ख्वाब भी कभी कभी डरा जाते हैं
ख्वाब भी कभी कभी डरा जाते हैं
बचपन में राहुल का गाँव में आना जाना लगा रहता था, अपने नाना नानी से मिलने के लिए, फिर वो आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चला गया और वही पर बस गया।
वापस देश लौटा तो गांव जाने की इच्छा हुई और वो गांव के लिए निकल पड़ा।
रात बहुत हो गयी थी और गांव भी पिछड़ा हुआ था। रास्ते मे गाड़ी खराब हो गयी और उसने सोचा कि चलो थोड़ा सा ही दूर है पैदल चला जाता हूँ, पूछते पूछते सुनसान रास्ता था कोई इंसान या जानवर भी नजर नहीं आये। अंधेरा बहुत था वो चलते चलते तक से गया रास्ता भटक गया। राहुल एक पेड़ के पास बैठ गया। अचानक उसको लगा कि कोई उसे अपने पास बुला रहा है और सपने साथ लेकर जाने की जिद कर रहा है और वो साथ जाने को तैयार नहीं।
वो यमराज होते हैं। वो उनसे कहता है मेरी अभी उम्र की क्या है, मुझे अभी जीना है। इतने में पीछे से एक परी आती है और वो उन दोनों के झगड़े को खत्म कर देती है। राहुल जो पेड़ के पास बैठा था उसकी नींद जाने कब लग गयी थी।
यह ख्वाब था जो उसने नींद में देखा था जब नींद खुली तो वो फिर रास्ता तलाश करते हुए गांव के लिए निकल पड़ा।
ख्वाब भी क्या क्या दिखाते हैं हमको की कभी कभी डर जाते हैं।

