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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

गोवर्धन पूजा

गोवर्धन पूजा

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उसने तो गोवर्धन पूजा को अपना आधार बनाया

हे कृष्ण तेरी महिमा है अपरंपार।

इंद्रदेव थे बड़े ही अभिमानी

पूजा सभी करते वो हर नर-नारी ।


उनके इस अभिमान को

चुर करने के लिए कृष्ण ने लीला रचाई 

गोवर्धन पर्वत को पूजो

उसने यह बात गोकुल वासियों को है समझाई ।


कुपित हो इंद्रदेव बरसे कई दिन रात तक पानी 

गोकुल वासियों की रक्षा के खातिर वो जाए ।

गोवर्धन पर्वत को उठाया एक वो उंगली पर

घमंड उतारा इंद्रदेव का दौड़ श्री कृष्ण चरणों में आए।


दीपावली के दूसरे दिन प्रतिपदा के दिन

पूजा होती है उनकी , हर घर घर बनते गोवर्धन भगवान का ।

अन्नकूट का भोग , मिश्री , माखन की खीर चढ़ाकर 

सब को गोवर्धन पूजा का महत्व को समझाया है ।


उसी दिन से मनाया जाने लगा यह पर्व 

गोवर्धन पूजा से मिलता श्री कृष्ण का अपार , प्रेम व आशीष ।




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