Moumita Bagchi

Romance


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Moumita Bagchi

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इज़हारे-ए- इश्क

इज़हारे-ए- इश्क

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"तुम लोग स्कूल पढ़ने आते हो या इश्क लड़ाने? तुम्हारे जैसे कुछ लोगों के कारण ही विद्यालय का नाम खराब होता है।" भूगोल की शिक्षिका, मिसेज़ तनेजा जो 9 ई की क्लास टीचर भी थी गुस्से में चिल्लाई।

"तुम दोनों की हिम्मत कैसी हुई कि स्कूल बंक मारकर सिनेमा देखने जाते हो?" तनेजा मैम उसी रौ में चिल्लाए जा रही थी। पास खड़े अमन और श्रेयसी के पेरेन्ट्स का भी उन्हें ध्यान न रहा था!

"तप्पाक" एक जोरदार तमाचा अमन के गाल में आकर पड़ा। अपने बेटे के बारे में यह शिकायत सुनकर अमन के पिता आग बबूला हो गए थे। उन्होंने आव देखा न ताव! लड़के के गाल पर अपना गुस्सा निकाल बैठे।

बात यह थी, कि 9ई के श्रेयसी और अमन का आज स्कूल में पेरेन्ट काॅल हुआ था।

अमन का अपराध इतना था कि कल उसने अपने बेस्ट फ्रेन्ड करनजीत से झूठमुठ कहा था कि वह और श्रेयसी एक दिन पहले मार्निंग शो में फिल्म देखने गए थे। उसके बाद, यह बात जाने कैसे पूरे स्कूल में फैल गई थी और उड़ती हुई टीचर के कानों तक भी जा पहुँची थी। और उन्होंने बिना कोई समय गँवाए विद्यालय की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए उन दोनों के पेरेन्ट्स को स्कूल में सुबह सुबह बुला डाला था!

हम जिस समय की बात कर रहे हैं, वह ऐसा जमाना था कि बच्चों के विद्यालय से बुलाया जाना पैरेन्ट्स के लिए बड़ा अपमानसूचक समझा जाता था और वे पैरेन्ट्स अपने इस अपमान का बदला बच्चों की भरपूर धुनाई करके लेते थे। अब धोबिन पर बस न चलेगा तो गधे के कान ही ऐंठे जाएंगे न?

ऐसे में, बेचारे बच्चों की हालत सबसे नाज़ुक हुआ करती थी। उनको दोनों तरफ की ही जिल्लत झेलनी पड़ती थी। इसलिए वे बड़े फूंक फूंककर कदम रखते थे। परंतु कई बार मामला हाथ में नहीं होता था। जैसा कि इस समय वह अमन के हाथ से निकल चुका था।

इधर अपने समस्त अपराधों से अनभिज्ञ श्रेयसी सिर नीचा किए हुए खड़ी थी। इस समय अमन के पिता और श्रेयसी की माँ अपने बच्चों को बारी बारी से डाँटे जा रही थीं। वह भी पूरी कक्षा की अड़तीस जोड़ी घूरती हुई निगाहों के सामने।

श्रेयसी ने एकबार तिरछी नज़रों से अमन को देखा। उसके गाल में ऊंगलियों के निशान स्पष्टरूप से दिखाई दे रहे थे। परंतु श्रेयसी को लगा कि जैसे ज़ख्म गालों से ज्यादा कहीं और अधिक गहरा है। उसे अमन की हालत पर दया आने लगी।

जैसे ही डाँट-डपट एक मिनट के लिए रुकी श्रेयसी ने पूरी हिम्मत के साथ कह डाला, " मैडम, बुधवार को पहले और दूसरे पिरियड में फिजिक्स का टेस्ट था। मैंने वह एक्ज़ाम दिया था। जहाँ तक मुझे याद है, अमन भी उस समय कक्षा में उपस्थित था। फिजिक्स के मैथ्यूज़ सर ने अटेन्डेन्स भी लिया था।"

इसके बाद मैथ्यूज़ सर बुलाए गए और अटेन्डन्स रजिस्टर चैक किया गया तो श्रेयसी की बात सही निकली।

मिसेज़ तनेजा के चेहरा इस समय देखने लायक था। वे बारी- बारी से दोनों पेरेन्टों से हाथ जोड़कर उन्हें बेवजह तकलीफ़ देने के लिए माफ़ी माँगने लगी थीं।

कक्षा की ओर जाते हुए अमन ने श्रेयसी को हौले से कहा था,

" सारी"।

बेचारे की ऐसी हालत थी कि वह उसकी ओर देख भी नहीं पा रहा था। एक मासूम से झूठ की इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, यह उसने कभी न सोचा था। उसे लगा कि श्रेयसी जरूर उसके साथ जबरदस्त झगड़ा करेगी।

" अगली बार जब मेरे साथ सिनेमा जाने का ख्याल आए तो आकर सिर्फ मुझसे ही कहना, समझे? दूसरे लोगों को यह सब बताने का नतीजा तो अपनी आँखों से देख ही रहे हो?" कहकर श्रेयसी वहाँ से लंबे- लंबे कदमों से चलकर कक्षा में घुस गई।

इधर अमन के पाँव वहीं ठिठक गए। यह क्या कह गई, श्रेयसी? इस जवाब की उसे जरा भी प्रत्याशा न थी!


धीरे- धीरे समय बीतता गया। अब अमन काफी बदल चुका था। अब वह पहले जैसे बेहूदा मज़ाक नहीं किया करता था। श्रेयसी ने उस दिन उसे बचा लिया था और सबसे बड़ी बात यह थी कि उसने उसे माफ़ भी कर दिया था।

वह श्रेयसी के प्रति कृतज्ञता से भर उठा था। परंतु उससे भी बढ़कर कुछ और था जो अमन के अंदर पनप रहा था। वह कक्षा के बीच में सबकुछ भूलकर अवाक् श्रेयसी को एकटक देखा करता था। उस समय अपने आसपास उसे कुछ भी नज़र नहीं आता था। लगता था कि जैसे वे दोनों ही सिर्फ वहाँ बैठे हो, और कोई नहीं हैं, कहीं भी।

इधर श्रेयसी को देखकर नहीं लगता था, कि उसके अंदर कोई विशेष परिवर्तन हुआ हो। वह पहले जैसे ही नाॅर्मल रहती थी।अपने पढ़ाई और बाॅस्केट बाॅल की कोचिंग में पूरा ध्यान देती थी। कभी कभी उसकी नज़रें अमन से टकरा जरूर जाया करती थी। तब वह पाती कि अमन उसकी तरफ ही देखे जा रहा है।

कहते हैं कि अगर कुछ देर तक एकटक किसी की आँखों में आँखें डालकर देखो तो उससे मोहब्बत हुए बिना नहीं रहता है!

एक महीने बाद

स्कूल की छुट्टी के बाद जब श्रेयसी घर जाने को स्कूल-गेट से निकली तो उसने गेट के सामने अमन को प्रतीक्षारत देखा। उसे देखते ही वह आगे आया और श्रेयसी से बोला,

" तुम से कुछ बात करनी थी, श्रेयसी!"

श्रेयसी की हृदयगति एकाएक बहुत तेज हो गई। परंतु उसे तुरंत काबू में करके ज़रा मुस्कराकर वह अमन से बोली,

" कहो न, क्या कहना चाहते हो?"

इसके बाद अमन और वह साथ- साथ चलने लगे।

अमन बहुत कोशिश करने लगा कुछ कहने को परंतु उसके मुँह से बोल ही नहीं फुट रहे थे।

उधर उसके दोस्त जो दूर खड़े इशारे- इशारे में उसकी हौसला बढ़ा रहे थे, उसे कुछ कहने के लिए उकसाने लगे। परंतु जैसे ही अमन कुछ बोलने को हुआ तो उसने पाया कि उसकी जीभ तालु से जा चिपकी है।

श्रेयसी की भी यही हालत थी। उसके पैर काँपने लगे थे। गला भी बहुत सुख गया था। बार-बार दोनों हाथों की ऊंगलियाँ वह मटका रही थी। इतनी नर्वस तो वह पहले कभी नहीं हुई थी।

वह वहीं सड़क किनारे लगी एक बेंच पर अचानक बैठ गई। उसकी देखादेखी अमन भी थोड़ी देर बाद उसके पास आकर बैठ गया। और हिम्मत करके पूछा,

" श्रेयसी, तुम किसी को पसंद करती हो? मतलब तुम्हारा कोई बाॅय फ्रेन्ड है?"

अबतक श्रेयसी थोड़ी संभल चुकी थी। उसने धीरे से सिर हिलाकर कहा ,"हाँ।"

अमन को जैसे इलैक्ट्रिक का शौक लगा। वह बड़े बेमन से बोला,

" अच्छा!! अच्छी बात है।"

श्रेयसी उसकी ओर देखकर मुस्कराई। बोली,

" चलो, तुम्हें मेरे बाॅय फ्रेन्ड का फोटो दिखाती हूँ।"

" मैं क्या करूँगा, देखकर!" अमन मुँह लटकाकर बोला।

" अरे, देखो न! कम से कम, यह तो कह ही सकते हो कि कैसा है, मेरे लायक है या नहीं?"

यह कहकर उसने एक लिफाफा दिया और बोली,

", इसे खोलकर देखो!"

अमन को लगा कि वह उठकर वहाँ से चले जाए। परंतु अपने बाॅयफ्रेन्ड का फोटो दिखाए बिना श्रेयसी उसे छोड़ने वाली न थी। वह उसके पीछे ही पड़ गई।

जब वह किसी तरह न मानी तो अमन ने वह लिफाफा खोला। एक सुन्दर नक्काशीदार फोटोफ्रेम जैसा कुछ था उसमें । काँपते हाथों से अमन उसे खोला और अपने चेहरे के पास ले आया।

" अरे! फोटोफ्रेम तो खाली है!" जैसे ही अमन बोला, शाम की ढलती धूप उस चीज़ पर पड़ी और वह चमक उठी।

वह फोटोफ्रेम नहीं था। एक सुंदर नक्काशीदार आईना था!

अमन जैसे ही उसे अपने चेहरे के पास ले आया उसमें अपना अक्स देखकर वह चौक उठा!

स्कूल का बैग तब उसके हाथ से छूट गया जब वह अचानक बेंच से उठकर खड़ा हो गया था!

इधर श्रेयसी उससे दूर खड़ी मुस्करा रही थी। वह अपनी हँसी दबाकर अपना बनावटी चेहरे के साथ बोली,

" जानते हो अमन, पर एक ही प्राॅब्लेम है। मैं अपने ब्याॅयफ्रेन्ड से कभी अपनी दिल की बात न बता सकी---"

उसकी बात अभी पूरी नहीं हो पाई थी कि अमन भागकर पीछे से उसके पास आया और उसे कसकर गले से लगाकर कान में फुसफुसाते हुए बोला,

" I love you "।



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