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Divyanjli Verma

Horror

4  

Divyanjli Verma

Horror

खूनी चुड़ैल

खूनी चुड़ैल

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  कहा रह गई थी तुम,,,,?कब से तुम्हारी राह देख रहा था,,,,। अमन ने रूपा के चेहरे पर बिखरे बालों को अपने हाथ से पीछे करते हुए कहा।

  मुझे थोड़ा काम आ गया था,,,,इसलिए देर हो गई,,,,कल से मैं जल्दी आ जाया करूंगी,,,,,।रूपा ने प्यार से अमन के सीने पर हाथ रखते हुए कहा।

 चुप करो,,,,मुझे पता है तुम्हें मुझे तड़पाने मे मजा आती है,,,,। अमन ने रूपा के होठों पर अपनी उंगली रखते हुए कहा। और फिर उसे अपनी बाहों मे जकड लिया और बोला, लेकिन मुझे भी तुम्हारे लिए तड़प के अच्छा लगता है।।।।

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 अमन हरिपुर गांव का एक लंबा चौड़ा बलिष्ठ मर्द था। उसकी अभी शादी नहीं हुई थी। घर वाले उसके लिए लड़की खोज रहे थे।

 गांव मे अक्सर घर के मर्द बाहर ही चारपाई या खटिया डाल के सो जाया करते थे। गर्मियों मे तो लगभग हर घर के मर्द यही करते थे। अमन भी अपने घर के बाहर खटिया पर सो रहा था।

  वो अमावस की रात थी। आज अंधेरा पहले से कुछ ज्यादा गहराया हुआ था। गर्मी भी बहुत ज्यादा हो रही थी। अमन अपनी खटिया डाल के बाहर लेट गया। उसके बूढे बाबा भी उससे कुछ ही दूरी पर लेटे थे। थोड़ी देर मे बाबा को नींद आ गई ।मगर अमन को ना जाने आज कैसी बेचैनी हो रही थी। वो सो नहीं पा रहा था।

  थोड़ी देर बाद ठण्डी ठण्डी हवा चलने लगी। अमन को अब थोड़ा अच्छा लगा तो वो आँख बंद करके लेट गया। फिर किसी पायल की आवाज सुनाई देने लगी। तो अमन ने अपनी आँख खोल के देखना चाहा कि कौन है,,,। लेकिन उसे कोई दिखा नहीं। पायल की आवाज बंद हो गई।

अमन आँख बंद करके सोने की कोशिश करने लगा। लेकिन फिर से पायल की आवाज आने लगी। उसने चारो तरफ अपनी निगाह दौड़ाई ये देखने के लिए की आवाज कहा से आ रही है,,,,?

तभी उसने देखा खेत की तरफ से कोई लालटेन लेके उसकी ओर आ रहा है। लालटेन की रोशनी बहुत धीमी थी जिससे अमन को उसका चेहरा नहीं दिख रहा था। मगर जैसे जैसे वो इंसानी स्वरूप पास आ रहा था। पायल की आवाज भी तेज हो रही थी। अमन को समझते देर न लगी कि वो इंसानी स्वरूप एक स्त्री है।

वो स्त्री अमन के बहुत करीब आ चुकी थी। उसने अपने हाथ मे पकड़े लालटेन को उपर उठाया जिससे रोशनी उसके चेहरे पर पड़ी। लालटेन की रोशनी मे उसके गोरे गाल चमकने लगे। उसके होठों पर गहरी लाली थी। और माथे पर लाल बिंदी। अमन तो उस सौंदर्य की देवी को ही घूरे जा रहा था । फिर उसने अपनी पलके उठा के अमन को देखा। अमन तो जैसे अपनी सुध बुध ही खो चुका था।

 उस स्त्री के आने से आसपास का तापमान बहुत गिर गया था।और ठण्ड बहुत बढ़ गई थी। बगल वाले खेत मे कुछ कुत्ते भी रोये जा रहे थे। लेकिन अमन तो उस स्त्री के रूप मे एसा खो गया था कि उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था।

 फिर उस स्त्री ने खामोशी तोड़ते हुए कहा,,मेरे पास आओ अमन,,,,मेरे पास आओ,,,,,। उसकी मीठी आवाज ने अमन पर ना जाने कैसा जादू कर दिया। अमन भी बिना कुछ सोचे उसके पीछे जाने लगा। वो स्त्री पलट के खेतों की तरफ चल दी और अमन उसके रूप के भंवर मे फसा उसके पीछे पीछे जाने लगा। वो बार बार पलट के अमन को कहती,मेरे पास आओ अमन,,,,। और हस देती।

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 अगली सुबह अमन को बेहोशी की हालत मे खेत मे पड़ा हुआ पाया गया। जब उसने आंखे खोली तो खुद को लोगों से घिरा हुआ पाया। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसका बदन बहुत दुख रहा था। वो थका थका सा मेहसूस कर रहा था। उसे बस इतना याद था कि वो घर के बाहर खटिया पर सोया था।इसके अलावा उसे पिछली रात की और कोई भी बात याद नहीं आ रही थी।

  इस बात को काफी दिन बीत गए। सब कुछ सामन्य हो गया। लोगों ने सोचा क्या पता नशे की हालत मे अमन वहां चला गया होगा और वहीं सो गया होगा। जवान लड़का है, इस उम्र मे तो ये सब होता ही रहता है।

  महीने भर बाद फिर से वहीं घटना घटी। इस बार भी अमावस की रात ही थी। और दूसरे दिन अमन खेत मे बेहोश मिला। इस बार लोगों ने उसे नशेड़ी समझ के ध्यान नहीं दिया। उसके बाबा उसे ढूंढते खेत पहुंचे और उठा के घर ले गए। तीन दिन तक यही सिलसिला चलता रहा। अमन घर मे सोता मगर खेत मे बेहोश पड़ा मिलता। उसका शरीर भी बहुत थका थका सा लगने लगा था। उसके आँखों के नीचे काले घेरे पड़ गए थे। 4 दिन मे ही बलिष्ठ मर्द जैसा अमन कमजोर लगने लगा था।

 उसके घर वालों ने भी यही सोचा कि नशा करने की वज़ह से वो एसा कमजोर हो रहा है। उसके बाबा को चिंता होने लगी। उन्होंने गुस्से मे अमन को चारपाई से बांध दिया और रात भर जाग के पहरा देने लगे ।जिससे अमन कहीं जाए ना।

उस रात अमन चारपाई से बँधा घर मे ही पड़ा रहा, लेकिन अगली सुबह उसे बहुत तेज बुखार आ गया था। घर वाले डर गए और जल्दी से डॉक्टर को बुला लाए। डॉक्टर ने कुछ दवाइयां खाने को दी। लेकिन अमन जैसे ही उन दवाइयों को खाता उसे उल्टी हो जाती। दिन भर उसे एसे ही बुखार रहा मगर रात होते ही बुखार सही हो गया और अमन अपने घर वालों से बोला, मुझे खोल दो,,,,मुझे जाना है,,,,,मुझे खोल दो,,,,,मुझे जाने दो,,,,,वो इंतजार कर रही है,,,,,,।

जब उससे पूछा गया कि कौन इंतजार कर रही है तो अमन कुछ बता नहीं पता,,,,,।अमन की एसी बाते सुन कर आसपास के लोगों ने बताया कि लगता है अमन पर भूत प्रेत का साया है। किसी तांत्रिक या पंडित के पास जाना होगा।

उसका बाप भी मरता क्या ना करता। बगल वाले गांव से तांत्रिक रामानंद को बुलाया गया। रामानंद ने गांव मे कदम रखते ही बता दिया कि इस गांव पर किसी साये का प्रकोप है।

अमन अपनी चारपाई पर सोया हुआ था ।लेकिन जैसे ही रामानंद तांत्रिक उसके घर मे आया। अमन ने अपनी आंखे खोल ली और गुस्से से उसे देखने लगा। तांत्रिक तुरन्त समझ गया कि अमन के अंदर कोई साया है और वहीं उसकी एसी हालत के लिए जिम्मेदार है। तांत्रिक ने अपने झोले से भभूत निकाली और कुछ मंत्र पढ़ने लगा। वो जैसे जैसे मंत्र पढ़ रहा था । अमन की आंखे गुस्से से लाल होती जा रही थी। फिर अमन ने चिल्ला कर कहा,चला जा यहा से,,,,चला जाँ यहा से,,,,।

  तांत्रिक ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया और मंत्र पढ़ी हुई भभूत को अमन के ऊपर फेंक दिया। अमन चिल्लाने लगा और फिर बेहोश हो गया।

 तांत्रिक ने बताया, अभी इस भभूत की वज़ह से वो साया जा चुका है। मगर थोड़ी देर बाद वो फिर यहा आएगा इसलिए मैं ये धागा इसके हाथ पर बांध रहा हू। इससे वो साया अगले अमावस तक इससे दूर रहेगा। मगर उससे हमेशा के लिए अमन को बचाने के लिए हमे हवन करना होगा। मैं हवन के लिए जरूरी समान लिख के दे रहा हू। ये सब मंगवा लेना।आने वालीं पूर्णिमा की रात को हवन करना होगा। तभी अमन बच पाएगा वर्ना वो साया इसे मार देगा।

घर मे सब बहुत डर गए थे। उसके बापू को तीन दिन लगे  

हवन का सारा समान खरीदने मे। क्योंकि कुछ चीजे गांव मे नही मिली तो शहर जाना पड़ा। समान लाने के बाद तांत्रिक रामानन्द को बता दिया गया कि समान आ गया है।

एक हफ्ते बाद पूर्णिमा की रात थी।उस रात ही हवन होना था।

  जब से धागा बँधा था। अमन थोड़ा समान्य हो गया था। लेकिन पूर्णिमा वालीं रात से एक दिन पहले नहाते waqt गलती से वो धागा खुल के पानी मे बह गया और अमन को पता नहीं चला। घर वालों ने भी उतना ध्यान नहीं दिया। दिन भर तो अमन समान्य रहता है लेकिन रात को सबके सोते ही वहीं स्त्री रूपा फिर से उसके घर आई।

 अमन उसे देखते ही बोला,कहा थी तुम इतने दिन मुझसे मिलने क्यों नहीं आई,,,,,।

तो वो स्त्री बोली, अब मैं आ गई हू,तुम्हें हमेशा के लिए अपने साथ ले जाने,,,,,चलो मेरे साथ अमन,,,,देर ना करो,,,,,चलो,,,,।

 अमन एक बार फिर से उसके रूप के भंवर मे फसा उसके पीछे पीछे जाने लगता है। वो स्त्री एक खेत मे जाके रुक जाती है। उस खेत मे एक झोपड़ी भी थी। स्त्री उस झोपड़ी मे जाती है। अमन भी उसके पीछे पीछे जाता है। झोपड़ी मे बहुत अंधेरा था। अमन जैसे ही अंदर जाता है उसके सर पर जोर से कोई प्रहार करता है। जिससे अमन बेहोश हो जाता है।

अमन के बेहोश होते ही वो स्त्री रूपा जो एक चुड़ैल थी। अपने असली रूप मे आने लगती है। उसके तन पर लिपटी साड़ी जलने लगी। जिसके साथ ही उसके बदन का मांस भी जल के मोम की तरह पिघलने लगा। उसके शरीर मे जगह जगह से हड्डियां दिखने लगी। उसके बंधे हुए बाल खुल के हवा मे लहराने लगे। उसकी आंखे बिल्कुल सफेद हो गई। और दांत किसी जानवर की तरह नुकीले हो गए। उसका पूरा शरीर सफेद हो गया था। उसका आकार भी पहले से कई गुना हो गया था।

 अमन उस चुड़ैल के सामने बेहोश पड़ा था। वो अमन को देखती है फिर मुस्कराने लगती है और कूद के अमन के सीने पर बैठ जाती है। चुड़ैल अपने लंबे नाखुन अमन के गाल पर फेरती है जिससे अमन के गालों से खून बहने लगता है। जिसे देख चुड़ैल खुश हो जाती है और फिर अपनी लंबी काली जीभ निकाल के सारा खून चाट जाती है।

अमन अभी भी बेहोशी की हालत मे ही पड़ा था। चुड़ैल पहले अमन को जादू से होश मे लाती है फिर उसके साथ सम्भोग करती है। और सुबह होने से पहले अमन का बहुत सारा खून पी जाती है। अमन जख्मी हालत मे खेत मे बेहोश पड़ा था। सुबह होते ही घर वाले उसे ढूढ़ने लगते है। सबको लगता है अमन उसी खेत मे होगा। लेकिन अमन वहां नहीं था। क्योंकि बाद मे चुड़ैल उसे कब्रिस्तान लेके चली गई थी। बहुत ढूढ़ने पर भी किसी को अमन नहीं मिला तो तांत्रिक रामानंद को खबर करनी पडी।

रामानंद तांत्रिक ने अपनी शक्तियों के प्रयोग से अमन को ढूढ़ने की कोशिश की ,लेकिन अमन के हाथ से वो धागा खुल जाने की वज़ह से वो अमन को ढूढ़ नहीं पा रहे थे। अब किसी के पास भी कोई उपाय नहीं था जिससे अमन को ढूढा जा सके।

  एक महीने बाद ठीक अमावस के अगले दिन अमन की लाश उसी खेत मे मिली।खून ना होने के कारण उसका शरीर सफेद पड़ चुका था। और जगह जगह से खाया हुआ था। जैसे किसी जानवर ने उसे नोच नोच के खाया हो।

 अमन अब मर चुका था। और उसी के साथ सारे रहस्य भी दफन हो गए थे।


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