Sneha Dhanodkar

Inspirational


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Sneha Dhanodkar

Inspirational


हिंदी मीडियम वाली

हिंदी मीडियम वाली

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दिशा शुरुआत से ही सरकारी हिंदी माध्यम स्कूल मे पढ़ी थी। पर उसकी अंग्रेजी की शिक्षिका बहुत अच्छी थी और उसे पढ़ने रूचि भी थी, इसीलिए उसकी अंग्रेजी भी अच्छी थी।

दिशा पढ़ने के साथ अन्य गतिविधियों मे भी होशियार थी। वो जिस भी प्रतियोगिता मे हिस्सा लेती जीतती थी। क्योंकि वो हर काम मे अपना शत प्रतिशत देती थी। उसे लिखने का भी शौक था। और पुस्तकें पढ़ने का भी। जब भी समय मिलता वो कुछ नया पढ़ती थी। और किसी भी नई बात को सीखने मे हमेशा तत्पर रहती थी। स्काउट गाइड का भी प्रशिक्षण उसने लिया था।

दिशा ने अपना स्नातक भी सरकारी महिला महविद्यालय से ही पूर्ण किया। वो पहली बार महाविद्यालय की और से राष्ट्रीय स्तर पर युवा महोत्सव मे भाग लेने गयी। उसे बहुत मजा आ रहा था। उसने वाद विवाद प्रतियोगिता और गायन मे भाग लिया था।

शाम को होटल मे सब खाना खा रहे थे। उसे किसी अंग्रेजी शब्द का मतलब नहीं समझ आया तो उसने पूछ लिया। सब उसका मज़ाक उड़ाने लगे । उस का नाम सबने हिंदी मीडियम रख दिया।  उसे अच्छा नहीं लगा। पर वो कुछ नहीं बोली। क्योंकि उसे अपने हिंदी होने पर गर्व था।

उसने अपनी दोनों प्रतियोगिताओं मे प्रथम स्थान प्राप्त किया। रात को कैंप फायर था। सभी को कुछ ना कुछ प्रस्तुति देनी थी। दिशा भी सोच रही थी, क्या करे।

उसने एक गाना गाया। सबको पसंद आया। अगले दिन सब घूमने के लिये निकले। बस मे सब अंताक्षरी खेल रहे थे। तभी बस ड्राइवर भईया को कुछ तकलीफ़ हुई और उन्होंने बस रोक दी।

देखते ही देखते ड्राइवर भईया बेहोश हो गए। सब घबरा गए। ऐसे समय मे दिशा ने आगे आकर भईया की नाड़ी की जाँच की। फिर उनके दिल पर कुछ अंतराल मे जोर जोर से हाथों से धक्का दिया और उनके मुँह मे श्वास भी दी।

ड्राइवर भईया को होश आ गया था। सब आश्चर्य से दिशा याने उनकी हिंदी मीडियम को देख रहे थे। अब तक डॉक्टर भी आ गए थे दिशा ने भईया की हालत बता कर अपने दिए हुए प्राथमिक उपचार के बारे मे डॉक्टर को बताया। उन्होंने तुरंत उन्हें दवा दी। और दिशा को शाबाशी भी दी क्योंकि अगर वो आगे आकर उन्हें ये प्राथमिक उपचार नहीं देती तो ड्राइवर भईया की जान भी जा सकती थी।

डॉक्टर के साथ सभी ने दिशा के लिये तालिया बजायी और उसकी तारीफ की। और सबने उससे अपने व्यवहार के लिये माफ़ी भी मांगी। दिशा ने सिर्फ इतना ही कहा की लोगो का आकलन उनकी भाषा के आधार पर मत कीजिए। और हिंदी तो हमारी राष्ट्र और मातृ भाषा दोनों है तो उस पर गर्व करना सीखिए।।


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