इंतज़ार का दर्द..
इंतज़ार का दर्द..
इंतज़ार,,, उस पर भी उस बेखबर का,, जिसका कोई अता पता ही न हो...
बार बार नजर कभी घड़ी पर तो कभी मोबाइल पर जा रही थी.. शाम साढ़े पांच के बाद धड़कने अपनी तय रफ्तार जैसे भूल सी जाती हैं..
हर आहट जैसे उनके आने का ही इशारा हो... दिल की धक-धक और घड़ी की टिकटिक करीब करीब एक जैसी...आज की शाम को खूबसूरत बनाने की सारी तैयारी कर रखे थे... सजने संवरने की कोई खास इच्छा होती नहीं,,
पर आज ना जाने क्यों उनके लिए खुद को आईने के सामने बिठा ही लिया.. घुंघराले बालों को एक तरफ करके पिनअप किया और खुला छोड़ दिया..इन बालों में वैसे भी कोई हेयर स्टाईल नहीं बनती, इसलिए ज्यादातर खुला ही रखते हैं,,
कुछ खास मौकों पर,,
आँखों में हल्का सा काजल लगाया,, मस्कारे का एक सिंगल कोट,,
लिप लाइनर के बाद महरून लिपस्टिक,, आज कुछ गहराई लिए हुए... ये कई बार कह चुके की कभी कभी तो लिपस्टिक लगाया करो न... तो बस आज उनकी इच्छा का ध्यान रख रहे थे,, आसमानी रंग का कफ्तान कुर्ता और सफेद पैंट पहन कर खुद को एक बार निहारा...
,,, यार अच्छी खासी तो लगती हो, जबरन खुद को बुढ़ा बताने में कौन सा सुकून मिलता है,,, ये खुद से कहा और मुस्करा दिए...
रोज आदत है शाम को ब्लैक टी की.. सोचा कि ये तो पीते नहीं.. हम ही बना कर पी लेते हैं..
गर्म चाय पीने की आदत नहीं है,, सो उसे रखकर इनका इंतज़ार करते हुए टीवी लगा कर बैठ गए...
आजकल एक सीरियल में मन लगा है, सोनी टीवी पर आता है,, कामना,, कल के एपिसोड में उसकी नायिका को तड़पते देख लगा कि ये तो हमारे ही शब्द दोहरा रही है..
नायिका के पति की मौत के बाद वो अकेले अपनी सास के साथ जिंदगी बिता रही है.. उसकी सास दोबारा उसका घर बसते हुए देखना चाहती है,, और एक लड़का उन्हें पसन्द भी आता है.. नायिका भी उसे चाहने लगती है..
जैसे कि आजकल के सीरियल में होता है,, एक के साथ दो,, तो बस यहि हो रहा था,, नायक को दूसरी लड़की के साथ बात करते या हँसी मज़ाक करते देख नायिका तड़प उठती है..
अपने कमरे में आकर सिसक पड़ती है...
उसकी सासु माँ पूछती है कि क्या हुआ तो तड़प कर कहती है कि मुझे तकलीफ क्यों होती है उन्हें दूसरी लड़कियों के साथ हँसते बोलते देख कर.. मैं क्यों नहीं सह पाती..
उसकी तड़प देख कर उसकी सास उसे समझाती है कि बेटा ये नॉर्मल बात है,, जब आप किसी से प्यार करते हैं तो उस पर अपना हक समझते हैं... दूसरे शब्दों में इसे जलन भी कहते हैं..
नायिका की एक्टिंग थी या हमारे खुद की मनोदशा,,, हमारी आँखे भर आईं,, उसकी जगह हम खुद को देख रहे थे शायद..
आँखों को जल्दी से पोंछ कर एक बार फिर आईने के सामने खड़े हो गए..
वो देखेंगे तो गुस्सा करेंगे कि क्यों रोई हो.. वो हमारी आँखों में नमी भी नहीं सह पाते..
नजर चाय पर पड़ी जो कि पूरी ठण्डी हो चुकी थी, एक घूंट में उसे खत्म किया..वक्त तो काफी हो गया था.. ये अब तक नहीं आए..
कॉल किया तो रिंग गई पर रिसीव नहीं किए.. दोबारा फिर लगाया तो इन्होंने काट दिया.. तुरन्त ही एक मैसेज आया,,,
आई एम बिजी
हमें लगा शायद थोड़ी देर मे आ जाएंगे.. पर वक्त गुजरता जा रहा था,, ना कॉल ना मैसेज...
इधर हमारी हालत अब बिगड़ने लगी थी.. कम-से-कम बता देते की कहाँ हैं कब तक आयेंगे.. वो जानते भी हैं कि हम कितने विचलित हो जाते हैं,, फिर भी इतनी लापरवाही..
इंतज़ार में रात के साढ़े नौ बज गए... बार बार फोन करना हमें पसन्द नहीं इसलिए मैसेज करते रहे पर कोई ज़वाब नहीं...
बेचैनी और बेबसी से रो पड़े.. भूख प्यास सब खत्म..
घर के अंदर सुकून ना बाहर..
साढ़े दस बजे जनाब मुस्कराते आए... कोई और वक्त होता तो शायद गुस्से में इन्हें कूट कर रख देते.. पर... देखते ही इनसे लिपट गए..
"क्या हुआ यार,, क्यों रो रही हो... "
कुछ देर यूं ही लिपटे खड़े रहे फिर पूछा,,
"कहाँ थे आप?? एक मैसेज या कॉल ही कर देते,, आप जानते हैं न कि हम किस कदर परेशान हो जाते हैं... "
"साॅरी यार घर आने के लिए निकला ही था कि प्रिंसिपल साहब ने फरमान जारी कर दिया कि मीटिंग है.. हम सभी जाकर बैठे,, सोचा कि कुछ देर में फ्री हो जाएंगे, पर काफी लम्बी चली.. और मीटिंग के बीच मैं मोबाइल भी इस्तेमाल नहीं कर सकता था.. इसलिए मुश्किल से एक मैसेज लिखा.. और वहां से छूटते ही सीधा तुम्हारे पास.. वैसे आज काफी हसीन लग रही हो.. "
"ये बात तब सही लगती जब हम सच में हसीन लग रहे थे.. अब तो कजरा और लाली सब धुल चुकी.. पल पल कैसे गुजरा है आपको क्या पता.. "
"जानता हूं सब... पर मैं कितना भी समझा लूँ तुम्हें,, तुम्हारी ये बेचैनी तुम पर हावी हो ही जाती है.. "
"देखिए तो दिल अब तक जोर से धड़क रहा है.. "
"मुझे कैसे पता कि कितने जोर से धड़क रहा है.. हाथ रखूं दिल पर या कान लगाऊँ.. बोलो. "
"ओह हो.. ये बात है.. कुछ लगाने या रखने की जरूरत नहीं है,, जाइए पहले फ्रेश होकर आइए फिर खाना खाते हैं,, "
हम ने कृत्रिम गुस्से से कहा.... इनके आते ही दिल में कितना सुकून था जो कुछ देर पहले अशांत होकर विचलित हुआ जा रहा था.. हमारी तो जिन्दगी में सुकून ही इनके होने से है...

