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Rohit Verma

Abstract

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Rohit Verma

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जीवन और घर

जीवन और घर

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जीवन जिसकी उम्र 15 साल थी जीवन के पापा फैक्ट्री में कार्य करते है उसकी मांँ घर को सभालती थी उसके पापा रोज फैक्ट्री से दारू पीकर आते थे और जीवन की माँ से लड़ते थे जीवन के दिमाग में गृह क्लेश का असर दिमाग में पढ़ने लगा. जिससे वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा था. वह धीरे - धीरे गलत दोस्तो की संगत में भी जाने लगा. जो नशा ड्रग्स सब लेते थे. और साहिल भी उनकी टीम में शामिल हो गया. वह बिगड़ने की राह पर चल दिया. जीवन की मां को जीवन के अंदर बदलाव नजर आ रहे थे वह कम पढ़ी लिखी होने के कारण समझ नहीं पा रही थी क्या हो रहा है. जीवन कम उम्र में लोगो से लड़ रहा है . एक दिन कपड़े धोते वक्त जीवन की मां को जीवन की जेब से ड्रग्स की पुड़िया मिलती और वह किसी पढ़े लिखे डॉक्टर को दिखाती और वह बोलता इस से नशा करते है जो दिल और दिमाग को खराब कर देता है . जीवन की मां समझ जाती बेटा गलत संगत में जा रहा है एक दिन जीवन के पापा उसकी मां से लड़ रहे होते तो उसी दौरान जीवन के पापा को जोरदार थप्पड़ मारती और जीवन का पापा भिनभिना जाता और जीवन की मां कहती तुम्हारी गलती की वजह से ही जीवन बिगड़ रहा है गलत रास्ते पर जा रहा है उसको समझने की बजाय मुझसे लड़ रहे हो. जीवन की मां जीवन को थप्पड़ नहीं मारती क्योंकि वह अपने पिताजी को देख देख कर सब सीखा है जीवन के पापा को अपनी गलती का एहसास होता और दारू पीना बंद कर देता.

शिक्षा - माँ - बाप क्या सीख दे रहे है और दोस्तों से क्या सीख ले रहे है वह बचपन से शुरू होकर  जवानी तक असर दिखाती है.



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