sushant mukhi

Horror


4  

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खिचीक : हॉन्टेड कैमरा

खिचीक : हॉन्टेड कैमरा

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रोशनी शाम के वक़्त समुंदर किनारे खाली पाँव टहल रही थी और ठंडी ठंडी हवाओं का आनदं ले रही थी हमेशा की तरह। 

अचानक उसे अपने तलवे पर कुछ अजीब सा महसूस हुआ। वो रुक गयी और उसने देखा कोई काले रंग की चीज़ समुंदर की उस गीली मिट्टी वाले जमीन पर आधी अंदर आधी बाहर निकली हुई है। उसने हाथ लगा कर उस चीज़ को बाहर निकाला। 

ये क्या है.. उसने मन मे बुदबुदाया। 

उसने हल्के पानी से उसकी मिट्ठी को साफ किया और फिर गौर से देखने पर उसे लगा कि जैसे कोई कैमरा है। 

वो खुश हो गयी। 

अर्रे वाह, ये तो एक कैमरा है शायद।

वो अपने रूम में लौट गयी।

रूम में जा कर रोशनी ने पहले अपना हाथ मुह धोया , थोड़ा फ्रेश हो ली और फिर उस कैमरे से छेड़छाड़ करने को बैठ गयी। 

वो एक पुराना सा दिखने वाला कैमरा था जो न जाने किसका था और कब से वंहा पड़ा था जो आज रोशनी के हाथ लगा या यूं कहो कि पैर लगा। 

इतने में किसी ने रोशनी के कंधे पर ठप से हाथ रख दिया। 

रोशनी चौंक गई।  

अर्रे.. रिलैक्स, मैं हूँ यार। रोशनी की दोस्त मेघा हस्ते हुए बोली। 

" ओह.. मैं चौक गयी थी। ऐसे अचानक कोई कंधे पर हाथ रखता है क्या?? " रोशनी ने कहा। 

मेघा हँसने लगी..

अरे तू कर क्या रही है और ये तेरे हाथ में क्या है.. दिखा जरा

मेघा ने सवालियत अंदाज़ में कहा। 

ये समुन्दर किनारे से मिला .. रोशनी ने मुश्कुराते हुए कहा। 

" पोलोरोइड कैमरा, हम्म, मगर ये काम तो... शायद नही कर रहा.. 

देखो..बटन दबाने पर भी कुछ नही हो रहा। " मेघा ने कैमरे का जायजा लेते हुए कहा। 

अच्छा..? क्या पता शायद रह रह कर खराब हो गयी हो.. रोशनी मायूस होते हुए बोली। 

"तू भी न... क्या क्या उठा लाती है। कभी रंगीन शंक, कभी टूटी पायल , और अब ये खराब कैमरा। तू टहलने जाती है या ये सब चुनने जाती है।। " मेघा ने चिढ़ाते हुए कहा। 

और उठ कर किचन की तरह जाने लगी।  

"ओ हेलो.. मैं तुमको समान चुनने वाली लगती हूँ..??" रोशनी मेघा पर बिगड़ते हुए बोली। 

" हिहिहि.., अच्छा छोड़ ये सब। चल बाजार चल कुछ समान ले आते है किचन में खाने का कोई सामग्री नही है सिर्फ हवा और पानी है ..। " मेघा ने झोला पकड़ते हुए कहा।  

रोशनी ने कैमरे को पलंग के पास वाले टेबल पर रख दिया और 

दोनो स्कूटी पर निकल गए.. 

रोशनी और मेघा रूम मेट्स थी। पिछले 1 साल से दोनो साथ थे। दोनो काम भी एक ही आफिस में करते थे। 

इधर बन्द कमरे में कुछ हलचल होने लगी थी। कुछ आवाजे आने लगे थे मगर रोशनी और मेघा तो थे ही नही घर मे।

कुछ देर बाद रोशनी और मेघा बाजार से लौट आए झोली भर सब्जियो और बाकी की जरूरी चीजों के साथ। रूम में दाखिल होते ही रोशनी को थोड़ा अजीब सा महसूस हुआ। घूँटन सा लगा। शायद रूम में हवा गर्म हो गयी थी इसलिए पर्दे हटा खिड़की खोल दिया उसने। 

मेघा समान लिए किचन की तरह गयी। रोशनी जाकर पलंग में बैठ गयी। फिर उसने गोर किया कि कैमेरा गायब है।

उसने इधर उधर देखा , टेबल के नीचे कैमरा पड़ा हुआ मिला। 

ये नीचे कैसे गिरा ? 

उसने कैमरा उठाया .. और फिर से उसमे उंगली करने लगी।

अचानक उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने उसकी तस्वीर पीछे से ली.. खिचीक.. करके आवाज़ के साथ एक हल्की फ़्लैश लाइट महसूस हुआ था। 

रोशनी चौक कर पीछे मुड़ी मगर सब नॉर्मल था। फिर वो सोचने लगी कि मुझे ऐसा क्यों लगा जैसे पीछे से किसी ने फ़ोटो निकाला 

इतने में मेघा रूम में आ गयी।

क्या हुआ रोशनी इधर उधर क्या देख रही हो ऐसे..? 

मेघा ने रोशनी को हैरान देखकर उससे पूछा। 

"यार.. ये कैमरा नीचे गिरा हुआ था.. मैंने इसे उठाया और फिर मुझे ऐसे लगा जैसे किसी ने पीछे से मेरी फ़ोटो खिंची.. आवाज़ और फ़्लैश लाइट भी महसूस किया मैंने..। " रोशनी ने गम्भीर स्वर में कहा। 

हिहिहि.. मेघा हँसने लगी। 

व्हाट नॉनसेंस.. अरे कोई नही तुमसे गलती से कैमरे का बटन दब गया होगा.. 

नही, यार.. अगर ऐसा होता तो फ़ोटो भी निकलता न। रोशनी ने कहा। 

तो फिर तुम्हे गलतफहमी हुई होगी... छोड़ो ये सब.. आओ देखो मैंने क्या बनाया है जरा टेस्ट कर के देखो। मेघा किचन की और चलने के लिए बोली । 

2 पल रोशनी सोचती रही.. फिर लगा कि हां..शायद कोई वहम ही है। उसने कैमरे को फिर उसी टेबल पर रख दिया और मेघा के पास किचन में चली गयी। 

रात में दोनो ने डिनर किया, इधर उधर की बाते की और सो गए। 

रोशनी... रोशनी... उठ तैयार हो आफिस नही जाना है क्या ? 

मेघा ने उसे हिलाते हुए जगाया। 

अरे..रोशनी तेरा शरीर तो आग की तरह तप रहा है काफ़ी गर्म लग रहा है , , तेरी तबियत तो ठीक है न ?? मेघा ने रोशनी के माथे पर हाथ रखा। सच मे काफी गर्म था। 

पता नहीं.. मेरा बदन थोड़ा दर्द कर रहा, और कपकपी सी लग रही है।। रोशनी ने मुरझाए आवाज़ में जबाब दिया। 

ओह.. मैं एक काम करती हूं नीचे से दवाई ले आती हूँ.. तू आज ऑफिस मत जा , आराम कर शाम तक ठीक हो जाएगी।

मेघा नीचे गयी और दवा ले आई। 

मेघा ने दवा रख दिया और वो ऑफिस चली गयी। 

रूम में रोशनी अब अकेली थी.. दोपहर हो चुकी थी, घड़ी डाँग डाँग कर के आवाज़ कर जाहिर कर रही थी कि 12 बज रहा है। रोशनी की आंखे थोड़ी सी खुली। वो उठी और बाथरूम की तरफ गयी। उसने ब्रश किया और नहा कर निकल आयी। 

मेघा ने नास्ता बनाया था सो रोशनी अपने बेड पर बैठ नास्ता करने लगी। वो टी वी देख रही थी और नास्ता कर रही थी। नास्ता खत्म कर उसने अपना दवाई लिया। 

कुछ देर तक वो टी वी देखती रही। उसकी आंखें भारी होने लगी शायद दवा ने असर किया था। उसने टी वी बन्द किया और बेड पर आराम से लेट गई। और गहरी नींद में उतर गई।

रोशनी एक बन्द कमरे में थी जिसमे अंधेरा पसरा हुआ था। और कुछ फलेश लाइट चमक रहे थे... खिचीक, खिचीक, कोई सफेद साया उसके तरफ बढ़ रहा था। रोशनी मदद के लिए मुह खोल कर चीखे जा रही थी कि धीरे धीरे वो सफेद धुंए जैसा परछाई रोशनी के करीब आया और फिर उसके मुह के अंदर घुस गया... 

रोशनी अचानक नींद से जाग गई और अपने बिस्तर पर बैठ गई। ये एक सपना था.. एक बुरा सपना। रोशनी के चेहरे और शरीर में पसीना था। कमरे में अंधेरा पसरा था , फ़ंखा भी बंद पड़ा था। बिजली गूल थी।  

रोशनी उठी और खिड़की से परदों को एक तरफ कर दिया जिससे रूम में थोड़ा उजाला हुआ। रोशनी बाहर की तरह झाक रही थी मौसम बहुत खुशनुमा था। हल्की हल्की हवाएं बह रही थी, , आसमान बादलों से घिरा हुआ था। 

इतने में अचानक कुछ गिरा खडाक..कर के आवाज़ आई।

रोशनी चौक कर मुड़ी.. वो बेड के पास आई तो कैमरा नीचे गिरा मिला। 

लगता है हवा से गिर गया। उसने कैमरा उठाया और फिर से उसमे उंगली करने लगी। चलता कम है गिरता ज्यादा है कैसा कैमरा है तू.. रोशनी उस कैमरे से बड़बडाने लगी। 

रोशनी ने उसमे एक बटन दवा दिया अचानक एक लाल बत्ती जल उठी। अरे.. ये काम कर रहा है क्या.. रोशनी उत्सुक हो गई। 

उसने कैमरे पर अपनी आंख टिकाई और रूम के दीवार पर क्लिक किया फिर एक लाइट जली और डीररर..र कर के आवाज़ आई कैमरे में से एक फोटो निकल आया। 

रोशनी ने देखा फ़ोटो में कुछ खास नज़र नही आया क्योंकि रूम में ज्यादा उजाला नही था। लेकिन रोशनी पूरी उत्तेजित थी। उसने सोचा बाहर निकला जाए। मौसम भी मस्त है और अब उसकी तबियत भी ठीक थी और कैमरा भी चलने लगा था। 

वो तुरंत हाथ मुह धोयी और कपड़ा चेंज कर निकल गयी।

नीचे गयी तो बिल्डिंग का गार्ड 'मोहन चाचा' उसे मिले। 

अरे रोशनी बिटिया अब तबियत कैसी है तुम्हारी ? मोहन ने पूछा।

आपको कैसे पता कि मेरी तबियत खराब थी ? 

रोशनी ने पूछा।

अरे.. आज तुमको ऑफिस जाते नही देखा तो मेघा बिटिया से पूछा कि अकेली जा रही हो ...??? तो उसने बताया था कि तुम्हारी तबियत खराब है। मोहन ने जाहिर किया। 

ओह.. 

इतने में रॉनी भौकने लगा.. 

लो अब रॉनी भी तुम्हे देख खुश हो गया है शायद। मोहन ने कहा। 

रॉनी मोहन का कुत्ता था जो हमेसा उसके साथ रहता था। इस बिल्डिंग की रखवाली करता था। 

अरे मेरा प्यारा रॉनी.. कैसे हो.. रोशनी रॉनी ने सिर और गर्दन पर हाथ फेरने लगी। 

अरे बिटिया ये तुम्हारे हाथ में क्या है ? मोहन चाचा ने पूछा

ओह.. ये.. ये तो एक कैमरा है , कल शाम यंही समुंदर किनारे मिला था। रोशनी ने जबाब दिया। 

अच्छा.. काम कर रहा है क्या? मोहन ने फिर पूछा

हां, बिल्कुल। 

एक मिनट मैं आपकी फोटो खिंच कर दिखाती हूँ। एक काम करते आप और रॉनी दोनो एक साथ खड़े हो जाइए। 

स्माइल... खिचीक..।। 

गरर.. रर.. कैमरे में से आवाज़ आई और एक फोटो निकला। रोशनी फ़ोटो पकड़ हवा में कुछ पल झटकने लगी और फिर रुक गयी। फ़ोटो उभर आई। उतनी क्लियर तो नही थी मगर ठीक ठाक ही थी। 

उसने उस फ़ोटो को मोहन को दे दिया.. 

" लीजिए अंकल , आपकी फ़ोटो। "

रोशनी मुश्कुराकर बोली। 

"अरे वाह.. ये तो मस्त चीज़ मिल गया तुझे। तत्कालीन फ़ोटो निकाल दिया .. वाह। " मोहन ने भी खुश होते हुए कहा। 

रोशनी बाहर निकल गयी। 

रोशनी मौसम का मज़ा लेते हुए इधर उधर कुछ भी अच्छा लगता तो उसे कैमरे से उतारने लगती। फुल , बागान , पेड़ो और पंछियों की तस्वीरें निकालने लगी। एक पेड़ पे उसने दो कौए बैठे देखे जो उसे अच्छे लगे उसने उनकी तस्वीर निकाल ली। चलते चलते अब वो एक छोटे से पार्क के में थी। वो एक खाली बेच में जा कर बैठ गयी। रोशनी एक एक कर फ़ोटो देख रही थी। 

हम्म..नॉट बेड.. ठीक ठाक ही फ़ोटो खींच लेती हूं मैं , वाह। रोशनी ने खुद से खुद की तारीफ की। 

अचानक एक बुजुर्ग महिला वंहा आ कर रोशनी के बगल में बैठ गयी। महिला रोशनी को देखने लगी। 

कुछ देर बाद..

" क्या तुम फोटोग्रापहर हो? " महिला ने रोशनी की तरफ देखते हुए धीमे आवाज़ में पूछा।

इस पर रोशनी मुश्कुराकर बोली, "जी नही ..आंटी। मैं तो बस ऐसे ही टाइम पास कर रही हूँ..,"। 

क्या नाम है बेटी तुम्हारा ? महिला ने प्यार से पूछा 

रोशनी !  

कहां रहती हो ? 

" बस यंही मीना अपार्टमेंट है न पास में.. वंही अपनी दोस्त के साथ रहती हूं। रूम में अकेले बोर हो रही थी तो बाहर निकल आयी मौसम का मज़ा लेने ..।" रोशनी ने मुश्कुराकर जबाब दिया।  

और आप ? रोशनी ने महिला से पूछा।

" मेरा नाम 'मालती' है। मैं भी यंही पीछे के एक फ्लैट में रहती हूं लीलावती अपार्टमेंट में। मैं हर शाम ढ़लने के बाद यंहा आकर थोड़ा टहलती हूँ फिर इसी जगह आकर बैठ जाती हूँ कुछ देर ..। मुझे अच्छा लगता है। लेकिन आज मौसम इतना खुशनुमा है कि थोड़ा पहले ही आ गयी " महिला ने जवाब दिया। 

काफी देर तक दोनो में बाते होती रही बिल्कुल दो सहेलियों की तरह.. 

रोशनी का मोबाइल बजने लगा। मेघा ने कॉल किया था। 

"अरे रोशनी.. कंहा है तू? अपने रूम में नही ... मैं रूम में हूँ।" मेघा ने सवाल किया।

हाँ.. मैं बाहर निकली ही बस आ रही हूं पांच मिनट में ..

" तेरी तबियत ठीक हो गयी ..?? " मेघा ने पूछा

" हां, बिल्कुल ठीक हूँ मै।। "

"चल ठीक है..तू जल्दी आ मैं बहुत थक गई हूँ..।। " मेघा थकावट भरी आवाज़ में बोली। हां ठीक है आ रही हूं..। रोशनी ने कहा और कॉल काट दिया।

रूम लौटने से पहले रोशनी ने उस महिला की फ़ोटो भी निकाली और उसे दे दी। 

महिला भी खुशी खुशी फ़ोटो खिंचवाई। 

आपसे बाते कर के बहुत अच्छा लगा आंटी .. रोशनी ने कहा।

मुझे भी बहुत अच्छा लगा बेटा तुमसे मिल कर ..।। मालती ने कहा।

कल शाम में मिलेंगे कह कर रोशनी वंहा से रवाना हो गई और अपने रूम के तरफ जाने को हुई। 

कंहा घूमने चली गयी थी ?

बस यंही पास के पार्क में थी.. एक आंटी से बातें करने में व्यस्त हो गयी थी... 

अच्छा..?? मेघा ने कहा

पर तुझे क्या हुआ ? रोशनी ने मेघा का बेजान चेहरा देखते हुए पूछा।

" अर्रे होगा क्या.. आज तू ऑफिस नही गयी तेरे हिस्से का काम भी मुझे ही करना पड़ा। पूरा दिन कंप्यूटर के आगे बैठ कर आंखों की बैंड बज गई सर भी दर्द से फट रहा है .. " मेघा ने जवाब दिया। 

ओह.. सॉरी यार। रोशनी ने मयूसी जाहिर की। 

अर्रे कोई बात नही .. मेघा मुश्कुराकर बोली। 

तू बैठ मैं डिनर रेडी करूंगी आज.. रोशनी बोली।  

हम्म..ठीक है। 

और तेरे हाथ मे ये कैमरा ?? मेघा ने पूछा 

" ओह हां.. पता ये कैमरा काम कर रहा है। मैंने कुछ तस्वीरें भी खिंची।" रोशनी उत्तेजित होते हुए बोली।

और तमाम तस्वीरे अपनी जेब से निकाल उसे दिखाने लगी। 

सच्ची...!?? वाओ.. मेघा ने तस्वीरों को देखा।

ला दिखा कैमरा.. मेघा ने रोशनी से कैमरा लिया। 

तू देख तब तक मैं जा कर किचन का काम देखती हूँ।। रोशनी हाथ मुह धोकर किचन की तरह चल दी।  

मेघा अब कैमरे के साथ व्यस्त थी। तस्वीरों को देख लेने के बाद उसने अब कैमरा हाथ मे लिया और अब वो भी फ़ोटो निकालना चाहती थी। 

उसने कैमरे का मुह अपनी तरफ किया और एक सेल्फी निकालने लगी। खिचीक.. एक हल्की फ़्लैश लाइट हुई और गरर..र.. की आवाज़ आयी और फ़ोटो निकल आयी कैमरे से।  

वाओ..सो कूल!! मेघा भी खुश हो गयी। 

ये तो कमाल का है.. उसने कहा। 

वो किचन की तरफ गयी.. 

वाह.. रोशनी ये तो मज़ेदार है। मेघा ने कैमरे के तरफ इशारा करते हुए कहा। 

है न?? रोशनी रोटी बेलते हुए बोली। 

मेघा ने अब कैमरे से रोशनी की तस्वीर निकलने को हुई। 

रोशनी स्माइल... 

खिचीक... 

गरर..रर की आवाज़ के साथ फ़ोटो निकल आयी। 

एक और..., साथ मे सेल्फी लेते है .. मेघा बोली। 

हां ठीक है.. रोशनी भी बोली।

लेकिन ये क्या सिर्फ फ्लैश हुआ मगर कोई तस्वीर नही निकली.. 

फिर से कोशिश की मेघा ने मगर फिर वही हुआ.. कोई तस्वीर नही निकली। 

ओह.. शायद इसकी रील प्लेट खत्म हो गयी। मेघा ने कहा।

ओह.. शीट..

कोई बात नही नया रील खरीद कर लगा लेंगे .. दोनो ने आपस में कहा। 

दोनो खा कर सो गए..। 

अगली सुबह ..

रोशनी उठ..सुबह हो गयी है।  

रोशनी की आँखे खुली.. 

दोनो नाहा कर, कपड़े पहन तैयार थे। 

दोनो ने नास्ता किया और ऑफिस के लिए निकलने लगे।

नीचे पहुंचते ही दोनो के कदम रुक गए। सामने गेट के पास लोगो की भीड़ जमी हुई थी। 

पास जाकर देखा तो मोहन चाचा यानी गार्ड की लाश पड़ी हुई थी। उसके चेहरे से खून ही खून निकला पड़ा था और शरीर पर जख्मो के गहरे निशान थे जिनपर मक्खियां भिन भिना रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने नोकीले या तेज़ चाकू से काट डाला हो। लाश से बदबू भी आ रही थी।

वंहा पुलिस भी मौजूद थी.. इंस्पेक्टए लाश का मुआयना कर रहे थे। 

लेकिन बात इतनी ही नही थी गेट के बाहर सड़क पर भी एक लाश थी लेकिन ये किसी इंसान का नही बल्कि एक कुत्ते का था। जिसे देख कर साफ जाहिर हो रहा था कि उसको किसी गाड़ी ने कुचल दिया था। कुत्ते की अंतड़िया सड़क पर फैली पड़ी थी और उसपर मक्खियां भिन भिना रही थी। 

किसी को नही मालूम था ये सब कैसे हुआ था। 

रोशनी ये सब देख कर सोच रही थी कि कल शाम ही तो सब ठीक था। मैं मिली थी और बाते किया था , , फ़ोटो भी खिंचा था। फिर ये अचानक ये हादसा कैसे हुआ..।। 

पुलिस के पूछने पर कुछ लोगो ने कहा , " साहब कल शाम से रॉनी वो कुत्ता काफी भौंक रहा था। आते जाते लोगो पर भी भौंकने लगा था किसी पागल कुत्ते की तरह। कभी भौंकता कभी मिमयाता।। " 

हादसा रात में हुआ था इसलिए किसी ने इसे होते हुए नही देखा था।

पुलिस इंस्पेक्टर थोड़ी सोच में पड़ा। 

हो सकता है ये कुत्ता पागल हो गया हो और इसी ने अपने मालिक यानी इस गार्ड को काट कर मार डाला हो और फिर भागने के क्रम में सड़क में किसी तेज़ कार या गाड़ी के नीचे आ गया हो ... पुलिस ने कहा।  

रोशनी और मेघा भी भीड़ में थे। रोशनी पुलिस और लोगो की ये सब बाते सुन कर हैरान हुई , ऐसा कैसे हो सकता है। अचानक कोई कैसे पागल हो जाएगा.. और काटने लगेगा। जब कि कल तक तो सब ठीक ही था। 

पुलिश को लाश के शर्ट के ऊपरी जेब से एक फोटो मिला जो खून से रमा हुआ था जाहिर था ये वही फ़ोटो था जो रोशनी ने अपने कैमरे से निकला था। 

रोशनी ने देखा वो फ़ोटो खून से तरबदर था। 

" ए रोशनी.. चल हमे लेट हो रहा है आफिस के लिए।"

मेघा रोशनी को हिलाते हुए बोली। 

रोशनी और मेघा वंहा से निकल गए। 

पूरा दिन रोशनी के जेहन में वो गार्ड और कुत्ते का हादसा घूमता रहा। वो काम मे ध्यान नही लगा पा रही थी। 

लंच टाइम में भी रोशनी खामोश थी। 

क्या हुआ तेरे को?? मेघा ने पूछा।

कुछ नही.. रोशनी बेमन से बोली।

तो फिर इतनी उदास क्यों दिख रही..

वो हमारे गार्ड अंकल और रॉनी का हादसा मेरे जेहन में घूम रहा है। 

"ओह.. बुरा है पर अब जो हुआ उसमे हम क्या कर सकते।" मेघा ने रोशनी को समझते हुए कहा। 

ऑफिस से लौटते वक्त रोशनी रास्ते मे उतर गयी। 

" मेघा तू जा मैं थोड़ा बाहर घूम कर थोड़ी देर में ही आ जाऊंगी। " रोशनी ने कहा 

" ठीक है.. लेकिन ज्यादा सोचना मत और जल्दी आ जाना। " मेघा ने उससे कहा।

ह्म्म्म... 

रोशनी चलने लगी.. 

वो पार्क की तरफ जा रही थी जंहा पिछली शाम वो एक महिला से मिली थी। वो सोची कि वंही जा कर बैठा जाए और आंटी से थोड़ी बाते करेगी तो शायद अच्छा लगेगा। 

अभी वो आगे चल ही रही थी कि उसे रास्ते पर दो कौवे मरे पड़े मिले। ऐसा लग रहा था जैसे कुछ देर पहले ही उनकी मौत हुई। मगर खून का कोई निसान नही था बस पड़े हुए थे।। रोशनी ये देख कर बहुत भावुक हो गयी।  

पहले गार्ड और रॉनी की लाश अब इन पंछियों की लाश आखिर सुबह से शाम यही देखने को क्यों मिल रहा है। रोशनी सोच में पड़ गयी। क्या ये एक मनहुश दिन है ?? 

वो आगे बढ़ गयी। 

लेकिन अब उसे एक और धक्का लगा जब वो उस जगह की ओर गयी जंहा रोशनी और वो महिला पिछली शाम एक साथ थे , , तो वंहा लोगो की भीड़ थी। 

रोशनी का दिल जोर जोर धड़कने लगा ..  

अब क्या हो गया .. ये भीड़ क्यों ?? उसने खुद में सोचा। 

रोशनी जब नजदीक पहुंची तो देखा कि एक महिला की लाश पड़ी थी..। ये मालती थी वही महिला जो पिछली शाम रोशनी से मिली थी। 

ये देख कर रोशनी की आँखे खुली ही रह गयी। कल तक तो सब ठीक था.. कल शाम मैंने इनसे कितनी सारी बाते की और कितना अच्छा पल गुजरा था कल। पर आज इनकी मौत यंहा कैसे ?? 

पुलिस मौजूद थी.. 

सर, सुबह एक गार्ड और कुत्ते की लाश फिर शाम में यंहा एक महिला की लाश ये चक्कर कुछ समझ नही आ रहा है .. ये महज़ इकतेफाक है या कोई मर्डर या क्या है ...?? हवलदार ने इंस्पेक्टर से पूछा। 

कह पाना फिलहाल मुश्किल है ..गोपी। 

गार्ड के फोरेंसिक रिपोर्ट से जाहिर हुआ है कि उसे किसी कुत्ते ने ही काटा था। और इस महिला के लाश के पास देखो कुछ नारियल गिरे हुए है और इसके सर पर से खून रिस रहा है। 

नारियल का पेड़ , और पेड़ के नीचे ये बेंच। 

हो सकता है ये महिला यंहा इस बेंच पर बैठी थी और हवाएं चली होगी तो ऊपर से पेड़ पर से नारियल सीधे इनके सर पर गिरा हो। पेड़ की ऊँचाई देखो.. कितनी ज्यादा है..इतनी ऊंचाई से एक बुजुर्ग महिला के सर पर नारियल गिरेगा तो क्या होगा.. ??!! 

पुलिस ने कहा। 

पुलिस ने उस महिला के पर्स की तलासी ली तो उसमें से एक फोटो मिला। 

जिस तरह से मौत हुई उससे एक हादसा मालूम पड़ता है।मगर ये फोटो का मिलना और सुबह भी उस गार्ड के जेब से फोटो का मिलना कुछ सम्बन्ध जाहिर कर रहा है। दोनो एक जैसे कार्ड पिक्चर है आखिर मांजरा क्या है ??? पुलिस गहरी सोच में डूबते हुए अपने हवलदार से बोला। 

रोशनी को अब कुछ आभास हुआ। उसने गोर किया कि जिसकी भी मौत हुई उन सबकी फ़ोटो रोशनी ने ही निकाली थी उस कैमरे से ..।

सबसे पहले गार्ड और कुत्ता , , फिर रास्ते मे पंछियों की लाश , , और अब मालती आंटी।।।

यानी जिस जिस की फ़ोटो मैंने निकाली थी उनकी किसी न किसी तरह से मौत हो रही है।। रोशनी ने अपनेआप से कहा। 

उसके रोंगटे खड़े हो गए थे..उसे बहुत ज्यादा घबराहट होने लगी थी ये जानकर की ये सब उस कैमरे की वजह से हुआ.. 

ओह.. शीट...!!! यानी अगला नंबर मेघा का है!!!???

उसने तुरंत मेघा को कॉल किया। 

हेलो.. 

हेलो मेघा.. मेघा.. तुम ठीक तो हो न ?? रोशनी घबरॉइ हुई थी। 

हां.. रोशनी। मैं ठीक हूँ.. मुझे क्या होगा ? तू ऐसे क्यों पूछ रही है... 

मेघा मेघा.. तू तू बस अपना ख्याल रख मैं .. मैं बस तुरंत आ रही हूँ.. रोशनी हड़बड़ा कर कॉल रखती है। 

मेघा को समझ नही आया कि आखिर क्या हो गया है रोशनी को.. 

रोशनी अपने बिल्डिंग की तरफ दौड़ लगा देती है जल्द से जल्द पहुंचने के लिए। 

इधर मेघा आराम से रूम में बैठ टी वी देख रही होती है। 

कुछ ही देर में दरवाजा जोर जोर से बजने लगता है।

मेघा.. ओपन द डोर.. जल्दी।। रोशनी की आवाज़ थी।

मेघा हड़बड़ाकर उठी और दरवाजा खोल दिया। 

रोशनी पसीने से लतपत.. हांफते हुए अंदर आयी। 

अरे.. रोशनी क्या हुआ?? इतनी परेशान क्यों है ?? मेघा हैरान थी। 

मेघा.. मेघा मुझे मालूम चल गया कि अपने गार्ड और रॉनी क्यों मरे.. 

रोशनी ने कहा। 

क्या मतलब? मेघा ने पूछा। 

ये कैमरा .. इस कैमरे की वजह से .. वो मरे।। रोशनी ने जाहिर किया।  

व्हाट..?? क्या बोल रही है रोशनी तू...!!?? मेघा झल्लाते हुए बोली। लगता तेरे पर उस गार्ड और उस कुत्ते रॉनी के मौत का कुछ ज्यादा सदमा चढ़ रखा है.. कुछ भी बोल रही है।

मैं सच कह रही हूँ.. मैंने जिन जिन लोगो की तस्वीर इस कैमरे से निकाली है उन सब की मौत हो रही है ..। याद है कल शाम में कैमरे के साथ बाहर निकली थी..? 

हां तो ??

"मैं सबसे पहले गार्ड अंकल से मिली थी .. फिर उनकी तस्वीर निकाली थी .. 

उसके बाद मैंने दो कव्वो के फोटो खींचे थे वो भी आज मुझे उसी रास्ते मरे मिले और कल शाम में एक महिला से मिली थी , , उसकी भी तस्वीर निकाली थी मैंने और आज मैं उसी से मिलने गयी थी लेकिन पार्क में उसकी लाश मिली।। " रोशनी की आंखे डर से बड़ी थी और वो कांप रही थी।

ये कैसे हो सकता है?? मेघा को कुछ समझ नही आ रहा था वो यकीन नही कर पा रही थी लेकिन रोशनी की आंखे उसे यकीन दिला रहे थे कि वो सच बोल रही है। 

उस कैमरे से तो मैंने अपनी भी फ़ोटो निकाली थी। पर मुझे तो कुछ नही हुआ .. अब तक बस इतना ही बोल पाई थी मेघा कि तभी कुछ सरसराहट महसूस हुई। मेघा और रोशनी खामोशी से इधर उधर नज़रे घूमने लगे। 

तभी अचानक टी वी हिलने लगा... और फिर एक झटके में टी वी फुट गया..और सारे कांच मेघा के जिस्म में तीर की तरह घुस गए। मेघा के चेहरे में छोटे छोटे कांच के टुकड़े घुस चुके थे और उसकी आँखो में भी कांच ही कांच था। चेहरा खून से लतपत हो चुका था। रोशनी साइड में खड़ी थी इसलिए उसपे कोई आंच नही आया था। 

अपनी दोस्त की हालत देख वो पगला सी गयी। वो रोने लगी .. मेघा... मेघा... 

मेघा तड़प तड़प कर मर गयी। 

रोशनी को समझ आ गया था कि अब उसकी अपनी बारी थी .. वो तुरन्त उठी और उस कैमरे को तोड़ने के लिए उसे हाथ मे लेकर दीवार पर जोर से फेका मगर कैमरा टूटने के बजाए किसी रबड़ की गेंद की तरह इधर से उधर उछलने लगा। ये देख रोशनी और ज्यादा डर गई। 

वो अब भागने की कोशिश करने लगी मगर तभी किचन से कुछ आवाज़ आयी.. 

रोशनी डरते डरते किचन में गयी। उसने देखा फ्रिज हिल रहा था उसने हिम्मत करके फ्रिज का दरवाजा खोला तो उसमें से सफेद ठंडी हवा बाहर निकलने लगी और पलक झपकते ही 

हर तरफ वो किसी मोटे धुंए की तरह पूरे रूम में फैल गया। हवा इतना ज्यादा था कि उसे कुछ ठीक से दिखाई तक नही दे रहा था.. पूरा रूम किसी बर्फीले पहाड़ जितना ठंडा हो चुका था रोशनी ठंड से बुरी तरह ठिठुर रही थी .. वो भागने के लिए रूम के दरवाज़े को खोल रही थी मगर वो जाम हो चुका था। रोशनी का शरीर ठंडा होने लगा था , , उसकी नसे जमने लगी थी.. खून का प्रवाह थमने लगा था वो छीकने की कोशिश कर रही थी मुह फाड़ कर मगर उसके हलक से आवाज़ तक नही निकल पा रही थी। 

बत्ती भी गूल हो गयी और सिर्फ सफेद हवा ही नज़र आ रही थी। फिर खिचीक खिचीक खिचीक... आवाज़ होने लगी फ़्लैश चमकने लगे बिल्कुल उसके सपने जैसा हो रहा था।उसे उस सफेद हवा में कोई साया सा नज़र आया.. रोशनी अब भी चीखने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन धीरे धीरे वो साया उसके करीब आने लगा और फिर रोशनी के मुह के अंदर घुसने लगा.. रोशनी की आंखेंं बड़ी बड़ी हो गयी, उसके हाथ पैर सुन्न हो चुके थे.. और फिर सारा का सारा सफेद ठंड हवा रोशनी के भीतर सामा गया। रोशनी वंही फर्स पे गिर पड़ी। 

उसका सारा शरीर सफेद हो चुका था जैसे कोई इंसान कई दिनों बाद किसी बर्फ से निकला हो। उसके होंठ सफेद और सूखे हुए थे और आंख आँखे बड़ी बड़ी खुली रह गयी थी।

रोशनी की भी मौत हो गई।

पुलिस को रूम में रोशनी और मेघा की लाश बरामद हुई और वो कैमरा भी और उनकी तस्वीरें भी... पुलिस को ये समझ आ गया था कि कैमरे, तस्वीरो और इन मौतों के बीच गहरा सम्बन्ध था। लेकिन पुलिस कभी पता नही कर पाई वो कैमरा किसका था , और कंहा से आया था.. बहरहाल उस एक रहस्यमय हॉन्टेड कैमरे को उस शहर के मियूजियम में रख दिया गया हमेशा हमेशा के लिए ताकि और किसी की मौत न हो सके। 


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