिर आर्यन को भी फ़ोन करके बता दिया कि वो शाम को अपने ऑफिस से सीधा घर चला जाये। मैं अपनी कार लेता हुआ घर आऊंगा। ये कहकर मैं काम में लग गया।

कल रात नींद पूरी ना होने के कारण मेरी आँखें लाल हो रही थी, मैं आज ऑफिस से अपने निर्धारित समय 6 बजे ऑफिस से निकल गया और कार लेता हुआ घर चला गया, रात का खाना मैंने बहार से ही पैक करवा लिया था, क्योंकि आज कुछ भी करने का मन नहीं था।

   

 मैंने अपना डिनर खत्म कर बिस्तर पर आ गया पर आज इतना थकने के बाद भी नींद आज भी आखों में नहीं थी,आज मैं कल से ज्यादा बेचैन था, आज तड़प भी ज्यादा थी क्युकी आज वो दिखी नहीं , होता है न की हम किसी चीज का बेसब्री से इंतज़ार करे और वो ना हो तो दिल बेचैन हो जाता है वही हाल कुछ मेरा भी था। यही सब सोचते सोचते मैं पता नहीं कब नींद की आगोश में चला गया। सुबह रोज़ की तरह उठा तैयार हुआ और अपनी कार से ऑफिस निकल गया , आज चार दिनों बाद मैं अपनी कार से ऑफिस जा रहा था अकेला था तो मैंने रेडिओ चला दिया।

ऑफिस के रास्ते में ही हाथ देती लिफ्ट मांगती मुझे जाह्नवी दिखी, उसे देखते ही मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई। उसके करीब पहुँचकर मैंने कार रोक दी, कार की गेट खोलकर उसने कहा मुझे घर तक छोड़ दीजिये, और वो कार में बैठ गई। ये आर्डर था या रिक्वेस्ट मैं समझ नहीं पाया।

मैं आश्चर्या में था कि एक अनजान सी लड़की इतने हक़ से किसी अनजान की कार में कैसे बैठ गई, इतने में उसने अपनी सुरीली आवाज़ में बोली - अब चलो भी।

तभी कार की रेडिओ पर एक गाना बजा 

रोजाना जिए रोजाना मरे

रोजाना जिए रोजाना मरे

तेरी यादों में हम

तेरी यादों में हम

 रोजाना रोजाना.....


कार चल पड़ी थोड़ी देर सब शांत रहा, गाने की आवाज़ कार में गूंज रही थ , इतने में मैंने इस चुप्पी को तोड़ते हुए कहा "अब तुम्हारा हाथ कैसा है जाह्नवी"? उसने अपना सर निचे झुका रखा था, और मेरी आवाज़ सुनते ही गुस्से में तड़प भरी आवाज़ में बोली "कॉल में पूजा "

मैं अचानक से पूजा का नाम सुन के डर गया, मेरे पैर अपने आप ही कार के ब्रेक पर चले गए और कार एक झटके से रुक गई।

जाह्नवी रोती हुई रेडियो को मारते नोचते हुए अपना सारा गुस्सा उस रेडियो पर निकालने लगी। जिसमे वो गाना बज रहा था ,

रोज़ाना जिए रोज़ाना मरे तेरी यादों में ....

मैंने उसे रोकते हुए पूछा क्या हुआ ?

जाह्नवी - (रोती हुई उसने अपनी पलकें उठाई और अपने हाथों को जोड़े मेरे सामने गिड़गिड़ाते हुए बोली ) पवन अब बस करो।

पिछले तीन दिनों से मेरा कितना बुरा हाल है, तुम क्यों नहीं समझते ?

मैं पूजा हूँ ....पूजा...तुम्हारी पूजा ....

देखो मैंने हमारी नियति को बदल दिया है, मैं तुम्हारे लिए वापस आई हूँ।

मैं उसकी सारी बातें सुनता रहा और आश्चर्य  में डूबता चला गया कि क्या ये सब हो सकता है ?

पर सच तो यही था कि ये सब हो रहा था।


जाह्नवी ने कहा - जिस दिन मेरे स्कूटी से एक्सीडेंट हुआ था, मैं तुम्हें उसी दिन पहचान गई थी, बस मैं कुछ बोल नहीं पाई, मैं तुम्हें अचानक देखकर डर सी गई थी। पिछले तीन दिनों से मैं सो भी नहीं पाई हूँ, क्या तुम एक बार भी मेरा हाल पूछने नहीं आ सकते थे।

गर मुझसे कोई गलती हुई है तो बताओ ?

मैं तुम्हारे लिए वापस आई हूँ, मैं तुम्हारी पूजा।

यह कहकर पूजा फफक फफक कर रोने लगी, उसकी बातें सुनकर मेरे आँखों में भी ख़ुशी के आँसू भर आये।

मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों से ऊपर करते हुए प्यार से कहा - पूजा ....

मेरे मुँह से अपना नाम सुनते ही वो कस के मुझसे गले लग गई।

मैंने भी उसे गले लगा लिया , हम दोनों एक दूसरे से 10 मिनट तक गले लगे लगे रोते रहे।

मैंने पूजा को फिर किसी तरह मनाया, और उसे मैं मिलने का वादा करके उसे उसके घर छोड़ कर मैं ऑफिस चला गया।

अब हम हर रोज मिलने लगे, शनिवार और रविवार हम पूरे पूरे दिन साथ रहते , रात का डिनर तो मैंने बनाना ही छोड़ दिया था अधिकतर तो मेरा डिनर पूजा ही ले आती। हमारी बातें तो कभी खत्म ही नहीं होती थी।        

पूजा को अपने पिछले जन्म से लेकर पुनर्जन्म तक सारी बातें याद थी, उसकी आवाज़ इतनी प्यारी थी कि बस उसकी बातों में मैं खो सा जाता था।

जी हां अब मैं जाह्नवी को पूजा के नाम से ही बुलाता था, ये नाम मेरी जुबाँ से उसके दिल को भी सुकून देता और मेरी आत्मा को भी ...

पूजा की तो अच्छी बात यही थी कि शायद उसके पास कोई मोहनी थी।

इतनी चंचलता भरी ये पूजा और एकदम शांत स्वभाव की पिछली जनम की पूजा ...फिर भी एक सी आदत मुझे लुभाने की !

मैं चाह के भी सारे सामाजिक रीती रिवाज़ों और अपनी समझदारियों को भुलाकर मैं पूजा के प्यार में खोता चला जा रहा था।

क्या करता .... पूजा भले ही 18 साल की रही होगी , पर पूजा के लिए मेरा प्यार मेरी तड़प 23 सालों से है, इसलिए मैं उसकी तरफ खींचता चला गया।

 हम दोनों प्यार में सब भुलाकर डूब गए , सब अच्छा चल रहा था, कभी हम कॉफ़ी शॉप पर मिलते तो कभी मॉल तो कभी रेस्टोरेंट।

    

एक दिन पूजा मुझसे मिलने नहीं आई, पर पूजा की दोस्त रश्मि मुझसे मिलने आई, और बोली की पूजा ने मुझे भेजा है, कुछ बात करनी थी।मैंने कहा ठीक है कॉफ़ी शॉप चलते है वही बात कर लेंगे ...उसने भी ओके कहा और हम कॉफ़ी शॉप चले गए।

रश्मि -आपको पता है पवन। आपसे प्यार करने की कितनी सजा जाह्नवी को मिल रही है, कभी वो स्कूल की टोपर हुआ करती थी, और कॉलेज में भी बहुत अच्छा रैंक था। पर आपसे इतना टूट के प्यार करती है कि उसे आपके सिवा कुछ नहीं दिखता वो सबकी नज़रों में गिरती जा रही है, वो कितनी चंचल लड़की हुआ करती थी, अब अजीब हो गई है। खैर मैं ये बताने के लिए आई थी कि आप उसके घर जाकर शादी की बात कर लो। वो ये बात तो आपसे कहेगी नहीं, बाकी आप खुद समझदार हो।


आज इतने दिनों बाद किसी ने मेरे अस्तित्व का चेहरा दिखा गया था, क्या मैं प्यार के स्वार्थ में किसी के लाइफ के साथ खेल रहा था।मुझे सब गलत लगने लगा था मैंने सोचा कि एक बार पूजा से बात करके सब ठीक करना ज़रुरी है। अगले दिन रविवार को मैं पूजा से मिला, उसने बताया कि रश्मि को उसने नहीं भेजा था। 

मैंने कहा - पूजा ये सही है कि हम प्यार करते है, पर तुम अपना भविस्य क्यों ख़राब कर रही हो , तुम्हारी पढ़ाई, तुम्हारी लाइफ तुम उसे भी तो देखो।

पूजा - आप समझ नहीं रहे हो न। मैं 19 साल की हो गई हूँ, पर ये सब्र आज का तो नहीं है। मैं फिर से सब पा सकती हूँ पर तुम्हें नहीं। अभी तो तुम मिले हो मेरे हुए नहीं हो ...

मैं तुमसे वादा करती हूँ आप एक बार मेरे घर आकर मेरा हाथ माँ पापा से मांग लो, देखो मैं शादी के बाद भी पढ़ सकती हूँ, और एक अच्छा मक़ाम हासिल कर सकती हूँ। पर तुम्हें खोकर तो मैं जीते जी मर जाउंगी, मैं रुकने को रुक भी जाऊँ पर माँ पापा और समाज वो तो बातें ही करेंगे न। क्युकी मेरे साथ साथ आपकी भी उम्र होगी। मेरी भी उम्र होगी। ये बात सीधी दिल पर लगी, बात तो ठीक ही थी , लोग उसके मम्मी पापा सब इस रिश्ते को कैसे अपनाएंगे।

 तकलीफ़ तो थी ही ...किसी को क्या पड़ी है इस प्यार से जो आज का नहीं पिछले जन्म से चलता आ रहा है फिर भी कोशिश तो करनी ही थी!

मैंने पूजा से कहा - पूजा मैं तुम्हारे घर अगले रविवार को आऊंगा , बस तुम सब संभाल लेना।

पूजा ने कहा - हमारा मिलना नियति है, बस तुम साथ चलो मैं सब संभाल लूंगी।      

  

अगले रविवार मैं पूजा के घर था, पूजा ने सारी तैयारी कर रखी थी, और सब कुछ अपनी माँ पापा से बता दिया था। मैं वहां तक़रीबन 11 बजे सुबह पहुंचा,

पूजा ने गेट खोलकर स्वागत किया , फिर मुझे सोफे पर बिठाकर माँ पापा को बुलाने चली गयी। मैंने माँ पापा के पैर छुए और बातें शुरू की, पूजा नाश्ता लेने चली गयी।

उसी समय पूजा के पापा ने बिना कुछ सुने मुझसे कहा कि मेरी बेटी को कुछ नहीं पता उसके लिए क्या सही है, और क्या गलत, तुम समझदार हो तुम समझो इस रिश्ते की गहराई को बस हम यही चाहते है , इतने में पूजा नाश्ता लेकर आ गयी।

पूजा- पवन आप लीजिए ना नाश्ता .....मैं अब क्या नाश्ता लेता अंदर तक यू दर्द उठा कि क्या कहूँ, मैंने तो कभी सोचा ही नहीं था।

अब वहां बैठना भी भारी लग रहा था , तभी मैंने पूजा से रुधति आवाज़ में कहा पूजा प्लीज एक गिलास पानी देना।

 वो पानी लेने किचन में चली गयी, तभी मैंने फिर से एक कोशिश की, एक कोशिश तो करनी बनती ही थी, जितनी पूजा ने मेरे लिए तकलीफे उठाई थी मैंने पूजा के पापा से कहा सर बात को आप समझिए ये प्यार आज का नहीं है, पिछले जन्म में हमारा प्यार हुआ था।

हम मिल ना सके, इसलिए आज ये सब इस तरह हो रहा है, प्लीज आप हमें समझिए पूजा ने वादा किया था, मैं वापिस आऊँगी, तो वो इस बार जान्हवी के रूप मैं आयी है ....

    

( पूजा के पापा ने गुस्से से चिल्लाते हुए )    

ये पुर्नजन्म की कहानी सुना के तूने मेरी बेटी को फँसाया है न।

तुझे एक बार मैं समझ नहीं आयी क्या....क्या सोच के इस रिश्ते के लिए आया था, निकल जा यहाँ से कहते हुए पूजा के पापा ने धक्के मार कर मुझे घर के बहार निकल दिया ...

अब मैं सिर्फ ईश्वर के भरोसे था जो भी ईश्वर करेंगे मैं अपनी नियति समझ के स्वीकार करूँगा।

 ( वहां से निकल कर मैं मंदिर में यही प्रार्थना करता रहा ) .......

    


         


     

     

              

  


     

              


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