इतिहास का भूगोल

इतिहास का भूगोल

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उन दिनों की बात है जब मैं बारहवीं कक्षा में था । बोर्ड की परीक्षा सर पर थीं और मैं दिन रात कोर्स की किताबों का रट्टा लगाने में मशगूल था । परीक्षा के ठीक एक  दिन पूर्व मेरे एक रिश्तेदार का लड़का हमारे घर आया । मैंने उसे किसी पारिवारिक समारोह में देखा हुआ था लेकिन करीब से नहीं जानता था । वह लंबा छरहरा और देखने में स्मार्ट था चेहरे पर हल्की तराशी हुई मुछें, बाल अमिताभ बच्चन स्टाइल थे । उसने नीली जींस और काली टी शर्ट पहन रखी थी । वह एक सूटकेस भी लाया था। माँ ने बताया की वह भी बारहवीं का छात्र है और परीक्षा के दौरान हमारे साथ ही रहेगा क्योकि वह दूर रहता है और उसका परीक्षा केंद्र हमारे घर से बहुत पास है । साथ ही कहा कि वो मेरे कमरे में ही रहेगा । 

मेरी पहली प्रतिक्रिया नकारात्मक थी जो मैंने प्रकट नहीं की । मुझे लगा मेरी पढ़ाई में व्यवधान होगा । फिर खुद को समझा लिया कि हो सकता है उसके साथ कंबाइंड स्टडी में ज्यादा पढ़ाई हो । साथ ही मैंने याद किया-“अतिथि देवो भव “।

माँ ने कहा “सुरेश को अपने कमरे में ले जाओ । मैं वहीं चाय और नाश्ता दे जाऊँगी । “

मैंने उसे अपने कमरे में चलने को कहा । उसने सूटकेस उठाया और मेरे साथ हो लिया। कमरे में एक मेज –कुर्सी और एक पलंग था । उसने सूटकेस पलंग के नीचे खिसका कर रख दिया। और खुद पलंग पर बैठ गया ।तभी माँ ने किचन से मुझे आवाज दी । मैं माँ के पास गया । उसने कहा “रवि  तुम्हारी मेज तो बड़ी है । एक कुर्सी दूसरे कमरे से लेकर मेज के बगल में लगा दो । छत पर एक फोल्डिंग पलंग रखा है उसे भी अपने कमरे में सुरेश के लिए लगा देना।“मैंने कुर्सी और फोल्डिंग पलंग कमरे में लगा दिये ।

थोड़ी देर में माँ ट्रे मे दो कप चाय और एक प्लेट नमकीन लेकर आयीं और मेज पर रख कर चलीं गयीं । हम दोनों चाय पीने लगे और बातचीत करने लगे । हम दोनों के विषय समान थे । हम दोनों ही आर्ट साइड के विद्यार्थी थे और इतिहास विषय में दोनों  कमजोर थे  । इतिहास की कुछ कहानियाँ तो मुझे अच्छी लगतीं थी लेकिन इतिहास मे घटी घटनाओं की तरीखेँ और साल याद रखना बहुत ही मुश्किल है । पहला पेपर इतिहास का ही था ।

वह थोड़ी देर में पलंग पर लेटकर बोला “बड़ी थकान लग रही है। मैं थोड़ा आराम करूंगा “मैंने कहा “ठीक है ।“ और मै मेज –कुर्सी पर बैठ कर पढ़ाई करने लगा । थोड़ी देर में मैंने देखा वो सो रहा था । घड़ी पर नज़र डाली दोपहर के 12 बजे थे ।

थोड़ी देर में माँ ने खाने के लिये आवाज दी । मैंने उसे जगाया। मेरे कमरे के बाहर दलहान में माँ ने दो लकड़ी के पटे रख दिये। दो थालियां  परोस कर सामने रख दीं । दाल, रोटी,सब्जी और चावल । दो बड़े ग्लासों में मटके का ठंडा पानी रख दिया और रसोई में चली गयी । हम लोगों ने खाना खाया । माँ ने बीच में  एक दो बार आकर पूछा कि हमें कुछ और चाहिए । सुरेश से उन्होंने कुछ और लेने का आग्रह भी किया । लेकिन परीक्षा के तनाव में हमारी भूख कम हो गयी थी । हम दोनों ने ही कुछ और खाने को नहीं लिया । खा पी कर हम लोग उठ गये ।

हम वापस कमरे में आ गये । मैंने इतिहास की पढ़ाई शुरू कर दी । उसने सूटकेस पलंग पर रखकर उसे खोलकर कुछ कापी किताबें निकालीं और सूटकेस बंद कर उसी पर किताब रख कर पालथी मार कर बैठ कर पढ़ने लगा । मैंने देखा वो कुछ नोट्स भी बना रहा था । शाम करीब 6 बजे उसने मुझसे पूछा, “ “टहलने चलोगे ?”

मैंने कहा, “ “चलते हैं ।“” और हम दोनों तैयार होकर टहलने निकल गये  । 

उसने पास के बाज़ार में चलने को कहा । हम बाज़ार की ओर चल दिये । बाज़ार में वह एक किताबों की दुकान पर रुक गया। वह मुझे दो मिनट रुकने को कहकर दुकान में  गया । जल्दी ही वो  कुछ पुस्तिकाओं के साथ बाहर आया । वो 12वीं की परीक्षा के गैस पेपर्स थे । गैस पेपर यानि परीक्षा में संभावित प्रश्नों की सउत्तर पुस्तिकाएँ । हम लोग फिर वापस घर की ओर मुड़ लिए। 

करीब शाम सात बजे हम वापस घर लौट आये। पापा ऑफिस से घर आ चुके थे और ड्राइंग रूम में टीवी पर न्यूज़ देख रहे थे । पापा ने हमें अपने पास बुलाकर सुरेश के घर परिवार के हाल चाल पूछे । हम लोगों की परीक्षा की तैयारी के बारे में पूछा । थोड़ी देर बाद माँ ने खाने के लिए बुला लिया । हमलोग खाना खा कर अपने कमरे में आ गये ।

हमलोग देर रात तक पढ़ते रहे । सुबह 9बजे से परीक्षा थी ।

सुबह मैं जल्दी जाग गया । मैंने उसे भी जगाया। वह “थोड़ी देर और” कह कर फिर सो गया । मैं नहा धो कर तैयार हो गया और रिवीजन करने लगा । वह करीब आठ बजे उठा और फ्रेश होने चला गया । पंद्रह मिनिट में वह भी तैयार था । माँ कमरे में ही चाय नाश्ता दे गयीं । हम लोगों ने जल्दी जल्दी नाश्ता किया । हम लोगों का परीक्षा केंद्र एक ही था । परीक्षा केंद्र एक किमी दूरी पर एक राजकीय इंटर कॉलेज था । हमलोगों ने तय किया हम साढ़े  आठ बजे मेरी साइकिल से वहाँ जायेंगे ।

हम चलने के लिए तैयार थे तभी उसने अपने नोट्स की कापी और गैस पेपर से पन्ने फाड़े । मैं भौंचक्का उसे देखने लगा । उसने कुछ पन्ने अपनी पूरी बांह की कमीज की बाई बांह मोड़  कर उसके अंदर रख लिए । कुछ पन्ने दाईं बांह में । कुछ पन्ने जूतों में मोड़कर रखलिये ।

मैं कुछ कुछ माजरा समझ गया था फिर भी मैंने पूछा, “ “ये क्या कर रहे हो? ” “

वह बोला, “ “अब तुम से क्या छुपाना । ये परीक्षा की आखरी तैयारी है।” “

“ “मतलब ?” “मैंने पूछा ।

वह मेरे नजदीक आकर धीमी आवाज़ में बोला, “ “मौका मिलेगा तो नकल करूंगा।” “

मैं उसकी बेवाकी पर दंग था ।

मैंने कहा, “ “एसा करना तो गलत है । ”“

वो बोला, “ “मेरी पढ़ाई में जरा भी रुचि नहीं है। मैं कोई टेकनिकल काम सीख कर अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता हूँ। पापा मम्मी की जिद है कि में ग्रेजुएशन तक की डिग्री जरूर हासिल करूँ । इसलिए ...””मेरे मन में एक सवाल उठा ।

 मैंने पूछा, “ “तुमने इतने सारे पेपर्स यहाँ वहाँ छुपाए हैं एक़ज़ामिनेशन हाल में तुम कैसे याद रखोगे कौन से प्रश्न का उत्तर कहाँ है ?” “

वह मुस्कराया और अपनी पेंट्स की चोर जेब से एक पर्चा निकाला और मेरी तरफ बढ़ा दिया । मैंने पढ़ा उसमें लिखा था –“पानीपत का युद्ध –बाईं बांह ,प्लासी की लड़ाई –दाईं बांह ,मुग़ल आर्किटेक्चर –लेफ्ट लेग ,ईस्ट इंडिया कंपनी राइट लेग…” यानि इतिहास का उसके शरीर पर का भूगोल उसमें लिखा था। काम गलत था फिर भी मैं तारीफ किए बिना न रह सका। मेरे मुंह से अनायास निकला –““बहुत खूब ।” “

और अधिक बातचीत या बहस का वक्त नहीं था। मैंने उसका पर्चा उसे वापस किया । उसने उसे वापस अपनी चोर जेब में रख लिया । हम लोग बाहर निकले और साइकिल से परीक्षा केंद्र की ओर चल दिये ।

परीक्षा केंद्र हमारा एक था लेकिन कमरे अलग थे । परीक्षा के बाद वहाँ साइकिल स्टैंड पर मिलने की बात तय कर हम लोग अपने अपने कक्षों मे चले गए । 

मेरा पेपर ठीक ठाक हुआ । परीक्षा के बाद मैं  साइकिल स्टैंड पर पहुंचा । वह वहाँ पहले से उपस्थित था ।

मैंने पूछा, “ “पेपर कैसा हुआ ?” “

वह बोला, “ “कुछ न पूछो । मैं पर्चे निकालने ही वाला था कि फ्लाइंग स्क्वेड  वाले आ गए । गनीमत ये रही उन्होंने मेरी तलाशी नहीं ली । फिर नकल करने की हिम्मत नहीं हुई ।“

मेरे मुंह से निकला , “फिर?”

“ कल नकल के लिए पर्चे बनाने में मुझे कुछ बातें याद हो गईं उन्हीं के आधार पर परीक्षा दी। उम्मीद कम है पास होने की। लेकिन अब मै सोच रहा हूँ नकल न करके पढ़ाई करके ही बाकी परीक्षाएँ भी दूँ ।” “उसने बताया ।

मैंने उसके फैसले पर खुशी जाहिर की और उसका हौसला बढ़ाते हुए कहा, “ “तुम जरूर पास हो जाओगे ।” “

बाकी परीक्षाएं भी उसने ईमानदारी से दीं । परीक्षा के बाद वह अपने घर लौट गया ।

परीक्षा परिणाम जब निकला तो वह वास्तव मेँ अच्छे नंबरों से पास हुआ था । मेरा भी परिणाम अच्छा आया था। मैं उसके लिए विशेष खुश था। 


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