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V. Aaradhyaa

Romance Action

3  

V. Aaradhyaa

Romance Action

किसी से ना कहना

किसी से ना कहना

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270

"हाई, सो गई क्या?"

अंतरा के मोबाइल पर मैसेज आया।

"इतनी रात को ये किसका मैसेज आया है?"

वाइब्रेशन मोड पर होने के बावज़ूद आधी नींद में भी सुमित के कान खड़े हो गए थे।

"अरे, ऐसे ही कोई व्हाट्सप्प मैसेज है, सो जाओ तुम !"

अंतरा ने उनिंदि आँखों से अपना फ़ोन उठाकर मैसेज देखा और सोने का उपक्रम करने लगी।

थोड़ी देर बाद सुमित चुपके से जागा और उसने अंतरा की ओर देखा तो वह सो चुकी थी। उसने कमरे में कोने में जाकर उसका फोन खोलने के लिए पासवर्ड डाला 2104 यह उसकी मैरिज एनिवर्सरी का डेट था इक्कीस अप्रैल पर ये क्या? तीन बार उस नंबर से खोलने के बावजूद जब फोन नहीं खुला तो सुमित समझ गया कि अंतरा ने अपने फोन का पासवर्ड बदल दिया है। पर क्यों? यह बात सुमित को समझ नहीं आ रही थी। फिर इतनी रात को अंतरा के फोन पर मैसेज आना भी उसके गले नहीं उतर रहा था। सुबह उठकर अंतरा से ज़रूर पूछेगा कि उसने फोन का पासवर्ड क्यों बदला और अगर बदला तो मुझे क्यों नहीं बताया और वो मैसेज...पता नहीं किसका था। सुमित सोचते सोचते सो गया।


वैसे सुमित और अंतरा की शादीशुदा ज़िन्दगी बड़े आराम से कट रही थी। उनके दो प्यारे प्यारे बच्चों ने उनकी दुनिया जहाँ खुशियों से भर दी थी वहीं अंतरा को तनिक अतिरिक्त व्यस्त भी कर दिया था। दोनों को साथ का वक़्त कम ही मिल पाता था। इधर अंतरा बच्चों में कुछ ज़्यादा व्यस्त होती जा रही थी तो उधर सुमित घर के काम में अंतरा का हाथ बंटाने के बजाए ऑफिस से आकर या तो टी. वी. खोलकर बैठ जाता या मोबाइल पर सोशल फ्रेंड से चैटिंग और स्टेटस अपडेट्स पर एक नज़र डाल लेता था। आज सुमित को अंतरा को सुकून से सोते देखकर बहुत अच्छा लग रहा था। हालाँकि दिमाग में उस फेसबुकिया फ्रेंड के बारे में जानने की उत्सुकता बराबर बनी हुई थी। अंतरा को चादर ओढ़ाकर दोबारा सोने की कोशिश करने लगा। उसे काफ़ी देर बाद नींद आई थी। सुबह उठा तो सर कुछ भारी सा लग रहा था।


अन्य दिनों की तरह ही अंतरा सुबह उठकर उसे चाय देकर बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करने में लग गई थी। सुमित ने सोचा, अभी उसे भी थोड़ी देर में ऑफिस निकलना है अभी अंतरा से पूछना कुछ ठीक नहीं लगता। शाम को ऑफिस से आकर पूछेगा।

उस दिन सुमित अन्य दिनों से कुछ जल्दी ऑफिस से घर आया तो दरवाज़ा बेटे अंशु ने खोला। अंदर आकर सुमित ने देखा अंतरा किसी से हँसकर हँसकर फोन पर बात कर रही है और उसे देखते ही फटाक से फोन काट दिया, यह कहते हुए कि "बाए, मैं बाद में बात करती हूँ!"


सुमित ने कहा, "तुम बात कर लो तब तक मैं फ्रेश होकर आता हूँ, यूँ अचानक फोन कट करना सही नहीं लगता!"

"अरे कोई ना! मेरी सहेली का फ़ोन था वो बुरा नहीं मानेगी। मैं उससे बाद में बात कर लूँगी!"

इतना कहकर अंतरा सुमित के लिए चाय बनाने चली गई।


उस वक़्त तक तो सब कुछ सामान्य ही लग रहा था। पर रात के साढ़े ग्यारह बजे जब अंतरा का फोन बजा तो सुमित के कान खड़े हो गए, उसने सोचा कि फोन उठाकर देखे कि किसका फोन है पर एक रिंग के बाद फोन बंद हो गया। सुमित की उत्सुकता बढ़ गई उसने अंतरा की ओर देखा तो वह नींद में थी। उसने उसका फोन उठाया और वाशरूम में चला गया। वैसे वह जानता था कि फोन लॉक है और उसका कोड बदला हुआ है, फिर भी स्क्रीन पर कुछ दिख जाए कोई नाम या नंबर यही सोचकर सुमित फोन को हाथ में ले गया और यूँ ही पुराना नंबर डालकर चेक करने लगा तो चौंक गया क्योंकि अबके फोन पुराने कोड से खुल गया था।


अब तो सुमित का एकदम से दिमाग ही घूम गया कि कल तो यह फोन इस कोड से खुल नहीं रहा था फिर आज कैसे खुल गया। खैर, उत्सुकता वश उसने तमाम सेंडर का मैसेज चेक किया तो अभी अभी जो कॉल आई थी, उस नंबर का व्हाट्सएप्प मैसेज चेक किया तो देखा उस व्हाट्सएप्प प्रोफाइल में कोई फोटो नहीं लगा था। सुमित ने उसका मैसेज पढ़ा तो बड़ा संक्षिप्त सा मैसेज था,

"हाई अंतरा, आप कैसी हैं? मुझे आपसे बात करके बहुत अच्छा लगा। आपको तो पता है कि मैं अपनी ज़िन्दगी में कितनी परेशानी झेल रहा हूँ। वैसे तो हम फेसबुक फ्रेंड हैं पर मुझे आपसे बात करके बड़ा सुकून मिलता है. जब भी फ्री हो आप मुझसे बात कर सकती हैं!"


वैसे तो मैसेज में कोई आपत्तिजनक बात नहीं थी पर अपनी पत्नी के नाम किसी अन्य पुरुष का मैसेज सुमित से सहन नहीं हो रहा था।


पिछली रात भी इसी के मैसेज से सुमित की नींद ख़राब हुई थी और आज फिर से पहले मिस्ड कॉल फिर मैसेज। कौन है ये? क्या अंतरा इस शख्स को पहले से जानती है, जिसका नाम उसने रंजीत नाम से सेव किया है। जो भी हो... अब बहुत हो चुका। सुमित कल इस मैसेज वाले इंसान के बारे में अंतरा से जानकर ही रहेगा। सोचकर सुमित ने यूँ ही मोबाइल पर टाइम देखा तो स्क्रीन पर मीनाक्षी का मैसेज दिख गया... 'गुडनाइट'

पता नहीं क्यों आज सुमित को उसके मैसेज का जवाब देने का बिल्कुल मन नहीं किया और वह सो गया।


सुबह जब बच्चों के स्कूल जाने के बाद उसने अंतरा से पुछा कि,

"ये तुम्हारा नया फेसबुक फ्रेंड कौन है और उससे तुम क्या बात करती हो?"

तो अंतरा ने बड़ी शांति से मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि,


"क्यों क्या हुआ? आप भी तो अपनी फेसबुक फ्रेंड मीनाक्षी से इतनी बातें करते हो। अरे वही जो अपने पति से बहुत दुखी रहती है और जिसे आपसे बात करके बहुत सुकून मिलता है। मैंने किया तो कौन सी बड़ी बात हो गई। इसके अलावा मेरे दोस्त रंजीतजी तो बहुत सभ्य हैं। उनकी पत्नी ने उनका जीवन नर्क बनाया हुआ है। कुछ देर मुझसे बात करके उन्हें सुकून मिलता है। आप तो आज के ज़माने के ओपन माइंडेड पति हो। आप तो कम से कम अपनी सोच बदलो। हम सिर्फ सोशल मिडिया से जुड़े दोस्त ही तो हैं!"


अब सुमित का माथा ठनका।


ओह... तो यह बात है! अंतरा वही तो कह रही है जो कुछ दिनों पहले सुमित ने अपने और अपनी इंटेटनेट फ्रेंड मीनाक्षी की दोस्ती के बारे में कहा था।

उसे याद आया...

पिछले तीन महीनों से वह अपनी एक फेसबुक फ्रेंड से मेसेंजर पर चैट कर रहा था। हल्के अभिवादन से शुरू होकर बात रूचि अभिरूचि जानने के अलावा जीवनसाथी और उनके आपसी तालमेल पर आई तो मीनाक्षी ने बताया कि उसके पति उससे बिल्कुल अच्छी तरह नहीं पेश आते और बहुत शराब पीते हैं। कभी कभी वह बहुत दुखी और अकेली हो जाती है। उसने यह भी लिखा था कि सुमित अन्य पुरुषों से बिल्कुल अलग है इसलिए मीनाक्षी को सुमित से बात करना बहुत अच्छा लगता है, बहुत सुकून सा महसूस होता है। वगैरह वगैरह।


जब ऐसे ही एक दो बार देर रात को मीनाक्षी का मैसेज सुमित के मोबाइल पर आया तो अंतरा ने आपत्ति उठाई थी कि, कोई स्त्री उसे इतनी रात में मैसेज क्यों कर रही है तब सुमित ने भी तो ऐसे ही तर्क देकर अंतरा को चुप करा दिया था जो आज अंतरा अपने और रंजीत के चैट मैसेज को लेकर कह रही है कि वह दोनों सिर्फ आभासी दुनिया में मिले हुए इंटरनेट फ्रेंड ही तो हैं।


सुमित ने भी तो अंतरा को यही कहा था जिस रात लगभग साढ़े बारह बजे मीनाक्षी का फोन आया था और वह रो रोकर बता रही थी कि उसका पति अब तक घर नहीं आया है। वह कितनी परेशान है आदि आदि। जब उसे फोन पर समझा बुझाकर सुमित वापस बिस्तर पर सोने आया तो अंतरा ने चिढ़कर कहा था,


"तुम्हारी ये इंटरनेट फ्रेंड तुम्हें इतनी रात को क्यों मैसेज कर रही है। वह भी तब जबकि मीनाक्षी जानती है कि तुम शादीशुदा हो। यह बात मुझे अच्छी नहीं लगी!"

उसके जवाब में सुमित ने लगभग डाँटते हुए अंतरा से कहा था,

"अंतरा, तुम एक पढ़ी लिखी स्त्री हो। थोड़ा ओपन माइंडेड बनो और स्त्री पुरुष की मित्रता को सहज लेना सीखो। वैसे भी कोई ज़रूरी नहीं कि परपुरुष या परस्त्री से बात करना मतलब उनके बीच कुछ गलत होना हो। आखिर दोस्ती भी तो कोई चीज है कि नहीं?"


सुनकर तब अंतरा का मुँह कितना मायूस हो गया था। आज सुमित को एहसास हो रहा था कि अंतरा को भी उसके और मीनाक्षी की दोस्ती और चैटिंग से ऐसे ही बुरा लगा होगा।


सुमित अपनी गलती पर अफ़सोस कर ही रहा था कि तभी अंतरा के मोबाइल पर फिर मैसेज आया। सुमित ने जब पुछा तो अब अंतरा ने बताया कि उसी फेसबुक फ्रेंड रंजीत का मैसेज है तो सुमित से एकदम रहा नहीं गया और उसने अंतरा के हाथ से लगभग मोबाइल छीन ही लिया। फटाफट रंजीत का मैसेज खोलकर पढ़ा तो लिखा था,


"आप मुझे बहुत अच्छी लगती हैँ पर मैं शादीशुदा हूँ, नहीं तो आपसे शादी कर लेता। जब आपकी तस्वीर देखी तो मुझे पता नहीं था कि आपकी शादी हो चुकी है और आप दो बच्चे की माँ भी हो। आप मुझे इतनी अच्छी लगीं कि मैं आपसे प्यार करने लगा। आप बहुत खूबसूरत हो। आई लव यू बट मेरी वाइफ को मत बताना। हो सकता है वो कभी आपको फ़ोन करे तो आप मत बताना कि मैं आपसे प्यार करता हूँ!"


अब सुमित के धैर्य का बाँध टूट गया। माना कि वह और मीनाक्षी फोन पर चैटिंग करते थे पर उन्होंने एक मर्यादा में रहकर ही मैसेज का आदान प्रदान किया था। पर इस रंजीत ने तो हद ही कर दी थी। इतना तो कोई भी पति नहीं बर्दाश्त कर सकता है, सुमित अपने आप में बड़बड़ाया,

"अभी तेरे सर से प्यार का भूत उतारता हूँ।


एक तरह से तो उसका खून खौल रहा था। जी कर रहा था कि अभी जाकर उस लड़के का गला दबा दे। अंतरा ने फोन उससे माँगा तो सुमित उसे कुछ बोले बगैर बालकनी में चला गया और रंजीत को झाड़ पिलाने के लिए उसी नंबर को डायल करने लगा जिससे मैसेज आया था।


उधर से किसी स्त्री की आवाज़ आई तो सुमित चौंक गया। पहले तो उसने सोचा कि वह उसी लड़के की वाइफ होगी पर आवाज़ बड़ी जानी पहचानी सी लगी तो सुमित ने दुबारा फोन लगाया तो फिर से वही आवाज़.... ओह! यह तो अंतरा

की सहेली विशाखा की आवाज़ है। अब सुमित ने थोड़ा संयत होकर 'हैलो' कहा तो उधर से विशाखा हँसते हूए बोली,


"क्यों जीजु! क्या हुआ ?"

सुमित ने फिर पुछा कि,

"अंतरा को फोन आपने किया था क्या?"


जवाब में विशाखा के जोर से हँसने की आवाज़ आई। फिर विशाखा ने बताया कि, अंतरा और विशाखा दोनों सहेलियों ने यह प्लान बनाया था ताकि अंतरा को सुमित का अटेंशन मिल सके और सुमित यह महसूस कर सके कि चाहे अंतरा कितनी भी ओपन माइंडेड हो एक पत्नी को अपने पति का किसी अन्य स्त्री से ज़्यादा बात करते देख थोड़ी ईर्ष्या स्वाभाविक है। और महज़ दो दिनों के लिए अंतरा ने अपने फोन का पासवर्ड भी इसीलिए बदला था ताकि सुमित के मन में थोड़ा शक पैदा हो। सुमित ने भी तो मीनाक्षी से चैटिंग शुरू होने के बाद अपने फोन का पासवर्ड बदल दिया था। जो आज सुमित ने रंजीत के लिए महसूस किया वही अंतरा सुमित और मीनाक्षी की बातचीत को लेकर महसूस करती आई है।


सुमित विशाखा से बात कर ही रहा था कि उसने अपने पीछे अंतरा को खड़े हुए पाया। अब तक सुमित सारा माज़रा समझ चुका था और फोन पर विशाखा को फुसफुसाते हुए बोला,

"ओके, आई लव यू बट मेरी वाइफ को मत बताना!"

जब अंतरा ने सुमित से पुछा कि,

"अब आप किससे इतना हँसकर हँसकर बात कर रहे हो?"

उसके जवाब में सुमित ने शरारत से मुस्कुराकर कहा,

"उसीसे इनदिनों जिसके मैसेज तुम्हें देर रात को आते हैं!"

उसके बाद देर रात तक दोनों पति पत्नी हँसते रहे। उस नंबर से अंतरा को फिर मैसेज़ नहीं आया। वही उसका आखिरी मैसेज था...


"आई लव यू बट मेरी वाइफ को मत बताना "


(समाप्त )



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