इंटरफियर
इंटरफियर
आज घर मे किसी काम के सिलसिले में हमारी बात हो रही थी। बात बेहद मामूली थी।उस मामूली सी बात ने शुरू होते ही माहौल को नाख़ुशगवार कर दिया।मैं जस्ट उसे समझाना चाहती थी...लेकिन वह मानने को तैयार नही था। और फिर हमारे आर्ग्यूमेंट्स बढ़ते गये।आप तो जानते ही है की किसी भी आर्ग्यूमेंट्स से उन रिश्तों की नींव कमज़ोर होती है।उस रिश्तें में क्या नही था? सबकुछ था।प्यार, मोह्ब्बत, विश्वास.....
आजकल न जाने क्यों कोई भी बात से उसे लगने लगा था कि उसकी इंडिपेंडेंट लाइफ में मैं इंटरफियर करती हूँ।
मैं उसकी बात से निशब्द हो जाती हुँ।
उसे मैं कैसे समझाऊँ की यह तुम्हारे लिए मेरा केअर और कंसर्न है ना कि इंटरफियर....

